नई किरण की पहल से फिर संवरेंगी तीन परिवारों की खुशियां, बिखरते रिश्तों को मिला साथ निभाने का अवसर

नई किरण की पहल से फिर संवरेंगी तीन परिवारों की खुशियां, बिखरते रिश्तों को मिला साथ निभाने का अवसर
  • आजमगढ़ में परिवार परामर्श प्रकोष्ठ की सार्थक पहल; दहेज उत्पीड़न और पति की उपेक्षा से जुड़े मामलों में मध्यस्थता से बनी सहमति, आपसी संवाद से दूर हुई रिश्तों की दूरियां

आजमगढ़। परिवार केवल ईंट-पत्थरों से बना एक घर नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारियों से बुना वह रिश्ता है, जो जीवन को संपूर्णता प्रदान करता है। लेकिन जब इसी रिश्ते में दहेज उत्पीड़न, मानसिक तनाव, उपेक्षा और संवादहीनता जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं, तो परिवार की खुशियां धीरे-धीरे बिखरने लगती हैं। ऐसे कठिन समय में यदि संवाद का रास्ता खुले और दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार हों, तो टूटते रिश्तों को संभालने की उम्मीद फिर से जाग सकती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आजमगढ़ पुलिस के परिवार परामर्श प्रकोष्ठ की ‘नई किरण’ परियोजना ने तीन दम्पतियों के पारिवारिक विवादों में आपसी सहमति से समझौता कराने में सफलता हासिल की।

जनपद आजमगढ़ में एक अक्टूबर 2026 को आयोजित परिवार परामर्श बैठक के दौरान चार पारिवारिक विवादों की सुनवाई की गई। इनमें से तीन मामलों में दोनों पक्षों के बीच सफलतापूर्वक समझौता कराया गया। पुलिस की इस पहल का उद्देश्य केवल विवादों को समाप्त करना नहीं, बल्कि परिवारों के बीच संवाद, समझ और पारस्परिक सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना भी है।

चार मामलों में हुई सुनवाई, तीन में बनी सहमति

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात एवं नोडल अधिकारी, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के पर्यवेक्षण में थाना कोतवाली परिसर स्थित परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण में बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए कुल चार पत्रावलियों से संबंधित पक्षों को फोन और नोटिस के माध्यम से सूचना देकर मध्यस्थता के लिए बुलाया गया था। पुलिस के अनुसार, चारों मामलों में संबंधित पक्ष उपस्थित हुए। इसके बाद परिवार परामर्श प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने दोनों पक्षों की समस्याओं, शिकायतों और पारिवारिक परिस्थितियों को गंभीरता से सुना।

मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों को आपसी संवाद के महत्व, पारिवारिक जिम्मेदारियों और विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की आवश्यकता के बारे में समझाया गया। लगातार संवाद और समझाइश के प्रयासों के परिणामस्वरूप तीन मामलों में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और समझौता कराया गया। इस कार्यवाही में सामने आए विवादों की प्रकृति ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू रिश्तों में संवाद की कमी, आपसी अविश्वास और जिम्मेदारियों की अनदेखी किस तरह गंभीर तनाव का कारण बन सकती है।

दहेज उत्पीड़न से जुड़े दो मामले आए सामने

परिवार परामर्श प्रकोष्ठ में प्रस्तुत चार मामलों में से दो मामले दहेज की मांग को लेकर कथित शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न से संबंधित थे। इन मामलों में पतियों और ससुराल पक्ष पर महिलाओं को प्रताड़ित किए जाने के आरोप सामने आए थे। दहेज जैसी सामाजिक कुरीति आज भी अनेक परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। विवाह, जो दो व्यक्तियों के साथ-साथ दो परिवारों के बीच विश्वास और सम्मान का संबंध होता है, जब आर्थिक मांगों और दबावों से प्रभावित होने लगता है, तो उसका सबसे अधिक असर वैवाहिक जीवन पर पड़ता है।

ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित पक्ष की बात को गंभीरता से सुनना, उसकी सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देना तथा कानून के अनुरूप समाधान तलाशना बेहद महत्वपूर्ण होता है। नई किरण परियोजना के अंतर्गत इन मामलों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया।

पति की उपेक्षा और खर्च न देने से जुड़ा मामला भी शामिल

बैठक में एक अन्य पारिवारिक विवाद पति द्वारा पत्नी की कथित उपेक्षा से संबंधित था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में पति के दूसरी महिला के संपर्क में रहने के कारण पत्नी से बातचीत नहीं करने तथा उसे खाना-खर्चा नहीं देने की शिकायत सामने आई थी। वैवाहिक जीवन में संवाद, भावनात्मक सहयोग और दैनिक जरूरतों के प्रति जिम्मेदारी की अहम भूमिका होती है। जब इन पहलुओं की अनदेखी होती है, तो पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं और पारिवारिक तनाव गंभीर रूप ले सकता है। परिवार परामर्श प्रकोष्ठ ने इस मामले में भी दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। बातचीत और समझाइश के जरिए विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया गया। पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बैठक में कुल तीन मामलों में समझौता कराया गया। हालांकि, समझौते का अर्थ किसी शिकायत की गंभीरता को कम आंकना नहीं है। पारिवारिक विवादों में आपसी सहमति के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और कानूनी अधिकारों का संरक्षण भी आवश्यक है।

इन तीन मामलों में हुआ समझौता

परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण की बैठक में जिन तीन प्रकरणों में समझौता कराया गया, उनमें निम्नलिखित नाम शामिल हैं—

  1. रिंका पुत्री हरखू राम — ग्राम कोटिला, थाना रानी की सराय, जनपद आजमगढ़।

  2. आँचल पत्नी विरेन्द्र — ग्राम बनकट, थाना तहबरपुर, जनपद आजमगढ़।

  3. प्रिया पुत्री धर्मू — ग्राम मेढ़ी, थाना तहबरपुर, जनपद आजमगढ़।

इन मामलों में समझौता होने के साथ संबंधित परिवारों को आपसी संवाद के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है। हालांकि, समझौते के बाद उनके वैवाहिक जीवन की आगे की स्थिति के बारे में पुलिस की विज्ञप्ति में अलग से कोई जानकारी नहीं दी गई है।

क्या है ‘नई किरण’ परियोजना?

‘नई किरण’ परियोजना का मूल उद्देश्य पारिवारिक विवादों में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करना, गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास करना और आपसी सहमति के आधार पर समाधान की संभावनाएं तलाशना है।

कई बार पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने पर बातचीत के रास्ते बंद हो जाते हैं। छोटी-छोटी बातों से शुरू हुआ मतभेद समय के साथ गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों को अपनी समस्याएं रखने और दूसरे पक्ष की बात समझने का अवसर मिलता है। परिवार परामर्श प्रकोष्ठ इसी दिशा में काम करता है। इसका प्रयास रहता है कि जहां संभव और उचित हो, वहां परिवारों के बीच सहमति स्थापित की जाए तथा विवादों को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोका जाए। इससे पारिवारिक सौहार्द बनाए रखने और न्यायालयों में लंबित पारिवारिक मामलों का बोझ कम करने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं। जहां हिंसा, गंभीर उत्पीड़न या सुरक्षा का खतरा हो, वहां पीड़ित की सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता देना जरूरी है। समझौता तभी सार्थक है, जब वह स्वैच्छिक हो और सभी संबंधित पक्षों के अधिकारों का सम्मान किया जाए।

पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में संपन्न हुई कार्यवाही

परिवार परामर्श प्रकोष्ठ/नई किरण की इस बैठक के दौरान उपनिरीक्षक महेन्द्र प्रसाद तिवारी, उपनिरीक्षक सत्यनारायण यादव, आरक्षी जितेन्द्र कुमार साह तथा आरक्षी सुनील कुमार गुप्ता उपस्थित रहे। पुलिस की ओर से जारी प्रेस-विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में कुल चार मामलों की सुनवाई हुई और तीन मामलों में समझौता कराया गया।

संवाद से समाधान की राह, परिवारों में विश्वास लौटाने की कोशिश

आजमगढ़ में नई किरण परियोजना के माध्यम से तीन पारिवारिक विवादों का समाधान होना आपसी बातचीत और मध्यस्थता के महत्व को रेखांकित करता है। परिवारों में उत्पन्न विवादों को समय रहते समझने, दोनों पक्षों को सुनने और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास रिश्तों को संभालने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समाज में परिवार की मजबूती केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे का सम्मान करने, समस्याओं को समझने और कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने से आती है। दहेज उत्पीड़न, उपेक्षा और घरेलू तनाव जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सामाजिक जागरूकता, कानूनी जानकारी और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

‘नई किरण’ की यह पहल इसी संदेश को सामने लाती है कि विवादों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए और जहां संभव हो, सम्मानजनक सहमति के जरिए समाधान तलाशा जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी परिस्थिति में पीड़ित व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और न्याय के अधिकार से समझौता नहीं होना चाहिए।

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