कौड़ीराम में गोवंश संरक्षण के दावों पर सवाल, कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते नजर आए छुट्टा पशु

कौड़ीराम में गोवंश संरक्षण के दावों पर सवाल, कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते नजर आए छुट्टा पशु
  • आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, गंगासागर पाण्डेय, कौड़ीराम, गोरखपुर, .प्र.

बांसगांव। सरकार और प्रशासन की ओर से गोवंश संरक्षण को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच कौड़ीराम से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही हैं। सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते छुट्टा गोवंश न केवल क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहे हैं, बल्कि पशु संरक्षण की जमीनी स्थिति पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं। कौड़ीराम में सड़क किनारे कूड़े और गंदगी के बीच भोजन तलाशते गोवंश को देखकर स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों दिखाई दे रही है। पशु प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य कचरे के बीच अपना निवाला तलाशने को मजबूर दिखाई दिए। ऐसे दृश्य उस समय और भी चिंताजनक हो जाते हैं, जब गोवंश के संरक्षण एवं उनके लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था किए जाने के दावे लगातार सामने आते रहे हैं।

कूड़े के ढेर में क्यों तलाश रहे निवाला?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गोवंश के लिए आश्रय स्थल, चारा और पानी जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो फिर बड़ी संख्या में छुट्टा पशु सड़कों और कूड़े के ढेरों तक पहुंचने को मजबूर क्यों हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे खुले में पड़ा कूड़ा गोवंश के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। भोजन की तलाश में पशु अक्सर खाने योग्य सामग्री के साथ प्लास्टिक और पॉलिथीन भी निगल लेते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। तस्वीरों में जिस तरह गोवंश गंदगी के बीच भोजन तलाशते नजर आ रहे हैं, उसने संबंधित व्यवस्था की निगरानी और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्लास्टिक और गंदगी के बीच जिंदगी

गोवंश के लिए सबसे बड़ी समस्या केवल खुले में घूमना नहीं, बल्कि कचरे में भोजन तलाशना है। सड़क किनारे जमा कूड़े में घरेलू अपशिष्ट, पॉलिथीन और प्लास्टिक जैसी वस्तुएं मौजूद रहती हैं। भूख से मजबूर पशु इनमें से खाने योग्य वस्तु तलाशते हुए कई बार प्लास्टिक भी निगल सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुओं को खुले कूड़े से दूर रखने के साथ-साथ नियमित रूप से चारा और पानी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। साथ ही सड़क किनारे खुले में कूड़ा फेंके जाने की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

बरसात में बढ़ जाती है गंदगी की समस्या

बरसात के मौसम में खुले में पड़ा कूड़ा और गंदगी समस्या को और गंभीर बना देती है। बारिश के पानी के साथ कचरा आसपास फैलने तथा लंबे समय तक गंदगी जमा रहने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में स्वच्छता व्यवस्था के साथ पशु संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देने की जरूरत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कूड़े का नियमित उठान हो और खुले स्थानों पर कचरा फेंकने पर प्रभावी रोक लगे, तो इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी वातावरण सुरक्षित बनाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने उठाए जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल

कौड़ीराम में सामने आए इन दृश्यों के बाद स्थानीय लोगों ने संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि गोवंश संरक्षण केवल आश्रय स्थल बनाए जाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पशुओं को पर्याप्त चारा, स्वच्छ पानी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो। लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में खुले में कूड़ा फेंकने की व्यवस्था पर प्रभावी कार्रवाई की जाए और छुट्टा गोवंश को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अब जिम्मेदारों के संज्ञान का इंतजार

कौड़ीराम की सड़क किनारे सामने आई गोवंश की तस्वीरें कई सवाल छोड़ रही हैं। क्या पशु आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी हो रही है? क्या सभी जरूरतमंद गोवंश तक चारा और पानी पहुंच रहा है? सड़क पर घूम रहे पशुओं को सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? और सबसे महत्वपूर्ण—खुले में कूड़ा फेंके जाने की समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब गंभीरता दिखाएगा? इन सवालों का जवाब अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से ही मिलेगा।

गोवंश संरक्षण केवल एक सरकारी योजना या प्रशासनिक दावे का विषय नहीं, बल्कि संवेदना, जिम्मेदारी और जमीनी व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। कौड़ीराम में कूड़े के ढेर के बीच भोजन तलाशते गोवंश की तस्वीरें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि संरक्षण की योजनाओं का वास्तविक लाभ धरातल पर कितना पहुंच रहा है।

अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों का संज्ञान लेकर क्या कदम उठाते हैं, और क्या सड़क किनारे कूड़े में भोजन तलाशने को मजबूर इन गोवंश को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई होती है।