समाज को नई दिशा देती है कवियों की कविता- शिवा जी चन्द

संवाददाता __नरसिंह यादव, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
कवि अपनी कविता व गीत के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों पर लोगों का ध्यान आकृष्ट करते हुए समाज को नई दिशा भी देते हैं। कवियों की कविता मनोरंजन के साथ ही मनुष्य के अन्दर छिपी चेतना को जागृत करती है।
उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख गगहा शिवा जी चन्द ने बुधवार को आर पी डी एकेडमी टिकरी के प्रांगण में युवा साहित्यिक व सामाजिक मंच एवं पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय हास्य कवि स्व रामाश्रय मिश्र उजबक आजमगढी की स्मृति में काव्यांजलि में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए कही।
विशिष्ट अतिथि क्षेत्राधिकारी वास गांव दरवेश कुमार ने कहा कि कवि अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में एक अच्छा संदेश लाने का प्रयास करता है ताकि लोग उसका अनुसरण कर एक सभ्य नागरिकों बन समाज को एक नई दिशा दे सके।
विशिष्ट अतिथि थाना प्रभारी गगहा गौरव कुमार वर्मा ने कहा कि आयोजक टीम धन्यवाद के पात्र हैं जो ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित कर समाज को नई दिशा दे रहें हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि द्वारा मां सरस्वती व राष्ट्रीय हास्य कवि स्व रामाश्रय मिश्र उजबक आजमगढी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सर्व प्रथम गोरखपुर की बेटी नेहा मिश्रा ने सरस्वती वंदना कर कवि सम्मेलन की विधिवत शुरुआत की उनकी दहेज पर प्रस्तुत की गयी एक कविता ने लोगों के आंखों में आसूं ला दिया। कवियित्री डा चेतना पाण्डेय ने गौरैया पर एक कविता पढ़ी शहर खा गये जंगल, क्यों अमरइया हे कोठरियों से बाहर कौन निकलता है फिर किसके खातिर आंगन में गौरैया आए। प्रेम नाथ मिश्र की कविता यह गोरखपुर की माटी है यह गोरखपुर की माटी है पर खूब तालियां बजी।उनकी कविता जिसने भी अपना फ्यूचर से क्योर किया है उन सबने इश्क और प्यार को इग्नोर किया है। सुभाष यादव की मां पर लिखी कविता केहू केतनो दुलारी लेकिन माई ना होई उनकर रोंआ जे दुखाई ओकर भलाई ना होई पर लोगों की आंखें नम हो गयी। हास्य कवि बादशाह प्रेमी ने आज के खान पान पर कुकुर भोज शीर्षक से कविता पढ़ लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया आज के परिवेश में हो रहे आत्म हत्या पर एक कविता पढ़ी सुना है इश्क में गधे भी सुखी घास खाते हैं,वो पागल लोग हैं जो प्यार में सेलफास खाते हैं। आजमगढ़ से पधारे मयकश आजमी ने गजल गीतों से लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कुमार शैल सत्यार्थी,विनय कुमार शुक्ल , कृष्णदेव घायल व अंशुमान शुक्ल ने अपनी रचनाओं को पढ़ा लोग कवियों के गीतों व मुक्तक का आनंद ले रहे थे। कार्यक्रम का संचालन शिव प्रसाद शाही ने किया तथा अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि राम कृष्ण मिश्र सरस जी ने की। स्व रामाश्रय मिश्र उजबक आजमगढी के सुपुत्र राजेश मिश्रा ने कहा की मेरे पिता जी का लगाव गोरखपुर व देवरिया से काफी जुड़ा रहा मैं उसे बरकरार रखूंगा पिता जी के बनाए संबंधों का निर्वहन करुंगा। कार्यक्रम के अन्त में सुधाकर तिवारी ने आए हुए सभी आगंतुकों व कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कवि सम्मेलन में मुख्तार शाही ,राम नगीना त्रिपाठी, संजय मिश्रा, राधामोहन सिंह,पी पी ए संयोजक जे पी गुप्ता, महेंद्र प्रताप सिंह,विजय मोदनवाल,दिनकर चंद, मुन्ना चन्द, संदीप मोदनवाल, आशीष राय, नागेन्द्र पाण्डेय, अनुराग सिंह, हरिओम सिंह, कृपाशंकर राय,शिवधन प्रजापति,जितेन्द्र शर्मा, मंडल अध्यक्ष अजीत वर्मा, राकेश सिंह, सन्तोष चन्द, श्याम सुंदर, सन्त कुमार सिंह, कृपाशंकर सिंह, राहुल हरेंद्र सिंह,सरितेश मिश्र, सुनील शाही दीपक तिवारी सहित अनेकों लोग मौजूद रहे।