आजमगढ़ कलेक्ट्रेट में गांधी-शास्त्री जयंती पर श्रद्धांजलि, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने प्रतिमाओं पर अर्पित की पुष्पांजलि
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सत्य, अहिंसा, सादगी और राष्ट्रसेवा के आदर्शों का किया स्मरण; ‘जय जवान, जय किसान’ के उद्घोष के साथ देश के दो महान सपूतों को किया नमन

आजमगढ़। सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को स्वतंत्रता की दिशा में प्रेरित करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आजमगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर में श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कलेक्ट्रेट स्थित गांधी हॉल में महात्मा गांधी की प्रतिमा तथा कलेक्ट्रेट परिसर में लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दोनों महापुरुषों को नमन किया।
दोनों महान विभूतियों का जीवन देशवासियों को सत्य, अहिंसा, त्याग, सादगी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। गांधी जी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने अपने सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से भारतीय राजनीति में विशिष्ट पहचान बनाई।
गांधी जी के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत
गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी के विचारों और उनके योगदान का स्मरण किया गया। सत्य, अहिंसा, सद्भाव और सामाजिक समानता पर आधारित उनका जीवन आज भी समाज को शांति, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों का संदेश देता है। गांधी जी का मानना था कि किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब उसके प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले और समाज में आपसी सहयोग एवं सद्भाव की भावना मजबूत हो। उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता, स्वच्छता, ग्राम विकास और मानवीय गरिमा जैसे विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
‘जय जवान, जय किसान’ के उद्घोष को किया याद
पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनका प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ देश की सुरक्षा में लगे जवानों और राष्ट्र की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने वाले किसानों के महत्व को रेखांकित करता है। शास्त्री जी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक रहा। उनका सार्वजनिक जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि नेतृत्व की सार्थकता पद या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि जनसेवा, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति समर्पण में निहित होती है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, अपर जिलाधिकारी गंभीर सिंह, डिप्टी कलेक्टर अतुल आनंद, जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार सहित अन्य कर्मचारी एवं जनपदवासी उपस्थित रहे। सभी ने दोनों महापुरुषों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों को स्मरण किया।
महापुरुषों के विचारों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि
गांधी जयंती और शास्त्री जयंती केवल स्मरण के अवसर नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय मूल्यों पर आत्ममंथन करने का भी अवसर हैं। सत्य के मार्ग पर चलना, दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखना, ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करना और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील रहना ही इन महान विभूतियों के आदर्शों को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। आजमगढ़ कलेक्ट्रेट में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को स्मरण करते हुए राष्ट्रसेवा, सामाजिक सद्भाव और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों का संदेश दिया।
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