बचपन पर नहीं होगा अत्याचार : आजमगढ़ में बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान
- रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों में एएचटी, जीआरपी, आरपीएफ व चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त कार्रवाई, दुकानदारों को दी सख्त चेतावनी

आजमगढ़, 28 जुलाई।
"हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार है, श्रम और शोषण का नहीं।" इसी संकल्प को साकार करने के लिए आजमगढ़ में मंगलवार को बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया गया। रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों तक संयुक्त टीम ने सघन जांच अभियान चलाते हुए लोगों को जागरूक किया और बच्चों से मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।

मुख्यालय महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशन में संचालित बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात) एवं नोडल अधिकारी, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) के पर्यवेक्षण में यह विशेष अभियान चलाया गया।
इस अभियान में थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी), चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त टीम ने भाग लिया।
रेलवे स्टेशन से बाजार तक चला सघन निरीक्षण
संयुक्त टीम ने आजमगढ़ रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं भी बच्चों से मजदूरी या भीख मंगवाने जैसी गतिविधियां संचालित न हो रही हों।
टीम ने दुकानदारों, होटल संचालकों, प्रतिष्ठान मालिकों और व्यापारियों से सीधे संवाद कर उन्हें बाल श्रम कानूनों की जानकारी दी तथा स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी बच्चे से श्रम कराना कानूनन अपराध है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी प्रतिष्ठान पर बाल श्रमिक पाए गए तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
'बचपन बचाइए, भविष्य संवारिए' का दिया संदेश
अभियान के दौरान लोगों को यह संदेश दिया गया कि बच्चों का स्थान स्कूल और खेल का मैदान है, न कि फैक्ट्रियां, दुकानें या सड़कों पर भीख मांगना। अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के भविष्य पर भी गंभीर आघात है।
संयुक्त टीम ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति, मानव तस्करी या किसी भी प्रकार के शोषण का शिकार होता दिखाई दे तो तुरंत पुलिस अथवा संबंधित हेल्पलाइन पर सूचना दें, ताकि समय पर कार्रवाई कर बच्चे को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
इन हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत दें सूचना
जनजागरूकता अभियान के दौरान नागरिकों को निम्नलिखित आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई—
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108 – एम्बुलेंस सेवा
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112 – आपातकालीन पुलिस सहायता
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1090 – महिला हेल्पलाइन
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1930 – साइबर हेल्पलाइन
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1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन
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1076 – मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
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181 – महिला सहायता हेल्पलाइन
अधिकारियों ने कहा कि एक जागरूक नागरिक की समय पर दी गई सूचना किसी मासूम बच्चे को शोषण की जिंदगी से निकालकर सुरक्षित भविष्य दे सकती है।
इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
अभियान में प्रभारी निरीक्षक अभयराज मिश्र, उपनिरीक्षक उमेश कुमार (थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग), रजनीश श्रीवास्तव (सदस्य, बाल कल्याण समिति), संजय शाही (चाइल्ड हेल्पलाइन), कांस्टेबल सत्यम कुमार तथा महिला कांस्टेबल चमन खातून सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
आजमगढ़ पुलिस, एएचटी, जीआरपी, आरपीएफ और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त पहल केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश है कि हर बच्चे का बचपन सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध सतर्क रहें, तो हजारों मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार से निकलकर शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान की रोशनी तक पहुंच सकता है।







