अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने उमड़े श्रद्धालु — छठ घाटों पर गूंजे भक्ति गीत, भैरव बाबा धाम से देवरांचल तक श्रद्धा का सैलाब
– महराजगंज (आजमगढ़) से अजय मिश्र की रिपोर्ट
महराजगंज। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ मंगलवार को पूरे जनपद में भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। नगर पंचायत महराजगंज सहित आसपास के गांवों में भोर से ही छठ घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

भैरव बाबा धाम स्थित पोखरे से लेकर पंचायतों के तालाबों तक हर ओर “छठ मईया की जय” के जयघोष गूंज उठे। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सजे घाटों पर व्रती महिलाएं और परिवारजन बड़ी श्रद्धा के साथ जुटे।
लोकगीतों से गूंजे घाट, सिर पर दउरा लिए पहुंचीं महिलाएं

घाटों तक जाती व्रती महिलाओं की टोलियां सिर पर पूजा सामग्री और दउरा लेकर, लोकगीत गाती हुईं निकलीं —
“पीछे-पीछे बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...”
“केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके ऊंके...”
इन मधुर लोकधुनों से पूरा वातावरण आस्था से भर उठा। महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए, दीप और फल-सामग्री लेकर घाटों की ओर बढ़ रहे थे।
अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य, उगते सूर्य के अर्घ्य की तैयारी में भक्त

शाम ढलते ही छठ घाटों पर डूबते सूर्य को दूध, शहद, तिल और जल से अर्घ्य अर्पित किया गया। व्रती महिलाओं ने जल में खड़े होकर अपने पुत्र, पति और परिवार की लंबी आयु एवं समृद्धि की मंगलकामना की। अब मंगलवार तड़के अरुणोदय के समय सभी व्रती पुनः घाटों पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी।
नगर अध्यक्ष ने कराए विशेष इंतज़ाम
नगर पंचायत महराजगंज की अध्यक्ष श्रीमती स्वेता जायसवाल के निर्देशन में सभी प्रमुख घाटों और पंडालों को आकर्षक रूप से सजाया गया। सुरक्षा, प्रकाश और स्वच्छता की व्यवस्था के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
भक्ति और आस्था का संगम बना महराजगंज

छठ पूजा के इस पावन अवसर पर महराजगंज से लेकर देवरांचल तक श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। घाटों पर गूंजते गीत, जल में खड़ीं व्रती महिलाएं और दीपों की रौशनी से जगमगाते तालाब — सबने मिलकर एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण तैयार कर दिया। नगर अध्यक्ष श्रीमती स्वेता जायसवाल ने सभी नगर एवं क्षेत्रवासियों को महापर्व डाला छठ की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा —
“यह पर्व समाज में एकता, शुद्धता और मातृ शक्ति की महिमा का प्रतीक है। सभी श्रद्धालुओं का यह आस्था पर्व मंगलमय हो।”
छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय लोकसंस्कृति की जड़ है — जहां सूर्य की आराधना के साथ प्रकृति, नारी शक्ति और परिवार के प्रति समर्पण का भाव जुड़ा है। आज महराजगंज के हर घाट पर यही संदेश गूंज रहा था — “जहां आस्था है, वहीं सच्चा उत्सव है।”







