विधायक निधि पर भुअर अखाड़ा संचालक के सवालों से गरमाई गोपालपुर की सियासत, देवरांचल में खर्च का मांगा पूरा हिसाब

विधायक निधि पर भुअर अखाड़ा संचालक के सवालों से गरमाई गोपालपुर की सियासत, देवरांचल में खर्च का मांगा पूरा हिसाब
  • भुअर ने पूछा—विकास निधि की करीब 25 करोड़ की राशि में देवरांचल को कितना मिला? कार्यवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग, विधायक नफीस अहमद से जवाब की अपेक्षा

राजनारायण मिश्र | महराजगंज, आजमगढ़

महराजगंज। गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास निधि के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। भुअर अखाड़ा के संचालक भुअर ने विधायक नफीस अहमद की विकास निधि के खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए जनता के सामने कार्यवार और क्षेत्रवार हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। खास तौर पर उन्होंने देवरांचल क्षेत्र में विधायक निधि से कराए गए विकास कार्यों और खर्च की गई धनराशि का ब्यौरा सामने रखने की मांग उठाई है। भुअर का कहना है कि विधायक निधि किसी व्यक्ति या दल की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के विकास के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि है। इसलिए जनता को यह जानने का अधिकार है कि स्वीकृत धनराशि से किन गांवों में कौन-कौन से कार्य कराए गए, किन परियोजनाओं को मंजूरी मिली और उन पर कितनी राशि खर्च हुई।

देवरांचल को लेकर उठाया बड़ा सवाल

भुअर ने विशेष रूप से देवरांचल की बदहाल व्यवस्थाओं का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि विधायक की करीब 25 करोड़ रुपये की विकास निधि में से कितनी राशि देवरांचल क्षेत्र में खर्च की गई। उन्होंने कहा कि देवरांचल लंबे समय से बाढ़, कटान, जर्जर सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा संबंधी समस्याओं और आवागमन की कठिनाइयों से जूझता रहा है।

उनके मुताबिक, जब क्षेत्र की जनता लगातार मूलभूत सुविधाओं की मांग करती रही है, तब यह स्पष्ट होना चाहिए कि विकास निधि का कितना हिस्सा उन इलाकों तक पहुंचा जहां जरूरत सबसे अधिक है। उन्होंने मांग की कि विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से स्वीकृत सभी कार्यों की सूची, संबंधित गांव, कार्य की प्रकृति, स्वीकृत धनराशि और वास्तविक खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता स्वयं यह आकलन कर सके कि विकास की राशि का कितना और किस दिशा में उपयोग हुआ।

‘निधि का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए’

भुअर ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं और विकास कार्यों में पारदर्शिता विश्वास की सबसे बड़ी बुनियाद है। यदि किसी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए धन स्वीकृत हुआ है तो उसकी जानकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव-गांव के लोगों को यह पता होना चाहिए कि उनके क्षेत्र के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई और उस धन से क्या काम कराया गया। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता को विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति समझने में भी मदद मिलेगी।

राजनीतिक बयान से भी बढ़ी चर्चा

विकास निधि के सवाल के साथ भुअर ने विधायक नफीस अहमद को लेकर राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने विधायक की राजनीतिक भूमिका और विभिन्न सामाजिक समूहों के संदर्भ में विवादित आरोप लगाए। उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, ऐसे राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन बयानों को फिलहाल भुअर के आरोप और राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

अब विधायक के जवाब का इंतजार

भुअर के सवालों के बाद अब निगाहें विधायक नफीस अहमद की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। खबर लिखे जाने तक विधायक की ओर से इन आरोपों और मांगों पर कोई तत्काल सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विधायक का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से अब तक कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, किन क्षेत्रों में विकास कार्य कराए गए और देवरांचल क्षेत्र में विकास निधि का कितना हिस्सा खर्च हुआ।

जनता के सामने आएगा तो बढ़ेगा भरोसा

दरअसल, विधायक निधि से जुड़े सवाल केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा संबंध जनता के विकास और सरकारी धन के पारदर्शी उपयोग से है। ऐसे में यदि निधि से हुए कार्यों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाता है तो इससे राजनीतिक बहस को भी तथ्यात्मक आधार मिलेगा और जनता के बीच तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी। देवरांचल के लोग लंबे समय से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाढ़ और कटान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में विधायक निधि के खर्च को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकते हैं।

अब देखना यह होगा कि भुअर की ओर से उठाए गए इन सवालों पर विधायक नफीस अहमद क्या जवाब देते हैं और क्या विधायक निधि से जुड़े कार्यों का पूरा विवरण जनता के सामने रखा जाता है। फिलहाल, विधायक निधि के ‘हिसाब’ की मांग ने गोपालपुर की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।