सात महीने बाद सूरत से वापस मिला चोरी हुआ मोबाइल, रौनापार पुलिस की सर्विलांस टीम ने खोला राज
- मोबाइल चालू होते ही सर्विलांस ने पकड़ा लोकेशन का सुराग, दीवान पंकज यादव की सक्रियता से पत्रकार मनोज कुमार सिंह को मिली बड़ी राहत; आरोपी ने दुकान पर कराया था फोन फॉर्मेट

आजमगढ़। कभी-कभी एक छोटा-सा सुराग महीनों से उलझी गुत्थी को सुलझा देता है। ऐसा ही एक मामला आजमगढ़ के रौनापार थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां करीब सात महीने पहले चोरी हुआ मोबाइल फोन आखिरकार सैकड़ों किलोमीटर दूर गुजरात के सूरत जिले के मोरा-हजीरा क्षेत्र से बरामद हो गया। मोबाइल की बरामदगी रौनापार थाने में तैनात दीवान पंकज यादव की सक्रियता और सर्विलांस के माध्यम से की गई निगरानी के बाद संभव हो सकी। पहाड़पुर निवासी एवं पत्रकार मनोज कुमार सिंह का मोबाइल फोन गत 7 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे चोरी हो गया था। काफी खोजबीन के बावजूद जब मोबाइल का कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने थाना रौनापार में प्रार्थना पत्र देकर मोबाइल की खोजबीन, बरामदगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। महीनों तक मोबाइल का कोई पता नहीं चल सका, लेकिन पीड़ित को उम्मीद थी कि कभी न कभी यह मोबाइल पुलिस की तकनीकी निगरानी के जरिए मिल सकता है।
चोरी के बाद शुरू हुई तलाश, महीनों तक नहीं मिला सुराग
पीड़ित के अनुसार चोरी हुआ मोबाइल OPPO F11 मॉडल का था। मोबाइल में उनके कई महत्वपूर्ण संपर्क नंबर, निजी जानकारियां, आवश्यक दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण डेटा मौजूद था। मोबाइल के चोरी होने के बाद केवल एक फोन खोने का नुकसान नहीं था, बल्कि उसमें सुरक्षित महत्वपूर्ण जानकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। घटना के बाद पीड़ित ने अपने स्तर से काफी तलाश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई। थाना रौनापार में दिए गए प्रार्थना पत्र में उन्होंने मोबाइल को तलाश कर बरामद कराने तथा मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इसके बाद मोबाइल की तलाश का मामला पुलिस के संज्ञान में रहा। समय बीतता गया और देखते ही देखते करीब सात महीने गुजर गए। इस दौरान मोबाइल बंद रहा, जिससे उसकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल बना रहा।
रविवार को अचानक आया फोन और खुल गया सात महीने पुराना राज
आज रविवार को करीब तीन बजे पीड़ित पत्रकार मनोज कुमार सिंह के फोन पर थाना रौनापार में कार्यरत दीवान पंकज यादव का फोन आया। फोन पर उन्हें जानकारी दी गई कि उनका चोरी हुआ मोबाइल गुजरात के सूरत जनपद के मोरा-हजीरा क्षेत्र में मंगल प्रजापति नामक व्यक्ति के पास है। बताया गया कि संबंधित व्यक्ति मोबाइल को दोबारा चालू कराने का प्रयास कर रहा था। मोबाइल के चालू होते ही तकनीकी निगरानी/सर्विलांस के माध्यम से उसकी लोकेशन का सुराग पुलिस को मिल गया। इसके बाद रौनापार पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मोबाइल तक पहुंचने की कार्रवाई शुरू की। कई महीनों से बंद पड़ा मोबाइल जैसे ही सक्रिय हुआ, पुलिस के लिए यही वह महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई, जिसका लंबे समय से इंतजार था।
सर्विलांस ने पकड़ा लोकेशन का सुराग
मोबाइल की तलाश में तकनीकी निगरानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फोन के सक्रिय होते ही उसकी लोकेशन का पता चल गया और जानकारी सामने आई कि मोबाइल सूरत के मोरा-हजीरा क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस की सक्रियता के चलते चोरी हुए मोबाइल की बरामदगी संभव हो सकी। दीवान पंकज यादव द्वारा पीड़ित को सूचना दिए जाने के बाद मनोज कुमार सिंह को लंबे समय से चल रही चिंता से बड़ी राहत मिली। हालांकि मोबाइल वापस मिलने की खुशी के साथ एक बड़ी परेशानी भी सामने आई।
मोबाइल मिला, लेकिन महत्वपूर्ण डेटा और ऐप हो चुके थे डिलीट
बरामद मोबाइल को देखने पर पता चला कि उसे किसी मोबाइल दुकान पर फॉर्मेट करा दिया गया था। फोन को फॉर्मेट किए जाने के कारण उसमें मौजूद महत्वपूर्ण डेटा, संपर्क और कई ऐप डिलीट हो चुके थे। यानी सात महीने बाद मोबाइल तो वापस मिल गया, लेकिन उसके भीतर सुरक्षित कई महत्वपूर्ण जानकारियां अब पहले की स्थिति में मौजूद नहीं थीं। पीड़ित के लिए यह राहत और नुकसान—दोनों तरह का अनुभव रहा। मोबाइल की बरामदगी ने जहां एक ओर यह साबित किया कि तकनीकी निगरानी और पुलिस की सक्रियता से लंबे समय से बंद पड़े मोबाइल तक भी पहुंच बनाई जा सकती है, वहीं दूसरी ओर यह घटना मोबाइल चोरी होने के बाद उसमें मौजूद निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर भी लोगों को सावधान करती है।
सात महीने बाद मिली राहत, पुलिस की सक्रियता की सराहना
पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने मोबाइल की बरामदगी के लिए दीवान पंकज यादव की सक्रियता की सराहना की। उनका कहना है कि मोबाइल चोरी होने के बाद उन्होंने काफी समय तक उसके मिलने की उम्मीद बनाए रखी थी। कई महीनों तक कोई सुराग नहीं मिलने के बावजूद पुलिस की ओर से की गई तकनीकी निगरानी आखिरकार रंग लाई और रविवार को मोबाइल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। मोबाइल के चालू होते ही लोकेशन का पता चलना इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ रहा। यदि मोबाइल दोबारा चालू नहीं होता तो उसकी लोकेशन का पता लगाना और बरामदगी तक पहुंचना मुश्किल बना रहता।
यह घटना लोगों के लिए भी एक जरूरी संदेश
यह मामला केवल एक मोबाइल की चोरी और बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश छोड़ता है। आज के दौर में मोबाइल फोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। उसमें बैंकिंग ऐप, सोशल मीडिया अकाउंट, संपर्क नंबर, निजी तस्वीरें, दस्तावेज, ई-मेल और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। ऐसे में मोबाइल चोरी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना देना, आवश्यक होने पर सिम बंद कराना, संबंधित खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मोबाइल की तकनीकी पहचान संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। रौनापार क्षेत्र के इस मामले में भी लंबे समय बाद मोबाइल के दोबारा सक्रिय होने पर सर्विलांस के जरिए लोकेशन सामने आई और पुलिस को चोरी हुए फोन तक पहुंचने का रास्ता मिला।
सात महीने तक बंद पड़ा मोबाइल जब गुजरात की धरती पर दोबारा सक्रिय हुआ तो रौनापार पुलिस की तकनीकी निगरानी ने उसका रास्ता खोज लिया। पहाड़पुर से चोरी हुआ मोबाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर सूरत के मोरा-हजीरा क्षेत्र में मिला। मोबाइल फॉर्मेट होने के कारण भले ही उसमें मौजूद महत्वपूर्ण डेटा और ऐप वापस नहीं मिल सके, लेकिन लंबे इंतजार के बाद फोन की बरामदगी ने पीड़ित को बड़ी राहत दी।
यह घटनाक्रम एक बार फिर बताता है कि समय कितना भी बीत जाए, पुलिस की तकनीकी निगरानी और सक्रिय प्रयास किसी पुराने मामले को नई दिशा दे सकते हैं। इस मामले में दीवान पंकज यादव की सक्रियता और सर्विलांस से मिले सुराग ने सात महीने पुराने मोबाइल चोरी के मामले को आखिरकार उसके अंजाम तक पहुंचाया।







