फर्जी फर्म का खेल! कागजों पर करोड़ों का कारोबार दिखाकर सरकार को ₹2.38 करोड़ की राजस्व क्षति का आरोप, वांछित अभियुक्त गिरफ्तार
- आजमगढ़ कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई; बोगस फर्म बनाकर फर्जी दस्तावेजों से GST पंजीयन कराने और करोड़ों रुपये की फर्जी ITC का लाभ लेने के मामले में बिजनौर निवासी आरोपी दबोचा गया

आजमगढ़। कागजों पर फर्जी कारोबार खड़ा कर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये की कथित क्षति पहुंचाने के मामले में आजमगढ़ कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने फर्जी फर्म बनाकर लगभग 2.38 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाने के आरोप में वांछित चल रहे एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान आदिल पुत्र इस्तेयाक, निवासी रवाना शिकारपुर, थाना श्योहारा, जनपद बिजनौर, उम्र करीब 34 वर्ष के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर GST पंजीयन हासिल कर फर्जी इनवाइस के जरिए करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री दर्शाने और लगभग 119.04 लाख रुपये की फर्जी ITC पास-ऑन करने तथा लगभग 119.09 लाख रुपये की फर्जी ITC का लाभ लेने का आरोप है। इस पूरे कथित फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को करीब ₹238.13 लाख यानी लगभग ₹2.38 करोड़ की क्षति पहुंचने की बात जांच में सामने आई है।
कागजों पर बनी फर्म, जांच में मौके पर नहीं मिला अस्तित्व
मामले की शुरुआत राज्य कर विभाग की जांच से हुई। पुलिस के अनुसार, कार्यालय उपायुक्त (वि0अनु0शा0), राज्य कर, आजमगढ़ संभाग से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना कोतवाली आजमगढ़ में मु0अ0सं0 522/2025 दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि ‘मलिक इंटरप्राइजेज’ नाम से GST पंजीयन 30 दिसंबर 2024 को कराया गया था। फर्म के GST पंजीयन के लिए जिन दस्तावेजों को अपलोड किया गया था, उनकी जांच के साथ जब फर्म के मुख्य व्यापार स्थल का सत्यापन किया गया तो वह मौके पर अस्तित्वहीन/बोगस पाई गई। यानी सरकारी रिकॉर्ड में कारोबार करने वाली फर्म मौजूद थी, लेकिन जमीनी सत्यापन में उसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं मिला।
बिजली बिल से लेकर किरायानामे तक पर उठे सवाल
जांच के दौरान फर्म के पंजीयन के लिए लगाए गए दस्तावेज भी संदेह के घेरे में आ गए। पुलिस के मुताबिक फर्म के लिए अपलोड किया गया बिजली बिल कूटरचित पाया गया, जबकि किरायानामा और अन्य दस्तावेजों के संबंध में भी जांच में कई तथ्य संदिग्ध मिले। यहीं से जांच ने फर्जी फर्म के जरिए कथित तौर पर किए गए बड़े वित्तीय लेन-देन की ओर रुख किया। अधिकारियों ने फर्म के GST रिकॉर्ड और इनवाइस से जुड़े विवरणों की जांच की तो कथित फर्जी कारोबार का बड़ा आंकड़ा सामने आया।
₹6.61 करोड़ की फर्जी आउटवर्ड सप्लाई का आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में उक्त फर्म द्वारा करीब ₹661.33 लाख यानी 6.61 करोड़ रुपये की फर्जी आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई गई। इसके आधार पर करीब ₹119.04 लाख यानी 1.19 करोड़ रुपये की फर्जी ITC पास-ऑन किए जाने का आरोप है। दूसरी ओर, करीब ₹661.63 लाख यानी 6.61 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद दर्शाकर लगभग ₹119.09 लाख की फर्जी ITC का लाभ लेने की बात भी जांच में सामने आई।
आंकड़ों में समझें पूरा कथित फर्जीवाड़ा
| विवरण | कथित राशि |
|---|---|
| फर्जी आउटवर्ड सप्लाई | ₹661.33 लाख |
| फर्जी ITC पास-ऑन | ₹119.04 लाख |
| फर्जी खरीद | ₹661.63 लाख |
| फर्जी ITC का लाभ | ₹119.09 लाख |
| कुल कथित राजस्व क्षति | ₹238.13 लाख (लगभग ₹2.38 करोड़) |
इन आंकड़ों ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। आरोप है कि बिना वास्तविक कारोबार के कागजी लेन-देन के जरिए GST व्यवस्था में फर्जी इनवाइस और ITC का इस्तेमाल किया गया।
रोडवेज के पास मुखबिर की सूचना पर दबोचा गया आरोपी
मामले में वांछित आरोपी की तलाश पुलिस लगातार कर रही थी। इसी क्रम में 22 अगस्त 2026 को कोतवाली पुलिस टीम को मुखबिर के जरिए आरोपी के बारे में महत्वपूर्ण सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए जिला रोडवेज आजमगढ़ के पास सुबह 11:55 बजे आरोपी आदिल को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक मिथिलेश कुमार प्रजापति, कांस्टेबल भूपेन्द्र मिश्रा और कांस्टेबल सचिन कुमार शामिल रहे। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ मामले में आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित है।
बिजनौर से आजमगढ़ तक जुड़ी जांच की कड़ी
इस मामले में गिरफ्तार आरोपी मूल रूप से बिजनौर जिले के श्योहारा थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ बिजनौर के श्योहारा थाने में भी एक मुकदमा दर्ज है। पुलिस अब यह भी जांच कर सकती है कि कथित फर्जी फर्म के संचालन में आरोपी की भूमिका क्या थी और इस नेटवर्क में उसके साथ अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार हुए, GST पंजीयन की प्रक्रिया में किस स्तर पर इसका इस्तेमाल किया गया और कथित फर्जी इनवाइस किन-किन फर्मों या कारोबारियों तक पहुंचाए गए—ये सभी पहलू जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।
GST व्यवस्था में फर्जी ITC का खेल बना जांच का केंद्र
फर्जी ITC के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले देशभर में चिंता का विषय रहे हैं। वास्तविक कारोबार के बिना कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने की कोशिश से सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और वैध कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए भी प्रतिस्पर्धात्मक असमानता पैदा होती है। आजमगढ़ में सामने आया यह मामला भी इसी तरह के कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसमें एक ऐसी फर्म के नाम पर बड़े पैमाने पर कारोबार दिखाए जाने का आरोप है, जो जांच के दौरान अपने बताए गए व्यापार स्थल पर मौजूद नहीं मिली।
अब नेटवर्क की गहराई तक पहुंचेगी जांच
एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच का अगला फोकस कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क पर हो सकता है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, GST पंजीयन कराने, इनवाइस जारी करने और ITC के कथित लेन-देन में अन्य किन लोगों की भूमिका थी। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार आदिल के खिलाफ निम्न मुकदमे दर्ज हैं—
- मु0अ0सं0 418/2025 — धारा 115(2), 351(3), 352 BNS, थाना श्योहारा, जनपद बिजनौर।
- मु0अ0सं0 522/2025 — धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) BNS, थाना कोतवाली, जनपद आजमगढ़।
करोड़ों के कागजी कारोबार पर पुलिस की नजर
आजमगढ़ में सामने आया यह मामला केवल एक फर्जी फर्म के पंजीयन तक सीमित नहीं दिखाई देता, बल्कि जांच के आंकड़े करोड़ों रुपये के कथित कागजी कारोबार और करीब 2.38 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल पुलिस ने वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है। फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से लेकर ITC के कथित लेन-देन और पूरे नेटवर्क की भूमिका तक—जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने की उम्मीद है।
राजस्व क्षति, फर्जी दस्तावेज और ITC से जुड़े आरोप जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।







