मानदेय में भारी अंतर से नाराज आयुष चिकित्सक, डिप्टी सीएम को सौंपा ज्ञापन

मानदेय में भारी अंतर से नाराज आयुष चिकित्सक, डिप्टी सीएम को सौंपा ज्ञापन
  • एमबीबीएस चिकित्सकों के समान मानदेय की मांग, 20 सितंबर तक निर्णय नहीं हुआ तो 21 सितंबर को लखनऊ में प्रदर्शन की चेतावनी

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, शुभम शर्मा, गोरखपुर, .प्र.

बड़हलगंज (गोरखपुर)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत लंबे समय से सेवाएं दे रहे आयुष चिकित्सकों की मानदेय विसंगति का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है। मानदेय में कथित असमानता को लेकर आयुष चिकित्सकों ने शासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित ज्ञापन उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के माध्यम से प्रेषित किया। चिकित्सकों ने मांग की है कि लंबे समय से चली आ रही मानदेय संबंधी विसंगति को दूर कर उन्हें न्यायसंगत मानदेय प्रदान किया जाए। मंगलवार को राजा हरिप्रसाद मल्ल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, खड़ेसरी के आयुष चिकित्सकों ने क्षेत्रीय विधायक राजेश त्रिपाठी के नेतृत्व में उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। चिकित्सकों ने इस दौरान अपनी मांगों को शासन के समक्ष मजबूती से रखने के लिए विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया।

वर्षों से सेवा, लेकिन मानदेय में अंतर का मुद्दा

चिकित्सकों की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग 4,000 आयुष चिकित्सक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्ष 2009-10 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 2009-10 और 2010-11 के दौरान आयुष एवं एमबीबीएस चिकित्सकों का मासिक मानदेय समान था।

चिकित्सकों का कहना है कि समय के साथ एमबीबीएस चिकित्सकों के बेसिक मानदेय में वृद्धि कर इसे 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया, जबकि आयुष चिकित्सकों का बेसिक मानदेय 7,000 रुपये प्रतिमाह बताया गया है। चिकित्सकों ने इसी अंतर को मानदेय विसंगति का प्रमुख आधार बताते हुए शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले चिकित्सकों के मानदेय में इतना अंतर लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। आयुष चिकित्सकों का कहना है कि वे भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

20 सितंबर तक सकारात्मक निर्णय की मांग

ज्ञापन के माध्यम से आयुष चिकित्सकों ने शासन से मांग की है कि लगभग 4,000 आयुष चिकित्सकों के हितों को ध्यान में रखते हुए 20 सितंबर तक मानदेय विसंगति दूर करने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाए। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक उनकी मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं होता है, तो प्रदेशभर के आयुष चिकित्सक 21 सितंबर को सुबह 8 बजे लखनऊ में विरोध-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। चिकित्सकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित अपनी न्यायोचित मांग को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखना है।

विधायक के प्रयास की चिकित्सकों ने की सराहना

ज्ञापन सौंपने के बाद आयुष चिकित्सकों एवं मेडिकल कॉलेज से जुड़े छात्रों ने विधायक राजेश त्रिपाठी के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि विधायक ने पूर्व में उनकी आवाज को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था और उसी क्रम में उन्होंने चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मांग को उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। चिकित्सकों ने बताया कि विधायक की ओर से उनकी समस्या के शीघ्र समाधान के लिए प्रयास किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है। इससे चिकित्सकों में अपनी मांग को लेकर सकारात्मक उम्मीद जगी है।

अब शासन के निर्णय पर टिकी निगाहें

आयुष चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक लंबे समय से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में मानदेय को लेकर उठी यह मांग अब शासन के समक्ष पहुंच चुकी है। चिकित्सकों की ओर से निर्धारित समय सीमा भी सामने रखी गई है और 21 सितंबर को लखनऊ में प्रस्तावित प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन आयुष चिकित्सकों की मानदेय संबंधी मांग पर क्या निर्णय लेता है। यदि समय रहते कोई सकारात्मक पहल होती है तो प्रस्तावित आंदोलन टल सकता है, वहीं निर्णय न होने की स्थिति में 21 सितंबर को राजधानी लखनऊ में आयुष चिकित्सकों का प्रदर्शन इस मुद्दे को और व्यापक रूप दे सकता है।

इस दौरान डॉ. वसीम सिद्दीकी, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. आकाश मौर्य, डॉ. अक्षय कर्नवाल, डॉ. अमित सिंह, डॉ. मर्दुल यादव सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।