हुनर को मिलेगा सम्मान, पहचान और नई उड़ान: आजमगढ़ के हस्तशिल्पियों के लिए सुनहरा अवसर, 31 जुलाई तक करें आवेदन

हुनर को मिलेगा सम्मान, पहचान और नई उड़ान: आजमगढ़ के हस्तशिल्पियों के लिए सुनहरा अवसर, 31 जुलाई तक करें आवेदन
  • विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार योजना के तहत राज्य और दक्षता हस्तशिल्प पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू, उत्कृष्ट कलाकृतियों को मिलेगा प्रदेश स्तर पर सम्मान


आजमगढ़, 15 जुलाई।
सदियों पुरानी भारतीय हस्तशिल्प परंपरा को नई पहचान देने और प्रतिभाशाली शिल्पकारों के हुनर को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, कानपुर द्वारा संचालित विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार योजना के तहत वर्ष 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना उन हस्तशिल्पियों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है, जो अपनी अनूठी कलाकृतियों और उत्कृष्ट शिल्प कौशल के दम पर प्रदेश स्तर पर सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं।

उपायुक्त उद्योग आशुतोष श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत दो प्रतिष्ठित पुरस्कार—राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार एवं दक्षता हस्तशिल्प पुरस्कार—प्रदान किए जाएंगे। पूरे प्रदेश में 20 राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार तथा 20 दक्षता हस्तशिल्प पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पारंपरिक कला एवं शिल्प को संरक्षित करना, उत्कृष्ट शिल्पकारों को प्रोत्साहित करना तथा नई पीढ़ी को हस्तशिल्प के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केन्द्र, आजमगढ़ द्वारा पात्र हस्तशिल्पियों से 31 जुलाई 2026 तक आवेदन पत्र एवं उनकी उत्कृष्ट कलाकृतियां प्राप्त की जाएंगी। इसलिए इच्छुक शिल्पकार समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर इस अवसर का लाभ उठाएं।

कलाकृति के साथ प्रस्तुत करनी होगी निर्माण प्रक्रिया

पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाले हस्तशिल्पियों को अपनी कलाकृति की मौलिकता एवं गुणवत्ता सिद्ध करने हेतु निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं एवं चरणों की फोटोग्राफी तथा वीडियोग्राफी भी उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केन्द्र, आजमगढ़ कार्यालय में अंतिम तिथि तक जमा करना अनिवार्य होगा।

स्थानीय कला को मिलेगी नई पहचान

यह योजना केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने और स्थानीय शिल्पकारों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी है। इससे न केवल शिल्पकारों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को भी नई ऊर्जा और बाजार मिलेगा।उपायुक्त उद्योग ने जनपद के सभी पात्र हस्तशिल्पियों से अपील की है कि वे इस अवसर को हाथ से न जाने दें और अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन अवश्य करें।

हुनर का सम्मान ही संस्कृति का सम्मान

भारत की सांस्कृतिक विरासत में हस्तशिल्प का विशेष स्थान है। मिट्टी, लकड़ी, धातु, वस्त्र और अन्य पारंपरिक कलाओं में निहित शिल्पकारों का कौशल हमारी पहचान है। ऐसे में यह योजना उन अनमोल कलाकारों के लिए सम्मान का मंच है, जो अपने हाथों की कला से देश की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए हुए हैं।

यदि आपके आसपास कोई हस्तशिल्पी, कारीगर या पारंपरिक कलाकार है, तो उन्हें इस योजना की जानकारी अवश्य दें, ताकि उनका हुनर प्रदेश स्तर पर पहचान और सम्मान प्राप्त कर सके।