श्मशान तक भी नहीं नसीब हुआ सम्मानजनक रास्ता! पानी और कीचड़ से गुजरकर निकली चौकीदार जयपाल सिंह की अंतिम यात्रा
- बिजनौर के मुस्सेपुर गांव में बदहाल रास्ते ने खोली विकास व्यवस्था की पोल, ग्रामीण बोले—बारिश में नारकीय हो जाती है स्थिति
बिजनौर। विकास के दावों के बीच उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडावली क्षेत्र के मुस्सेपुर गांव में एक ग्रामीण की अंतिम यात्रा भी सम्मानजनक ढंग से श्मशान घाट तक नहीं पहुंच सकी। गांव के चौकीदार जयपाल सिंह के निधन के बाद उनकी शव यात्रा को पानी से लबालब भरे और कीचड़युक्त बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ा। बीमारी के चलते जयपाल सिंह का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार और गांव के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए शव यात्रा लेकर श्मशान घाट की ओर निकले, लेकिन रास्ते की बदहाली ने अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जगह-जगह भरे पानी और दलदल जैसी कीचड़ के बीच ग्रामीणों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ा।
अंतिम यात्रा के दौरान भी ग्रामीणों को उठानी पड़ी परेशानी
बताया जाता है कि गांव से श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग लंबे समय से खराब स्थिति में है। बारिश होने के बाद हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़क या रास्ते पर जमा पानी की वजह से यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि नीचे गड्ढा है या समतल जमीन। ऐसे कठिन हालात में जयपाल सिंह की अंतिम यात्रा को श्मशान घाट तक पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह दृश्य केवल एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा तक सीमित नहीं था, बल्कि गांव की उस लंबे समय से चली आ रही समस्या को भी उजागर करता है, जिसका समाधान आज तक नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का दावा—पहले भी कई शव यात्राएं इसी रास्ते से गुजरीं
मुस्सेपुर गांव के ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब किसी शव यात्रा को इस तरह की कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी करीब चार से पांच शव यात्राएं इसी बदहाल रास्ते से होकर श्मशान घाट तक पहुंच चुकी हैं। ग्रामीणों का दर्द है कि जीवन भर मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने के बाद अंतिम यात्रा के समय भी लोगों को सम्मानजनक रास्ता नसीब नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग की मरम्मत और निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
किसानों और आम ग्रामीणों की भी बढ़ी मुश्किलें
यह रास्ता केवल श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आसपास के किसानों और ग्रामीणों के दैनिक आवागमन का भी प्रमुख मार्ग बताया जा रहा है। किसानों को खेती के लिए खेतों तक आने-जाने में इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। बारिश के दिनों में पानी भर जाने और कीचड़ फैलने के कारण किसानों के सामने भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। पैदल चलना मुश्किल हो जाता है और जरूरी सामान या कृषि उपकरण लेकर गुजरना भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की खराब हालत का असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर लगातार पड़ रहा है।
बारिश बनते ही बढ़ जाती है मुसीबत
ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य दिनों में भी रास्ते की स्थिति संतोषजनक नहीं है, लेकिन बारिश होते ही समस्या कई गुना बढ़ जाती है। जगह-जगह पानी भर जाता है और पूरा मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को इस रास्ते से गुजरने में विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार फिसलने और गिरने का भी खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने उठाई रास्ते के निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि मुस्सेपुर गांव से श्मशान घाट तक जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग की जल्द से जल्द मरम्मत अथवा पक्के निर्माण की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि इस रास्ते को व्यवस्थित कर दिया जाए तो न केवल अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों और गांव के आम लोगों की भी बड़ी समस्या दूर हो जाएगी।
सवाल—आखिर कब बदलेगी बदहाल रास्ते की तस्वीर?
जयपाल सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान सामने आई यह तस्वीर कई सवाल छोड़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के दावों के बीच मुस्सेपुर गांव का यह रास्ता आज भी बदहाली की कहानी बयान कर रहा है। ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा और जल्द ही इस महत्वपूर्ण मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं है, बल्कि उस सम्मान और सुविधा का भी है, जिसका हक हर ग्रामीण को जीवन में ही नहीं, बल्कि उसकी अंतिम यात्रा तक मिलना चाहिए।







