महिलाओं की हर आवाज़ सुनी जाएगी, न्याय में नहीं होगी देरी: राज्य महिला आयोग सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने जनसुनवाई में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
- 21 मामलों की सुनवाई, 8 का मौके पर निस्तारण • बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को मिले लैपटॉप • जिला कारागार और आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा
आजमगढ़, 22 जुलाई। "महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक पीड़िता को त्वरित और निष्पक्ष न्याय दिलाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।"
इसी स्पष्ट संदेश के साथ उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने बुधवार को अपने जनपद भ्रमण कार्यक्रम के दौरान सर्किट हाउस, आजमगढ़ में आयोजित महिला जनसुनवाई में महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महिला जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, उत्पीड़न, भरण-पोषण, संपत्ति विवाद, सुरक्षा एवं अन्य समस्याओं से जुड़े कुल 21 प्रकरण प्रस्तुत किए। डॉ. प्रियंका मौर्या ने प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया और 8 मामलों का मौके पर ही निस्तारण करा दिया।
शेष 13 प्रकरणों में संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को न्याय के लिए अनावश्यक भटकना नहीं पड़ेगा और शिकायतों का त्वरित समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी है।
"महिला सशक्तिकरण ही विकसित समाज की आधारशिला"
डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होंगी, तभी समाज और प्रदेश का समग्र विकास संभव होगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला एवं बालिका कल्याण से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
गुमशुदा बालिकाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर
बैठक के दौरान डॉ. प्रियंका मौर्या ने बालिकाओं की गुमशुदगी के मामलों को अत्यंत गंभीर बताते हुए महिला थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए सतत निगरानी, प्रभावी पुलिस कार्रवाई और समाज की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के निर्देश दिए।
बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को मिला तकनीकी सशक्तिकरण का उपहार
कार्यक्रम के दौरान बाल सेवा योजना (कोविड) के अंतर्गत चयनित 8 लाभार्थियों—राहुल गुप्ता, काजल गुप्ता, उज्ज्वल दूबे, दिव्यम शुक्ला, खुशी सोनकर, प्रज्ञा सिंह, समीक्षा मौर्या एवं अमन चौहान—को डॉ. प्रियंका मौर्या ने लैपटॉप वितरित किए। विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्होंने उनकी पढ़ाई, करियर और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें मेहनत, अनुशासन और तकनीक का सकारात्मक उपयोग कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में तकनीकी संसाधन विद्यार्थियों के लिए सफलता की नई संभावनाएं खोल रहे हैं और उनका सही उपयोग आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जिला कारागार में महिला बंदियों का जाना हाल, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
महिला जनसुनवाई के बाद डॉ. प्रियंका मौर्या ने जिला कारागार, आजमगढ़ का निरीक्षण किया। उन्होंने महिला बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि महिला बंदियों को शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं तथा उनकी गरिमा और अधिकारों का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर परखी जमीनी हकीकत
इसके बाद उन्होंने एक आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर महिलाओं एवं बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही पोषण सेवाओं, टीकाकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से पहुंचे और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी प्रियंका सिंह, महिला थानाध्यक्ष प्रज्ञा सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह, सहायक श्रमायुक्त पवन कुमार, जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. अलेंद्र कुमार, सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक सहित महिला कल्याण विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
महिला जनसुनवाई से लेकर जिला कारागार और आंगनवाड़ी केंद्र के निरीक्षण तक डॉ. प्रियंका मौर्या का पूरा दौरा संवेदनशील प्रशासन, महिला सुरक्षा और सुशासन की प्रतिबद्धता का संदेश देता नजर आया। महिलाओं की शिकायतों का त्वरित निस्तारण, गुमशुदा बालिकाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर, विद्यार्थियों को तकनीकी सहायता और सरकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा ने यह स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण केवल एक योजना नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकता है। यह पहल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और समाज में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







