49 दिन की रहस्यमयी गुमशुदगी, रिश्तों का उलझा जाल और जली हुई हड्डियों से खुला कत्ल का राज—स्वीटी पटेल हत्याकांड की पूरी कहानी

49 दिन की रहस्यमयी गुमशुदगी, रिश्तों का उलझा जाल और जली हुई हड्डियों से खुला कत्ल का राज—स्वीटी पटेल हत्याकांड की पूरी कहानी
  • कॉलेज के प्यार से शुरू हुई जिंदगी, दो शादियां, तीन बच्चे और फिर रहस्यमयी गुमशुदगी… पांच साल बाद अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह

गुजरात। कुछ कहानियां सिर्फ अपराध की खबर नहीं होतीं, वे रिश्तों की उन परतों को सामने लाती हैं, जिन्हें देखकर इंसान देर तक सोचने को मजबूर हो जाता है। प्यार, शादी, टूटते रिश्ते, परिवार, तनाव, रहस्यमयी गुमशुदगी और आखिर में जली हुई हड्डियों से सामने आया हत्या का सच—स्वीटी पटेल हत्याकांड ऐसी ही एक कहानी है।

साल 2021 में गुजरात की स्वीटी पटेल अचानक गायब हुईं। शुरुआती तौर पर मामला एक महिला की गुमशुदगी का नजर आया, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी ने भयावह मोड़ ले लिया। करीब 49 दिनों की तलाश और जांच के बाद मिले मानव अवशेषों ने इस रहस्य की दिशा बदल दी। DNA जांच ने पुष्टि की कि बरामद अवशेष स्वीटी पटेल के ही थे। इसके बाद पुलिस की जांच कथित हत्या की ओर बढ़ी और उनके पति अजय अमृत देसाई, जो उस समय पुलिस सेवा में थे, पर हत्या का आरोप लगा। अब करीब पांच साल बाद इस चर्चित मामले में अदालत का फैसला सामने आया है। 14 अगस्त 2026 को करजण कोर्ट ने अजय अमृत देसाई को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मामले में सह-आरोपी बताए गए किरीटसिंह जडेजा को पांच वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई।


कॉलेज के दिनों का प्यार, फिर शादी और दो बच्चों की मां बनी स्वीटी

स्वीटी पटेल गुजरात के आनंद जिले के उमरेठ क्षेत्र के पणसोरा गांव की रहने वाली थीं। कॉलेज के दिनों में उनकी मुलाकात गांव के ही हेतस महेश पंड्या से हुई। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और बाद में दोनों ने शादी कर ली। इस शादी से स्वीटी के दो बेटे हुए। शुरुआत में जिंदगी सामान्य गति से आगे बढ़ती रही, लेकिन समय के साथ पति-पत्नी के रिश्तों में दरार आने लगी। विवाद और अनबन बढ़ती गई और आखिरकार 2014 में दोनों का तलाक हो गया। यह स्वीटी की जिंदगी का पहला बड़ा मोड़ था। एक रिश्ता खत्म हुआ, लेकिन जिंदगी आगे बढ़नी थी। दो बच्चों की जिम्मेदारी के बीच स्वीटी ने फिर से अपना जीवन संवारने की कोशिश की।


2015 में अजय से मुलाकात, फिर शुरू हुई नई जिंदगी

साल 2015 में स्वीटी की मुलाकात अजय अमृत देसाई से हुई। उस समय अजय अहमदाबाद रूरल क्षेत्र में PSI के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। दोनों की मुलाकात एक माइंड पावर कार्यक्रम के दौरान हुई थी। मुलाकातें धीरे-धीरे बढ़ीं और संबंध गहरे होते गए। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया।

2016 में रूपाल गांव के एक मंदिर में दोनों ने शादी कर ली।

स्वीटी के लिए यह जिंदगी का नया अध्याय था। पहली शादी के टूटने के बाद उन्होंने एक बार फिर अपने परिवार और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें संजोईं। लेकिन आगे चलकर यही रिश्ता उस भयावह कहानी का केंद्र बन गया, जिसने पूरे गुजरात को झकझोर दिया।


दूसरी शादी के बाद रिश्तों में आया तीसरा मोड़

मामले की जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, अजय ने स्वीटी से शादी के बाद अपने समाज की एक अन्य युवती से भी सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया था। इसके बाद परिवार और रिश्तों की तस्वीर और जटिल होती चली गई। स्वीटी और अजय के बीच तनाव बढ़ने लगा। रिश्ते में अधिकार, परिवार और वैवाहिक स्थिति को लेकर विवाद होने की बातें जांच में सामने आईं।

इसी बीच 2019 में स्वीटी ने अजय के बेटे को जन्म दिया।

अब स्वीटी तीन बच्चों की मां थीं—पहली शादी से दो बेटे और दूसरी शादी से एक बेटा। एक तरफ बच्चों की जिम्मेदारी थी, तो दूसरी तरफ वैवाहिक जीवन में बढ़ता तनाव। किसी ने शायद नहीं सोचा था कि आने वाले समय में यही रिश्तों का उलझा हुआ जाल एक दर्दनाक हत्या की कहानी में बदल जाएगा।


4 जून 2021 की रात ने बदल दी पूरी कहानी

फिर आया 4 जून 2021 का दिन। पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, करजण की प्रयोशा सोसाइटी स्थित बंगले में उस रात स्वीटी और अजय के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि देर रात करीब 12:30 बजे, जब स्वीटी अपने बच्चे के साथ सो रही थीं, तभी अजय ने कथित तौर पर उनकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को घर के ऊपरी हिस्से के बेडरूम में छिपाकर रखे जाने का आरोप सामने आया। अगली सुबह करीब 10:45 बजे अजय अपनी कार घर के दरवाजे तक लेकर पहुंचे। पुलिस की जांच के मुताबिक, स्वीटी के शव को कंबल में लपेटकर कार की डिग्गी में रखा गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।


लापता होने की कहानी ने जांच को दूसरी दिशा दी

सुबह करीब 11:30 बजे अजय ने अपने साले जयदीप को फोन किया। बताया गया कि स्वीटी लापता हो गई हैं और उन्हें तलाशने के लिए बाहर जाना है। यानी, पुलिस के अनुसार, जिस समय स्वीटी की हत्या हो चुकी थी, उसी समय उनके गायब होने की कहानी सामने रखी जा रही थी। इसके बाद स्वीटी की तलाश शुरू हुई। परिवार के सामने एक गुमशुदगी का मामला था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को परिस्थितियां संदिग्ध नजर आने लगीं। शाम करीब 4 बजे मामले में अजय के दोस्त किरीटसिंह जडेजा का नाम सामने आया। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस ने कथित तौर पर हत्या और शव को ठिकाने लगाने से जुड़े घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।


49 दिन बाद जली हुई हड्डियों ने खोल दिया सबसे बड़ा राज

स्वीटी के गायब होने के बाद कई दिनों तक तलाश चलती रही। परिवार के लिए हर गुजरता दिन उम्मीद और चिंता के बीच बीत रहा था। लेकिन करीब 49 दिन बाद जांच ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरी कहानी बदल दी। जांच के दौरान मानव अवशेष बरामद हुए। अवशेषों की स्थिति ऐसी थी कि उनकी पहचान सामान्य तरीके से करना आसान नहीं था। इसके बाद DNA परीक्षण कराया गया। DNA रिपोर्ट ने उस रहस्य पर से पर्दा उठाया, जिसका जवाब परिवार लंबे समय से तलाश रहा था। बरामद अवशेष स्वीटी पटेल के ही निकले। अब यह स्पष्ट हो गया कि स्वीटी जीवित नहीं थीं और उनकी गुमशुदगी के पीछे एक गंभीर अपराध की आशंका थी। यहीं से मामला गुमशुदगी से आगे बढ़कर हत्या के मुकदमे में तब्दील हो गया।


जांच से अदालत तक पहुंची कहानी

मामले के खुलासे के बाद 26 जुलाई 2021 के आसपास जांच और कानूनी कार्रवाई ने तेजी पकड़ी। पुलिस ने घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और मामला अदालत तक पहुंचा। इस केस में सबसे महत्वपूर्ण पहलू था—स्वीटी की गुमशुदगी, उनकी हत्या के आरोप और बाद में मिले मानव अवशेषों की DNA से पहचान। जांच में पुलिस ने घटनास्थल, वाहन, कॉल डिटेल, कथित घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा और वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब फैसला सामने आया।


14 अगस्त 2026: अदालत का फैसला

करीब पांच साल तक चले इस चर्चित मामले में आखिरकार 14 अगस्त 2026 को करजण कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने स्वीटी पटेल के पति और तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर अजय अमृत देसाई को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं मामले में सह-आरोपी बताए गए किरीटसिंह जडेजा को पांच वर्ष की जेल की सजा दी गई। अदालत के इस फैसले के साथ वर्षों से चले आ रहे मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव आया।


37 साल की उम्र में खत्म हो गई तीन बच्चों की मां की जिंदगी

स्वीटी पटेल की जिंदगी महज 37 वर्ष की उम्र में खत्म हो गई। उनकी कहानी की शुरुआत कॉलेज के दिनों के प्यार से हुई थी। फिर शादी हुई, दो बच्चे हुए, रिश्ता टूटा। इसके बाद जिंदगी को दोबारा संवारने की कोशिश हुई, दूसरी शादी हुई, एक और बच्चा हुआ और स्वीटी तीन बच्चों की मां बनीं। लेकिन रिश्तों में बढ़ता तनाव आखिरकार उन्हें उस अंजाम तक ले गया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। तीनों बच्चों से उनकी मां हमेशा के लिए दूर हो गईं।


रिश्तों की कहानी से हत्या की मिस्ट्री तक

स्वीटी पटेल हत्याकांड को केवल एक हत्या के मामले के रूप में देखना इस कहानी के कई पहलुओं को नजरअंदाज करना होगा। यह मामला दिखाता है कि रिश्तों में पैदा होने वाला तनाव, वैवाहिक विवाद और पारिवारिक परिस्थितियां किस तरह गंभीर रूप ले सकती हैं। हालांकि किसी भी अपराध की वास्तविक वजह और उसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत के फैसले और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। स्वीटी की गुमशुदगी के बाद 49 दिनों तक चला रहस्य, फिर जले हुए मानव अवशेषों का मिलना और DNA परीक्षण के जरिए पहचान होना—इस पूरे घटनाक्रम ने जांच को एक ऐसी दिशा दी, जिसने अंततः अदालत तक पहुंचकर अपना परिणाम देखा।


एक मां की मौत, पांच साल की जांच और अदालत का फैसला

स्वीटी पटेल की कहानी कई सवाल छोड़ जाती है। आखिर एक महिला, जो तीन बच्चों की मां थी, अपने ही रिश्तों के बीच ऐसी परिस्थितियों में कैसे पहुंची? उसकी गुमशुदगी के पीछे क्या था? 49 दिन बाद मिले अवशेषों ने कैसे पूरे मामले की दिशा बदली? और आखिर वह कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनके आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया? इन सवालों के जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आए साक्ष्यों में तलाशे गए।

14 अगस्त 2026 का फैसला इस चर्चित मामले में एक अहम पड़ाव है। अजय अमृत देसाई को उम्रकैद और किरीटसिंह जडेजा को पांच साल की सजा के साथ अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया। लेकिन स्वीटी पटेल की कहानी का सबसे दर्दनाक अध्याय शायद यही है कि एक मां, जो अपने तीन बच्चों के साथ जिंदगी आगे बढ़ाना चाहती थी, वह खुद अपने बच्चों की जिंदगी से हमेशा के लिए चली गई।

प्यार से शुरू हुई कहानी का अंत अपराध की सजा पर हुआ—और 49 दिनों तक छिपा रहा मौत का राज आखिरकार DNA की वैज्ञानिक जांच से दुनिया के सामने आ गया।