हिस्सेदारी की हुंकार: अब अति पिछड़ा समाज बनेगा सत्ता का निर्णायक चेहरा
बड़हलगंज से उठी सामाजिक जागरण की नई लहर, राजनीतिक भागीदारी को लेकर बनी ठोस रणनीति
संवाददाता- शुभम शर्मा
बड़हलगंज/गोरखपुर।
नगर के बाईपास रोड स्थित सत्कार पैलेस में उस समय एक ऐतिहासिक माहौल देखने को मिला, जब जन सेवा दल के तत्वावधान में अति पिछड़े एवं लंबे समय से सत्ता से वंचित समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह केवल एक सामान्य बैठक नहीं थी, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरी, जो अब अपने अधिकारों के प्रति सजग और संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी बी.के. शर्मा ने की, जबकि क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान एक ही स्वर गूंजता रहा—“अब हक नहीं, हक़ीक़त चाहिए… अब प्रतिनिधित्व नहीं, नेतृत्व चाहिए।”
सत्ता में हिस्सेदारी के लिए जागरण का बिगुल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं जन सेवा दल के महासचिव रामकृपाल शर्मा ने बेहद प्रभावशाली शब्दों में कहा कि अति पिछड़ा समाज आज भी राजनीतिक सत्ता की मुख्यधारा से दूर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ह्यजन सेवा दलह्न का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है कि समाज को संगठित कर उसे राजनीतिक शक्ति में परिवर्तित किया जा सके।

उन्होंने कहा—
"अब समय आ गया है कि हम केवल वोट देने वाले नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाले बनें। हमारी संख्या हमारी ताकत है, और यही ताकत हमें सत्ता तक पहुंचाएगी।"
टिकट मांगने नहीं, अब टिकट बांटने की सोच
विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश प्रभारी अशोक शर्मा ने अपने संबोधन में एक नई राजनीतिक दिशा का संकेत देते हुए कहा कि आजादी के दशकों बाद भी अति पिछड़े समाज को उसका समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। लेकिन अब यह समाज चुप बैठने वाला नहीं है।
उन्होंने जोशीले अंदाज़ में कहा—
"अब हम किसी राजनीतिक दल के दरवाजे पर टिकट मांगने नहीं जाएंगे, बल्कि खुद इतनी ताकत बनाएंगे कि टिकट बांटने की स्थिति में होंगे।"
उनका यह बयान सभा में उपस्थित लोगों के लिए एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता नजर आया।
जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का संकल्प

बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में इस नारे को साकार करने पर जोर दिया—
“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”
यह नारा केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक आंदोलन की रूपरेखा बनता दिखाई दिया, जिसमें समाज की हर जाति और वर्ग को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया गया।
इतिहास से सीख, भविष्य की तैयारी
वक्ताओं ने अपने संबोधन में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अति पिछड़े वर्ग ने देश के निर्माण और विकास में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उन्हें उनका उचित स्थान नहीं मिल पाया। अब समय है कि इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त कर समाज को उसका अधिकार दिलाया जाए।
संगठन की मजबूती ही बदलाव की कुंजी
कार्यक्रम के अंत में जिला अध्यक्ष बी.के. शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बैठक केवल शुरुआत है। आने वाले समय में ऐसे कई सम्मेलन और अभियान चलाकर समाज को संगठित किया जाएगा और उसे एक सशक्त राजनीतिक ताकत बनाया जाएगा।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर सूरज शर्मा, राजाराम शर्मा, राजकुमार शर्मा, विनोद शर्मा, दिग्विजय नाथ शर्मा, खदेरू शर्मा, राकेश शर्मा, अनिकेत शर्मा, प्रदीप शर्मा, चुन्नू शर्मा, संजय शर्मा, महेंद्र शर्मा, डॉ. खदेरू शर्मा, शिवा शर्मा, दीपक शर्मा, बबलू शर्मा, मनोज शर्मा, रवींद्र शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बदलाव की आहट, सशक्त भविष्य की शुरुआत
बड़हलगंज की यह बैठक केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अति पिछड़े समाज के लिए एक नई दिशा, नई सोच और नए संकल्प का प्रतीक बनकर उभरी है। यह स्पष्ट संकेत है कि अब यह वर्ग अपनी पहचान, अधिकार और हिस्सेदारी के लिए पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
अब सवाल नहीं, जवाब बनने की तैयारी है…
अब आवाज नहीं, ताकत बनने का इरादा है।






