मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती में बड़ा घोटाला! फर्जी D.Ed. सर्टिफिकेट से बनी नौकरियाँ, STF की जांच में खुला बड़ा रैकेट
भोपाल।
शिक्षा के मंदिर में छल का खेल! मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षक भर्ती के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एमपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच में ऐसे लोगों का पर्दाफाश किया है जिन्होंने फर्जी D.Ed. (डिप्लोमा इन एजुकेशन) सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी स्कूलों में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। जांच के शुरुआती चरण में STF ने 28 से अधिक संदिग्धों की पहचान की है, जबकि 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
“शिक्षक बन बैठे धोखेबाज़” — घोटाले से शिक्षा तंत्र में मचा हड़कंप
मामला तब उजागर हुआ जब STF को खुफिया जानकारी मिली कि राज्य के कई जिलों में कुछ शिक्षक संदिग्ध प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान जब दस्तावेजों की गहन छानबीन हुई तो कई उम्मीदवारों के D.Ed. सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। ये प्रमाणपत्र न तो मान्यता प्राप्त संस्थानों से जारी थे और न ही किसी विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज थे। STF अधिकारियों का कहना है कि “यह कोई व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम लगता है।”
नौकरी पाने के लिए तैयार किए गए नकली दस्तावेज, पकड़ी गई साजिश की परतें
STF की जांच रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह ने फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करने के लिए नकली संस्थान के नाम पर नकली डिप्लोमा और मार्कशीट छपवाईं। इसके बाद इन्हें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर और विदिशा जैसे जिलों में भर्ती प्रक्रियाओं में लगने वाले दस्तावेज़ सत्यापन चरण में पेश किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह गिरोह डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सिस्टम को भी चकमा देने में सफल रहा। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ “शिक्षक” बीते दो सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे थे और वेतन भी उठा रहे थे।
एक अधिकारी ने बताया —
“हमने कुछ सरकारी शिक्षकों की सेवा फाइलें मांगीं। जांच में पाया गया कि उनके शैक्षणिक दस्तावेज़ न केवल फर्जी हैं, बल्कि जिन संस्थानों के नाम पर सर्टिफिकेट बने, वे संस्थान कभी अस्तित्व में ही नहीं थे।”
शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, STF की निगाह में और नाम
इस पूरे मामले के उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में विभाग के कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे, जिन्होंने सत्यापन के दौरान जानबूझकर दस्तावेजों को अनदेखा किया। मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए “संपूर्ण राज्यस्तरीय जांच” के आदेश दिए हैं। STF का कहना है कि यह जांच फिलहाल जारी है, और जल्द ही “फर्जी शिक्षक नेटवर्क” के और कई नाम सामने आ सकते हैं।






