CM योगी के गृह जनपद में ‘गायब’ हो गई 150 मीटर सड़क! विभागों की जिम्मेदारी के फेर में फंसे ग्रामीण
- डुमरैला गांव में RCC सड़क के बाद करीब 150 मीटर रास्ता बदहाल, आगे खड़ंजा; नाली और जलभराव ने बढ़ाई मुश्किलें, ग्रामीण बोले—कागजों में शिकायत निस्तारित, जमीन पर समस्या जस की तस
संवाददाता—हरेंद्र यादव | गोरखपुर
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के डुमरैला गांव में सड़क और जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में एक ओर RCC सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे करीब 150 मीटर सड़क का हिस्सा मानो गायब हो गया है। इस हिस्से के बाद फिर करीब 150 मीटर तक खड़ंजा सड़क दिखाई देती है। बीच का यह बदहाल रास्ता स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा के आवागमन की बड़ी परेशानी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में समस्या कई गुना बढ़ जाती है। रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
150 मीटर सड़क आखिर किस विभाग की?
ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी सड़क की स्थिति के साथ-साथ जिम्मेदारी तय न होने को लेकर है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समाधान के बजाय मामला एक विभाग से दूसरे विभाग के बीच घूमता रहा। ग्रामीणों के मुताबिक कभी सड़क को ग्राम विकास अधिकारी से संबंधित बताया गया, तो कभी राजस्व विभाग का मामला बताया गया। अब इसे PWD के जिम्मे बताया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का सीधा सवाल है—आखिर इस करीब 150 मीटर सड़क की जिम्मेदारी किस विभाग की है? उनका कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी जाए तो समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है। लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं होने से सड़क का यह हिस्सा लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
नाली नहीं, तो बारिश में रास्ता कैसे बचे?
सड़क के साथ नाली की समस्या भी ग्रामीणों के लिए गंभीर बनी हुई है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी रास्ते पर जमा हो जाता है। इससे सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं है। जब तक पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक सड़क की स्थिति भी लगातार खराब होती रहेगी। इसलिए सड़क निर्माण के साथ पक्की नाली और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था की भी आवश्यकता है।
ग्राम प्रधान पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने स्थानीय ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है, लेकिन संबंधित मोहल्ले के लोगों की सड़क और नाली जैसी बुनियादी समस्याओं का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विकास में सड़क, नाली और जलनिकासी जैसी सुविधाएं सबसे बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं। इसके बावजूद यदि लोगों को इन्हीं सुविधाओं के लिए लगातार शिकायतें करनी पड़ें और विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो समस्या के समाधान की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘शिकायत निस्तारित’ तो फिर सड़क कहां है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी रिकॉर्ड को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में उनकी शिकायत ‘निस्तारित’ दिखाई जा रही है और अधिकारियों की ओर से आख्या भी दर्ज की गई है। अब ग्रामीणों का सवाल है कि यदि शिकायत वास्तव में निस्तारित हो चुकी है, तो मौके पर करीब 150 मीटर सड़क की समस्या अभी तक क्यों दिखाई दे रही है? नाली और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कहां हुआ? ग्रामीण चाहते हैं कि शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें और उसके बाद ही समस्या को पूरी तरह समाप्त करने की कार्रवाई की जाए।
संयुक्त निरीक्षण की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और PWD के अधिकारी संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें। सड़क की भूमि और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा यह तय किया जाए कि सड़क के निर्माण और मरम्मत की जिम्मेदारी किस विभाग की है। इसके बाद करीब 150 मीटर के गायब हिस्से का निर्माण कराने के साथ नाली और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों की मांग—कागजों में नहीं, जमीन पर चाहिए विकास
डुमरैला गांव के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी विभाग से विवाद नहीं है। उनकी मांग बेहद सीधी है—सड़क जिस विभाग की जिम्मेदारी है, वही उसे बनवाए; नाली जिस विभाग के जिम्मे है, वह जलनिकासी की व्यवस्था करे। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय जिम्मेदारी तय करने में समय बीतता जा रहा है, जबकि परेशानी उन्हें रोज झेलनी पड़ रही है। खासकर बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
CM योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में सड़क की यह तस्वीर अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—जब सरकारी रिकॉर्ड में शिकायत ‘निस्तारित’ हो चुकी है, तो जमीन पर करीब 150 मीटर सड़क और नाली की समस्या आखिर कब निस्तारित होगी? ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, मौके पर सड़क, नाली और जलनिकासी का स्थायी समाधान चाहिए।







