गगहा में अपराध पर लगाम या शिकायतों पर सिर्फ खानापूर्ति?

गगहा में अपराध पर लगाम या शिकायतों पर सिर्फ खानापूर्ति?
  • मारपीट में पिता-पुत्र घायल, पीड़ित का आरोप—मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मेडिकल जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल; पुलिस पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप

आर.वी.9 न्यूज़ |  संवाददाता- कौस्तुभ तिवारी, गोला, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
गगहा/गोरखपुर।

मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया जाता रहा है, लेकिन गगहा क्षेत्र से सामने आया एक मामला स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मारपीट की घटना में पिता-पुत्र को गंभीर चोटें आईं, शरीर पर टांके तक लगे, लेकिन इसके बावजूद अब तक उनकी समुचित चिकित्सकीय जांच, जिसमें सिटी स्कैन भी शामिल है, नहीं कराई गई है। पीड़ित का दावा है कि घटना के बाद उसने पुलिस से शिकायत की और मुकदमा दर्ज भी किया गया, लेकिन इसके बाद अपेक्षित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले में गंभीरता से जांच करने के बजाय महज खानापूर्ति की जा रही है।

मारपीट में पिता-पुत्र घायल, चोटों को लेकर उठे सवाल

पीड़ित पक्ष के अनुसार मारपीट की घटना में पिता और पुत्र दोनों घायल हुए। चोट इतनी गंभीर बताई जा रही है कि उन्हें टांके लगाने पड़े। ऐसे में पीड़ित परिवार का कहना है कि चोटों की वास्तविक गंभीरता स्पष्ट करने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच कराई जानी चाहिए। पीड़ित का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक मामले में वह कार्रवाई नजर नहीं आई, जिसकी उसे उम्मीद थी। इसी कारण परिवार पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस का पक्ष सामने आना इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

‘मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन जांच आगे क्यों नहीं बढ़ रही?’

पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन इसके बाद आरोपितों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पीड़ित परिवार का सवाल है कि यदि घटना में चोटें आई हैं तो मेडिकल रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है? यही नहीं, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पुलिस के एक दारोगा द्वारा उस पर ही दबाव बनाया जा रहा है और मुकदमे में फंसाने की कथित धमकी दी जा रही है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता और पीड़ित के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर प्रश्न खड़ा कर सकता है।

ऋषभ यादव हत्याकांड की जांच भी रही चर्चा में

गगहा क्षेत्र पहले भी गंभीर आपराधिक मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। इसी वर्ष रावतपार गांव में ऋषभ यादव उर्फ बब्बी की मौत का मामला सामने आया था। मार्च 2026 की रिपोर्ट में पुलिस को मामले में कुछ सुराग मिलने और एक दोस्त तथा एक महिला से पूछताछ/जांच की दिशा में आगे बढ़ने की बात सामने आई थी। अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार घटना के लगभग एक महीने बाद भी मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस सीन रीक्रिएशन की तैयारी कर रही थी। ऐसे में ताजा मारपीट प्रकरण को लेकर भी स्थानीय स्तर पर पुलिस की सक्रियता और जांच की गति पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों मामलों को सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा और प्रत्येक मामले की जांच उसके उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

पीड़ित का सवाल—‘किसी बड़ी घटना का इंतजार तो नहीं?’

पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिन लोगों पर मारपीट का आरोप लगाया गया है, वे कथित तौर पर खुलेआम घूम रहे हैं और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। परिवार को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पीड़ित का सवाल है कि जब उसे और उसके परिवार को सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो पुलिस आरोपों की गंभीरता से जांच कर आरोपितों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी आपराधिक मामले में पुलिस की जिम्मेदारी केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित नहीं रहती। शिकायत की निष्पक्ष जांच, मेडिकल एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन, आरोपों का सत्यापन और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पुलिस का पक्ष सामने आना जरूरी

इस पूरे मामले में गगहा पुलिस का आधिकारिक पक्ष बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस से यह स्पष्ट होना अपेक्षित है कि:

  • पिता-पुत्र की चोटों का चिकित्सकीय परीक्षण किस स्तर तक कराया गया?

  • सिटी स्कैन या अन्य आवश्यक जांच की आवश्यकता पर क्या निर्णय लिया गया?

  • मुकदमे में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

  • आरोपितों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए गए या नहीं?

  • पीड़ित द्वारा पुलिसकर्मी पर दबाव एवं धमकी के लगाए गए आरोपों की जांच होगी या नहीं?

  • पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?

इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

कार्रवाई ऐसी हो कि पीड़ित को न्याय का भरोसा मिले

कानून-व्यवस्था का भरोसा केवल मुकदमा दर्ज होने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच से मजबूत होता है। यदि किसी नागरिक ने मारपीट, गंभीर चोट और जान से मारने की धमकी जैसे आरोप लगाए हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई आवश्यक है। गगहा के इस मामले में अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। पीड़ित के आरोप सही हैं या नहीं, इसका निर्धारण जांच और साक्ष्यों से होना है, लेकिन इतना जरूर है कि मामले में पारदर्शी जांच, चिकित्सकीय तथ्यों का परीक्षण और पुलिस का स्पष्ट पक्ष सामने आना जरूरी है।

सवाल सिर्फ एक मुकदमे का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो आम नागरिक पुलिस और कानून-व्यवस्था से करता है।