बचपन को मिले सुरक्षित आशियाना” — समाजसेवियों और संस्थाओं के लिए सुनहरा अवसर, आगे आएं और बदलें बच्चों का भविष्य

बचपन को मिले सुरक्षित आशियाना” — समाजसेवियों और संस्थाओं के लिए सुनहरा अवसर, आगे आएं और बदलें बच्चों का भविष्य

  • आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह

आजमगढ़|
बचपन को सुरक्षित, सशक्त और उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला प्रशासन ने समाज के संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिकों से आगे आने का आह्वान किया है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत बालकों को सुरक्षित पारिवारिक वातावरण प्रदान करने, उनके संरक्षण, पुनर्वास और सामाजिक पुनः एकीकरण के उद्देश्य से इच्छुक व्यक्तियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत उपयुक्त व्यक्ति (Fit Person), उपयुक्त सुविधा (Fit Facility), फॉस्टर केयर तथा ग्रुप फॉस्टर केयर के रूप में सेवाएं देने के इच्छुक लोग आवेदन कर सकते हैं। यह एक सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा कार्य है, जिसमें सेवा भाव रखने वाले लोग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपयुक्त व्यक्ति एवं उपयुक्त सुविधा के तहत दी जाने वाली सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क होंगी। ऐसे व्यक्ति या संस्थाएं, जो बच्चों को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम हों, साथ ही जिनका किसी भी प्रकार के आपराधिक या अनैतिक गतिविधियों से कोई संबंध न हो, वे आवेदन के पात्र होंगे। सामाजिक कार्य या बाल संरक्षण के क्षेत्र में अनुभव रखने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें एक ऐसा वातावरण प्रदान करना है, जहां वे सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समाज का जिम्मेदार नागरिक बन सकें। यह एक ऐसा अवसर है, जहां समाज का हर संवेदनशील व्यक्ति एक मासूम जीवन को नई दिशा दे सकता है।

इच्छुक आवेदक विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रारूप विभागीय वेबसाइट https://mahilakalyan.up.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, कलेक्ट्रेट कैम्पस, आजमगढ़ में संपर्क कर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

 आइए, मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां हर बच्चा सुरक्षित, संरक्षित और स्नेह से परिपूर्ण वातावरण में अपना भविष्य संवार सके।