नेहरू जयंती: आधुनिक भारत के शिल्पकार को राष्ट्र का नमन — एक vision, एक विरासत, एक उज्ज्वल भविष्य की कहानी
- आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार
पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर राष्ट्र की भावपूर्ण श्रद्धांजलि
— स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, बाल-मन के मित्र और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले दूरदर्शी नेता की अनकही प्रेरक दास्तां —

हर वर्ष 14 नवंबर को भारत एक ऐसे नेता को याद करता है, जिसने न केवल आज़ादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व समर्पित किया, बल्कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण का विशाल दायित्व भी अपने कंधों पर लिया। आज पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर पूरा देश इस महानायक को नमन कर रहा है—उस व्यक्ति को जिसे दुनिया एक राजनेता के रूप में जानती है, लेकिन भारत “चाचा नेहरू” के रूप में स्नेह से याद करता है।
एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसकी सोच आज भी भारत के हर कोने में सांस लेती है
पंडित नेहरू केवल एक प्रधानमंत्री नहीं थे, वे विचारों के यात्री, आधुनिकता के दूत और प्रगति के अग्रदूत थे। उन्होंने भारत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई और देश के भविष्य की राह विज्ञान, तकनीक, लोकतंत्र और शिक्षा से रोशन की।उनकी जयंती पर देशभर में बाल दिवस मनाया जाता है—क्योंकि बच्चों से उनका प्रेम, उनकी मासूम मुस्कान और उनका उज्ज्वल भविष्य, नेहरू जी के लिए भारत के सपनों का वास्तविक रूप था।आज भी स्कूलों में रंग-बिरंगे कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और बच्चों की खिलखिलाहट नेहरू जी की जीवंत विरासत की याद दिलाती है।
एक स्वतंत्रता सेनानी, एक विश्वनेता, एक स्वप्नदर्शी
स्वतंत्रता आंदोलन में नेहरू की निर्णायक भूमिका
इलाहाबाद के आनंद भवन से लेकर ब्रिटिश जेलों की कोठरियों तक, पंडित नेहरू ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए वर्षों का कठिन संघर्ष झेला। वे महात्मा गांधी के सबसे विश्वसनीय साथियों में रहे और सत्य, अहिंसा व लोकतंत्र के मार्ग पर अडिग रहे।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में—भारत का नया स्वरूप गढ़ने वाले वास्तुकार
स्वतंत्रता के बाद नेहरू के सामने एक देश था—
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टूटी अर्थव्यवस्था
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गरीब जनता
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सीमित संसाधन
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विश्व-राजनीति का तनाव
लेकिन उनकी सोच सीमाओं से परे थी। उन्होंने भारत को आधुनिक विज्ञान, उद्योग, शिक्षा और लोकतंत्र की मजबूत नींव प्रदान की।
उनके नेतृत्व में स्थापित हुए:
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IITs (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान)
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AIIMS (एम्स)
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DRDO
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भाखड़ा-नांगल जैसी मेगा परियोजनाएँ
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अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव
उनकी दूरदर्शिता ने भारत को एक वैज्ञानिक और तकनीकी युग की ओर अग्रसर किया।
बच्चों के प्रिय ‘चाचा नेहरू’
नेहरू जी का मानना था—“आज के बच्चे ही कल का भारत हैं।”उनकी मुस्कान, उनकी ऊर्जा और उनकी जिज्ञासा ही भारत के भविष्य की दिशा तय करती है। इसी कारण 14 नवंबर को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
प्रेरणादायक कहानी (विशेष)
एक बार एक कार्यक्रम में पंडित नेहरू को बच्चों के बीच बैठना पड़ा। बच्चे उनसे घिर गए—कोई उनके हाथ खींच रहा था, कोई टाई पकड़ रहा था, कोई उनके पास बैठने की ज़िद कर रहा था।
किसी ने पूछा—“आप परेशान नहीं होते?” नेहरू मुस्कुराए और बोले—
“नहीं, बिल्कुल नहीं! ये बच्चे मेरा भविष्य हैं, मेरी ताकत हैं। इनमें मुझे भारत का कल दिखाई देता है।”
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रनिर्माता की आत्मा की आवाज़ थी।
नेहरू की विरासत—भारत के हर कदम में, हर सपने में
आज जब भारत अंतरिक्ष में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है, तकनीक के नए युग में प्रवेश कर रहा है, विश्व राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है—तो कहीं न कहीं नेहरू की वह दूरदृष्टि, वह आधुनिक सोच और वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण हमारी प्रगति के हर कदम में महसूस होती है।पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती केवल एक याद नहीं,बल्कि भारत के भविष्य को देखने, समझने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा है।उनकी सोच आज भी भारत के विकास मार्ग की दिशा निर्धारित करती है।
भाषण (स्कूल, कार्यक्रम या मंच पर बोलने के लिए तैयार टेक्स्ट)
“सम्मानित अतिथिगण, आदरणीय शिक्षकों और मेरे प्रिय साथियों…आज हम सब स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, आधुनिक भारत के शिल्पकार और बच्चों के प्रिय चाचा—पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती मना रहे हैं।नेहरू जी ने कहा था—‘राष्ट्र की असली शक्ति उसके बच्चे हैं।’उनकी यही सोच आज हमें याद दिलाती है कि हमारा भविष्य शिक्षा, विज्ञान, अनुशासन और कड़ी मेहनत में ही है।आइए, इस दिन हम संकल्प लें कि हम नेहरू जी के सपनों का भारत बनाएँ—एक ऐसा भारत जो ज्ञान में अग्रणी, विकास में मजबूत, और मानवीय मूल्यों में समृद्ध हो।
जय हिन्द!”






