सोते हुए शुभम की हत्या का खुला राज: पट्टीदार ही निकला आरोपी, दो दिन में पुलिस ने सुलझाई सनसनीखेज वारदात

सोते हुए शुभम की हत्या का खुला राज: पट्टीदार ही निकला आरोपी, दो दिन में पुलिस ने सुलझाई सनसनीखेज वारदात
  • बांसगांव के जयंतीपुर में धारदार हथियार से हुई थी 21 वर्षीय शुभम की हत्या | पुलिस ने आरोपी संतोष मिश्र को गिरफ्तार कर भेजा जेल | पूछताछ में सामने आया आपसी संबंधों को लेकर विवाद का पहलू

आर.वी.9 न्यूज़ | ब्यूरो प्रमुख- एन. अंसारी

बांसगांव/गोरखपुर।
बांसगांव थाना क्षेत्र के जयंतीपुर गांव में 17 सितम्बर की भोर में हुई 21 वर्षीय कार्तिकेय उर्फ शुभम मिश्र की हत्या की गुत्थी पुलिस ने महज दो दिनों के भीतर सुलझाने का दावा किया है। घर से करीब 100 मीटर दूर छावनी स्थित बंगले के बरामदे में सो रहे शुभम की सिर पर धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई थी और परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

मामले में मृतक के चचेरे भाई विवेकानंद मिश्र उर्फ विक्की की तहरीर पर बांसगांव पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले सुरागों, पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर शनिवार को शुभम के पट्टीदार संतोष मिश्र पुत्र जयप्रकाश मिश्र को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान संतोष ने हत्या की बात स्वीकार की है। इसके बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।


भोर में हुई वारदात ने गांव को झकझोर दिया

जयंतीपुर गांव में 17 सितम्बर की भोर सामान्य दिनों की तरह शुरू नहीं हुई। गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब छावनी स्थित बंगले के बरामदे में सो रहे शुभम मिश्र का शव मिला। बताया गया कि शुभम घर से करीब 100 मीटर की दूरी पर सोया हुआ था। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उसके सिर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। अचानक हुई इस वारदात से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू की। हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मामले को चुनौती के रूप में लिया और जल्द से जल्द घटना के पीछे छिपे व्यक्ति तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी।

घटना के बाद गांव में यह सवाल लगातार उठ रहा था कि आखिर शुभम की हत्या किसने और क्यों की? हत्यारा कौन था और वह इतनी आसानी से वारदात को अंजाम देकर कैसे निकल गया? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने में पुलिस टीम जुट गई।


अज्ञात हत्यारे से शुरू हुई जांच, पट्टीदार तक पहुंची पुलिस

मृतक के चचेरे भाई विवेकानंद मिश्र उर्फ विक्की की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान मृतक के परिचितों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। साथ ही घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस की जांच धीरे-धीरे एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंची, जो मृतक का ही पट्टीदार बताया गया। इसके बाद पुलिस ने संतोष मिश्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में संतोष ने हत्या की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।


पत्नी से शुभम की बातचीत को लेकर मन में पल रहा था आक्रोश—पुलिस

पुलिस लाइन में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी साउथ दिनेश कुमार पुरी ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किया गया संतोष मिश्र, मृतक शुभम का पट्टीदार है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में संतोष ने बताया कि शुभम का उसकी पत्नी से आए दिन मिलना-जुलना होता था और दोनों के बीच मोबाइल फोन पर लंबी बातचीत भी होती थी। पुलिस का कहना है कि इसी बात को लेकर संतोष के मन में शुभम के प्रति आक्रोश बढ़ता गया। पुलिस के मुताबिक, इसी कथित रंजिश के चलते संतोष ने शुभम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और मौका पाकर उस पर हमला कर दिया। हालांकि, घटना के पीछे के कारणों और हत्या से जुड़े सभी तथ्यों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।


महज दो दिन में खुलासे से पुलिस जांच को मिली सराहना

जयंतीपुर की इस सनसनीखेज हत्या के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी तक शीघ्र पहुंचना था। घटना को लेकर ग्रामीणों और परिजनों में भी चिंता का माहौल था। ऐसे में पुलिस टीम ने कई स्तरों पर जांच करते हुए आरोपी तक पहुंचने का दावा किया। पुलिस द्वारा महज दो दिनों में आरोपी की गिरफ्तारी किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्रवाई की चर्चा रही। अधिकारियों के निर्देशन में थाना पुलिस, एसओजी, एंटी थेफ्ट टीम और सर्विलांस टीम समेत कई इकाइयों ने मामले की जांच में भूमिका निभाई। पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया कि गंभीर आपराधिक घटनाओं में विभिन्न टीमों के समन्वय से जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।


कई टीमों ने मिलकर खोला हत्या का राज

इस हत्याकांड के खुलासे में पुलिस की कई टीमों को लगाया गया था। पुलिस के अनुसार जांच टीम में आईपीएस सीओ लाइन/सीओ क्राइम अरुण कुमार यश, क्षेत्राधिकारी बांसगांव अनुज कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी खजनी दिपांशी राठौर, एसओजी प्रभारी निरीक्षक नीरज राय, एंटी थेफ्ट प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार राय, एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक पुरुषोत्तम आनंद सिंह, थानाध्यक्ष विशाल कुमार सिंह, साइबर थाना प्रभारी बांसगांव उपनिरीक्षक उपेन्द्र सिंह, प्रभारी सर्विलांस उपनिरीक्षक नितेश वर्मा, उपनिरीक्षक इन्द्रसेन सिंह सहित पुलिसकर्मी शामिल रहे। इसके अलावा कांस्टेबल दीपक यादव, जयप्रकाश यादव, अजय कुमार, सोनू यादव, अभिषेक सिंह, महिला कांस्टेबल अमृता सिंह और महिला कांस्टेबल लक्ष्मी गुप्ता ने भी जांच में सहयोग किया।


हत्या के बाद उठे सवालों पर पुलिस ने लगाया विराम

शुभम की हत्या के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर एक युवक को उस समय निशाना क्यों बनाया गया, जब वह घर से कुछ दूरी पर सो रहा था। घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों के बीच भय और आक्रोश का वातावरण था। पुलिस के अनुसार अब आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हत्या के पीछे की कथित वजह भी सामने आ गई है। हालांकि मामले में बरामदगी, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।


अब न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

जयंतीपुर का शुभम हत्याकांड फिलहाल पुलिस की जांच के एक महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंच चुका है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। एक युवा की इस तरह हुई हत्या ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं पुलिस द्वारा घटना का शीघ्र खुलासा किए जाने के बाद अब परिजनों और ग्रामीणों की निगाहें न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। पुलिस की ओर से किए गए खुलासे के अनुसार हत्या के पीछे आपसी संबंधों को लेकर उत्पन्न कथित रंजिश सामने आई है। अब अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य यह तय करेंगे कि मामले की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और घटना में आरोपी की भूमिका किस प्रकार सिद्ध होती है।

जयंतीपुर की इस वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पारिवारिक अथवा व्यक्तिगत विवाद जब हिंसा का रूप ले लेते हैं, तो उसका परिणाम कितना भयावह हो सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते विवादों का समाधान और कानून का सहारा लेना ही किसी भी बड़ी अनहोनी को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है।