जल स्रोतों की स्वच्छता से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में चला प्लास्टिक मुक्त अभियान
- आजमगढ़ में जल स्रोतों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान; प्लास्टिक व पॉलीथिन का प्रयोग न करने के लिए किया गया जागरूक — स्वच्छ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी

आजमगढ़, 20 सितम्बर 2026।
स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से संभव है। इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आजमगढ़ में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत रविवार को जल स्रोतों की स्वच्छता एवं उन्हें प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान स्थानीय जल स्रोतों के आसपास साफ-सफाई करते हुए वहां जमा प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाया गया। साथ ही स्थानीय लोगों को जल स्रोतों को स्वच्छ एवं संरक्षित रखने तथा प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने के लिए जागरूक किया गया।
जनपद में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के कुशल मार्गदर्शन में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल की जनकल्याणकारी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ नागरिकों को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना है। इसके अंतर्गत सामाजिक सरोकार, जनकल्याण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
जल स्रोतों के संरक्षण को बनाया जनभागीदारी का अभियान
अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर जल स्रोतों के आसपास सफाई की। लंबे समय से इधर-उधर पड़े प्लास्टिक और अन्य कचरे को हटाकर आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया। इस दौरान लोगों को समझाया गया कि जल स्रोत केवल पानी उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये पर्यावरणीय संतुलन और मानव जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं। यदि इनके आसपास कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक जमा होता रहेगा, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव जल की गुणवत्ता और आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है। अभियान के दौरान लोगों से जल स्रोतों को केवल सरकारी व्यवस्था के भरोसे न छोड़कर स्वयं भी उनकी साफ-सफाई और सुरक्षा में योगदान देने की अपील की गई।
प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता पर जोर
स्वच्छता अभियान के साथ-साथ सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर भी विशेष जोर दिया गया। स्थानीय नागरिकों को बताया गया कि इस्तेमाल के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण में बनी रहती है और जल स्रोतों तथा प्राकृतिक परिवेश को प्रभावित कर सकती है। लोगों से अपील की गई कि बाजार अथवा दैनिक जीवन में प्लास्टिक की जगह पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का अधिक से अधिक प्रयोग करें। इसके साथ ही किसी भी प्रकार के प्लास्टिक अथवा अन्य कचरे को जल स्रोतों में डालने से पूरी तरह बचें।
‘कचरा निर्धारित स्थान पर डालें’, दिया गया संदेश
अभियान के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि जल स्रोतों के आसपास कूड़ा फेंकना केवल गंदगी फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जल और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो सकते हैं। लोगों को प्रेरित किया गया कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में निकलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर ही डालें तथा सार्वजनिक स्थलों, तालाबों, पोखरों और अन्य जल स्रोतों को कूड़ेदान के रूप में इस्तेमाल न करें। अभियान में शामिल लोगों ने सामूहिक रूप से स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया।
स्वच्छ जल स्रोत, स्वस्थ समाज की बुनियाद
अभियान के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि स्वच्छ जल स्रोत सीधे तौर पर स्वस्थ जीवन और बेहतर पर्यावरण से जुड़े हैं। जल स्रोतों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा विषय है। यदि आज तालाब, पोखर और अन्य स्थानीय जल स्रोतों को प्रदूषण एवं प्लास्टिक से बचाया जाता है, तो भविष्य में भी समाज को इनके प्राकृतिक लाभ मिलते रहेंगे। इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ रही जनभागीदारी
आजमगढ़ में चल रहा ‘सेवा संकल्प अभियान’ विभिन्न सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से लोगों को सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दे रहा है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है, जब आमजन स्वयं उसकी जिम्मेदारी उठाए। अभियान के अंतर्गत आयोजित जल स्रोत स्वच्छता कार्यक्रम भी इसी जनभागीदारी की भावना का हिस्सा रहा, जहां स्वच्छता को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानकर इसे नियमित व्यवहार का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
आमजन से अपील—‘जल स्रोत बचाएं, पर्यावरण बचाएं’
अभियान के दौरान आमजन से विशेष अपील की गई कि वे अपने आसपास मौजूद जल स्रोतों को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। जल स्रोतों में प्लास्टिक, पॉलीथिन अथवा किसी भी प्रकार का कचरा न डालें और दूसरे लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम करने तथा उसके स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने का आह्वान किया गया।
आजमगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत चलाया गया यह स्वच्छता अभियान केवल जल स्रोतों से कचरा हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। जल स्रोतों की स्वच्छता को लेकर चलाया गया यह अभियान इस बात की ओर संकेत करता है कि यदि प्रशासनिक प्रयासों के साथ आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में व्यापक बदलाव संभव है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के आगामी कार्यक्रमों में भी जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए सामाजिक सरोकार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उद्देश्य यही है कि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास के वातावरण के प्रति जिम्मेदार बने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक समाज के निर्माण में योगदान दे।







