दर्द के बीच राखी का रिश्ता: घायल बहनों ने बांधी डीएम-एसएसपी को राखी, अधिकारियों ने निभाया भाई का फर्ज

दर्द के बीच राखी का रिश्ता: घायल बहनों ने बांधी डीएम-एसएसपी को राखी, अधिकारियों ने निभाया भाई का फर्ज
  • पवई बस हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे डीएम-एसएसपी, सुबह और दोपहर दोनों वक्त घायलों से मिले; उपचार, दवा, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी

आजमगढ़, 28 अगस्त 2026।
रक्षाबंधन के पर्व पर पवई बस दुर्घटना के बाद सदर अस्पताल का माहौल उस समय बेहद भावुक हो उठा, जब हादसे में घायल महिलाओं और बच्चियों ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार की कलाई पर राखी बांधी। दुर्घटना के दर्द के बीच भाई-बहन के स्नेह का यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया। अधिकारियों ने भी इन घायल बहनों को उपहार भेंट कर भाई का फर्ज निभाया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

गंभीर सड़क हादसे के बाद जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए घायलों के उपचार से लेकर उनके भोजन, परिजनों की सुविधाओं और स्वस्थ होने के बाद सुरक्षित घर पहुंचाने तक की जिम्मेदारी संभाली। प्रशासन की सक्रियता से अब तक 13 स्वस्थ मरीजों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया जा चुका है, जबकि शेष घायलों का उपचार अस्पताल में जारी है।

आधी रात को हुआ भीषण हादसा, 34 यात्री हुए घायल

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि करीब 01 बजे थाना पवई क्षेत्र में किलोमीटर संख्या 191.2 के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, एक अनियंत्रित पिकअप वाहन अचानक रोडवेज बस के सामने आ गया। पिकअप को बचाने के प्रयास में रोडवेज बस अनियंत्रित होकर पोल और डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बस में कुल 76 यात्री सवार थे, जिनमें से 34 यात्री घायल एवं चोटिल हुए। हादसे में बस चालक रजनीकांत और एक 50 वर्षीय महिला की मृत्यु हो गई।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन, रात में ही शुरू हुआ राहत-बचाव

दुर्घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी रविंद्र कुमार एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में पवई पुलिस और प्रशासनिक टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। राहत एवं बचाव दल ने दुर्घटनाग्रस्त बस से यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायल यात्रियों को तत्काल 108 एंबुलेंस के माध्यम से मंडलीय चिकित्सालय पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग को भी तत्काल सक्रिय करते हुए घायलों का उपचार शुरू कराया गया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस.सी. कन्नौजिया स्वयं अस्पताल में मौजूद रहे और घायलों के उपचार तथा चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करते रहे।

सुबह अस्पताल पहुंचे डीएम-एसएसपी, मरीजों से सीधे की बातचीत

हादसे के बाद जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने शुक्रवार सुबह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.आर. वर्मा के साथ सदर अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। अधिकारियों ने एक-एक घायल मरीज से बातचीत की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से भी प्रत्येक मरीज की स्थिति, उपचार और उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। अस्पताल में भर्ती घायलों के साथ आए परिजनों और अटेंडेंट की सुविधाओं का भी अधिकारियों ने विशेष ध्यान रखा। उनके लिए नाश्ता और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई।

दोपहर में फिर अस्पताल पहुंचे अधिकारी, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

जिलाधिकारी और एसएसपी केवल एक बार अस्पताल पहुंचकर वापस नहीं लौटे। दोनों अधिकारियों ने दोपहर में पुनः अस्पताल का भ्रमण किया और घायलों एवं उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों से पूछा कि उन्हें उपचार में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है, दवाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं और भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं कैसी हैं। चिकित्सकों को निर्देश दिया गया कि सभी घायलों का बेहतर से बेहतर और समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी मरीज की चिकित्सा में कोई कमी न रहने पाए।

जब घायल बहनों ने बांधी राखी, भावुक हो उठा अस्पताल

रक्षाबंधन के दिन अस्पताल में मौजूद घायल महिलाओं और बच्चियों के लिए यह पर्व बेहद अलग था। हादसे के कारण वे अपने घर-परिवार से दूर अस्पताल में इलाज करा रही थीं। इसी दौरान करीब 20 चोटिल महिलाओं और बच्चियों ने जिलाधिकारी और एसएसपी को राखी बांधी। सुनीता, सृष्टि, श्रेया, अंकिता कुमारी सहित महज चार वर्षीय एलकेजी छात्रा साक्षी ने अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी। राखी बांधते समय अस्पताल में मौजूद लोगों के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हादसे के दर्द के बीच भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया। डीएम और एसएसपी ने भी इन बहनों को उपहार भेंट किए और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। अधिकारियों ने घायल महिलाओं और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन उनकी हरसंभव मदद करेगा और इलाज से लेकर अन्य आवश्यक सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

यात्रियों की जान बचाते हुए चालक रजनीकांत ने दिया सर्वोच्च बलिदान

इस हादसे में रोडवेज बस चालक रजनीकांत की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। प्रशासन के अनुसार, उन्होंने यात्रियों की जान बचाने का प्रयास करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अधिकारियों ने चालक रजनीकांत के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति समर्पण की सराहना की। हादसे में एक 50 वर्षीय महिला की भी मृत्यु हुई है। दोनों मृतकों के परिवारों के प्रति जिला प्रशासन ने संवेदना व्यक्त की है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।

मृतकों के परिजनों को 7.50-7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

जिलाधिकारी के निर्देशन में परिवहन निगम की ओर से हादसे में मृत दोनों व्यक्तियों के परिजनों को अलग-अलग 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही दुर्घटना में घायल हुए यात्रियों को भी नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि हादसे से प्रभावित परिवारों को संकट की इस घड़ी में आर्थिक और मानवीय दोनों स्तरों पर आवश्यक सहयोग मिले।

13 मरीज स्वस्थ, प्रशासन ने सुरक्षित घर पहुंचाया

दुर्घटना में घायल एवं चोटिल कुल 34 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद अपराह्न 1 बजे तक 13 मरीज स्वस्थ हो चुके थे। इन मरीजों को प्रशासन की ओर से सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया। वहीं शेष घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है और चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन केवल उपचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वस्थ हो चुके यात्रियों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभा रहा है।

'प्रशासन हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ा है'—जिलाधिकारी

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता दुर्घटना में घायल सभी लोगों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनके परिजनों को हर आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि राहत, उपचार, भोजन, आर्थिक सहायता और स्वस्थ मरीजों को सुरक्षित घर पहुंचाने सहित प्रत्येक स्तर पर प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति और उसके परिवार के साथ प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। घायलों की हरसंभव मदद के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

दर्दनाक हादसे के बीच इंसानियत की मिसाल

पवई बस हादसा निश्चित तौर पर कई परिवारों के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द लेकर आया है। दो लोगों की मौत और दर्जनों यात्रियों के घायल होने की इस घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। लेकिन इसी त्रासदी के बीच अस्पताल में राखी बांधती घायल बहनों और उनकी कलाई पर भाई का स्नेह स्वीकार करते डीएम-एसएसपी का दृश्य मानवीय संवेदना की एक अलग तस्वीर भी सामने लाया।

हादसे के दर्द के बीच राखी के धागे ने उम्मीद और अपनत्व का रिश्ता जोड़ दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का घायलों के बीच पहुंचना, उनका हाल पूछना, उपचार की निगरानी करना और घायल बहनों से राखी बंधवाकर उन्हें भाई का भरोसा देना—इस पूरे घटनाक्रम ने रक्षाबंधन के पर्व को संवेदना, सेवा और इंसानियत के एक यादगार संदेश में बदल दिया।