देश ने खोया एक महान योद्धा, भारतीय सेना ने नम आंखों से दी पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी.एन. शर्मा को अंतिम विदाई
- 97 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए वीर सैनिक, बरार स्क्वायर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; राष्ट्रसेवा, साहस और जनकल्याण की मिसाल रहा जीवन
नई दिल्ली।
भारतीय सेना ने शनिवार को देश के एक महान योद्धा, अनुशासन और समर्पण की प्रतिमूर्ति रहे पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्व नाथ शर्मा (सेवानिवृत्त), पीवीएसएम, एवीएसएम, एडीसी को भावभीनी अंतिम विदाई दी। राजधानी नई दिल्ली स्थित बरार स्क्वायर श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 97 वर्ष की आयु में निधन के बाद देश ने अपने उस वीर सपूत को अंतिम प्रणाम किया, जिसने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सुरक्षा, सेना के गौरव और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

सैन्य परंपराओं और गरिमामय माहौल के बीच आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में भारतीय सेना के जवानों ने अपने पूर्व सेनाध्यक्ष को अंतिम सलामी दी। इस भावुक क्षण में मौजूद हर आंख नम थी और हर दिल में उस महान सैनिक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव था, जिसने दशकों तक भारत की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
थल सेनाध्यक्ष ने अर्पित की श्रद्धांजलि, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने किया नमन
थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के सभी रैंकों की ओर से जनरल विश्व नाथ शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल एवं पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी दिवंगत जनरल शर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए और अंतिम संस्कार में शामिल होकर देश के इस महान सैनिक को सम्मान दिया। समारोह में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, पूर्व थल सेनाध्यक्ष, वायुसेना एवं नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, वर्तमान एवं पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक तथा परिवार के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में उस वीर योद्धा को याद किया, जिनका जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा।
मेजर सोमनाथ शर्मा के परिवार की गौरवशाली सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया
जनरल विश्व नाथ शर्मा का जन्म 4 जून 1930 को लंदन (ब्रिटेन) में हुआ था। वे भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे। उनके परिवार का भारतीय सेना से गहरा और गौरवशाली संबंध रहा। उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी देश सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक ऐसे परिवार में जन्म लेने वाले जनरल शर्मा ने बचपन से ही अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा के संस्कारों को आत्मसात किया और आगे चलकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंचे।
1950 में शुरू हुआ सैन्य सफर, 1990 तक संभाली सेना की कमान
जनरल शर्मा ने देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे 5वें रेगुलर कोर्स के तहत सेना में शामिल हुए और 4 जून 1950 को 16 लाइट कैवेलरी में कमीशन प्राप्त किया। अपने लंबे और गौरवशाली सैन्य जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने 66 आर्मर्ड रेजिमेंट के गठन के समय सेकंड-इन-कमांड के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर का दायित्व संभाला और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें—
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आर्मर्ड डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ
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कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ
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सेना मुख्यालय में महानिदेशक सैन्य अभियान (DGMO)
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कॉलेज ऑफ कॉम्बैट (अब आर्मी वॉर कॉलेज) के कमांडेंट
जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल रहे।
थल सेनाध्यक्ष के रूप में दिया मजबूत नेतृत्व
जनरल विश्व नाथ शर्मा ने 30 अप्रैल 1988 से 30 जून 1990 तक भारतीय थल सेना के प्रमुख के रूप में देश की सेवा की। इससे पहले उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, जयपुर और कोलकाता सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में कमान संभाली। उन्होंने माउंटेन ब्रिगेड, आर्मर्ड ब्रिगेड, माउंटेन डिवीजन, कोर और ईस्टर्न कमांड जैसे महत्वपूर्ण सैन्य संगठनों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने रणनीतिक क्षमता, अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। उनकी असाधारण सेवाओं और योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रही राष्ट्रसेवा की भावना
जनरल शर्मा का जीवन केवल सैन्य सेवा तक सीमित नहीं रहा। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा को अपना मिशन बनाया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क तपेदिक (टीबी) क्लिनिक के माध्यम से चार दशक से अधिक समय तक सेवा कार्य किया। वे अपनी चिकित्सा टीम के साथ दूर-दराज के गांवों तक पहुंचे। कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में भी उन्होंने लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य किया। कई बार वे दुर्गम इलाकों में पैदल चलकर उन लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए इलाज की सुविधा तक पहुंचना मुश्किल था। उनकी यह सेवा भावना साबित करती है कि एक सच्चा सैनिक केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर भी देश की सेवा करता है।
एक युग का अंत, लेकिन प्रेरणा हमेशा जीवित रहेगी
जनरल विश्व नाथ शर्मा का जीवन साहस, अनुशासन, कर्तव्य और मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण रहा। उन्होंने अपने सैन्य जीवन से जहां देश की सीमाओं की रक्षा की, वहीं सेवानिवृत्ति के बाद समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगाई। उनका योगदान भारतीय सेना के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। आने वाली पीढ़ियों के सैनिकों और देशवासियों के लिए उनका जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
भारत ने आज अपने एक महान योद्धा को खो दिया, लेकिन जनरल वी.एन. शर्मा की वीरता, सेवा और राष्ट्रभक्ति की गाथा हमेशा अमर रहेगी।







