नई किरण की पहल से फिर जुड़ा बिखरता परिवार, दहेज प्रताड़ना के विवाद में हुआ सफल समझौता
- परिवार परामर्श प्रकोष्ठ ने दोनों पक्षों को बुलाकर की काउंसलिंग, आपसी बातचीत से दूर हुआ विवाद; परिवार में लौटी सौहार्द और विश्वास की उम्मीद

आजमगढ़। परिवार में जब आपसी मतभेद बढ़ जाते हैं तो कई बार रिश्ते टूटने की कगार तक पहुंच जाते हैं। ऐसे ही एक पारिवारिक विवाद में थाना कोतवाली परिसर स्थित परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण की पहल ने टूटते रिश्ते को संभालने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परामर्शदात्री टीम के प्रयासों और दोनों पक्षों के बीच संवाद के बाद मामले में सफल समझौता कराया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डाॅ. अनिल कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात एवं नोडल अधिकारी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के पर्यवेक्षण में 28 अगस्त 2026 को परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण में बैठक आयोजित की गई।
नोटिस और फोन के जरिए दोनों पक्षों को बुलाया गया
बैठक में एक पत्रावली से संबंधित दोनों पक्षों को नोटिस एवं दूरभाष के माध्यम से सूचना देकर मिडिएशन और काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। निर्धारित बैठक में दोनों पक्ष उपस्थित हुए। इसके बाद परिवार परामर्श प्रकोष्ठ की टीम ने दोनों पक्षों की बात गंभीरता से सुनी और पारिवारिक विवाद के कारणों को समझने का प्रयास किया। परामर्शदात्री टीम ने बातचीत के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न मतभेदों को दूर करने का प्रयास किया। लगातार समझाइश और संवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और प्रकरण में सफलतापूर्वक समझौता कराया गया।
दहेज प्रताड़ना और स्त्रीधन को लेकर था विवाद
पुलिस के अनुसार, मामले में आवेदिका की ओर से आरोप लगाया गया था कि पति और ससुराल पक्ष द्वारा कम दान-दहेज को लेकर शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा उसका स्त्रीधन ले लिया गया और उसे घर से बाहर कर दिया गया। विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में खटास बढ़ गई थी। परिवार परामर्श प्रकोष्ठ की टीम ने दोनों पक्षों को आपसी संवाद, समझदारी और पारिवारिक सौहार्द का महत्व समझाते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास किया। अंततः दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद समझौता कराया गया।
एक समझौते से बचा एक परिवार, लौटी रिश्तों में उम्मीद
इस प्रकरण में खुशबू कुरैशी उर्फ जीनत पुत्री सोहराब कुरैशी, निवासी ग्राम जालन्धरी, थाना कोतवाली, जनपद आजमगढ़ समझौते से जुड़े पक्षकार के रूप में दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण का उद्देश्य केवल विवाद का निस्तारण करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाने का प्रयास करना भी है। एक सफल समझौता अपने आप में इस बात का उदाहरण है कि समय रहते दोनों पक्षों को बैठाकर उनकी बात सुनी जाए तो कई पारिवारिक विवादों को गंभीर रूप लेने से पहले ही सुलझाया जा सकता है।
‘नई किरण’ दे रही रिश्तों को बचाने की नई उम्मीद
नई किरण प्रोजेक्ट बिखरते परिवारों को आपसी संवाद, समझौते और काउंसलिंग के माध्यम से दोबारा जोड़ने की पहल है। इसके तहत पारिवारिक विवादों में दोनों पक्षों को एक मंच पर बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी जाती हैं और आपसी सहमति से समाधान तलाशने का प्रयास किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य परिवारों में सौहार्द, विश्वास और आपसी समझ को पुनः स्थापित करना तथा अनावश्यक रूप से विवादों को लंबा खिंचने से रोकना है। साथ ही, ऐसे प्रयास पारिवारिक न्यायालयों पर बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने में भी सहयोगी साबित हो सकते हैं।
इन पुलिसकर्मियों की रही मौजूदगी
बैठक में उपनिरीक्षक महेन्द्र प्रसाद तिवारी, उपनिरीक्षक सत्यनारायण यादव, आरक्षी जितेन्द्र कुमार शाह, आरक्षी सुनील कुमार गुप्ता तथा महिला आरक्षी नेहा सिंह परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण, पुलिस कार्यालय आजमगढ़ की मौजूदगी रही।
कुल समझौता: 01
परिवार टूटने में कभी-कभी एक छोटी-सी गलतफहमी भी बड़ी भूमिका निभा देती है, लेकिन सही समय पर संवाद की पहल उस दूरी को फिर से कम कर सकती है। आजमगढ़ के परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण द्वारा कराया गया यह समझौता इसी उम्मीद को मजबूत करता है कि बातचीत, समझदारी और सकारात्मक प्रयासों से टूटते रिश्तों को एक नई शुरुआत दी जा सकती है।







