शिक्षा के प्रहरी आबिद हुसैन खां नहीं रहे: सपनों को संवारते-संवारते थम गई सांसें, क्षेत्र में शोक की लहर
आर.वी.9 न्यूज़ | ब्यूरो प्रमुख- एन. अंसारी
कुशीनगर/रामकोला।
शिक्षा को अपना मिशन और संस्कार को अपनी पहचान बनाने वाले पूर्व सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी आबिद हुसैन खां का सोमवार को गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 90 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और हर आंख नम हो उठी।
शिक्षा ही था जीवन का उद्देश्य
रामकोला थानाक्षेत्र के सिधावें गांव निवासी आबिद हुसैन खां केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि शिक्षा के सच्चे प्रहरी थे। लक्ष्मीगंज इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए शिक्षा के प्रचार-प्रसार को अपना जीवन समर्पित कर दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका मिशन थमा नहीं—उन्होंने अपने बेटे जावेद खान और बेटियों सहित पूरे परिवार को शिक्षित, संस्कारी और आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया।
किराये के छोटे घर में बड़े सपनों की परवरिश
पिछले लगभग 15 वर्षों से गोरखपुर में एक छोटे से किराये के मकान में रहकर उन्होंने अपने बच्चों और पौत्र-पौत्रियों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प निभाया।उनका सबसे बड़ा सपना था कि उनके पौत्र और पौत्री प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करें। विशेष रूप से अपनी पौत्री तंजीम कौसर को पीसीएस के माध्यम से एसडीएम बनते देखने की उनकी तीव्र इच्छा थी।
अधूरी रह गई सबसे बड़ी हसरत
कुदरत का खेल ऐसा रहा कि इस वर्ष पीसीएस परीक्षा में तंजीम कौसर ने प्री और मेंस परीक्षा में सफलता हासिल की, यहां तक कि इंटरव्यू में भी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम परिणाम में नाम न आने से परिवार में मायूसी छा गई। जिस सफलता का सबसे अधिक इंतजार और खुशी दादा आबिद हुसैन खां को होती, वही सपना उनके जीवनकाल में पूरा न हो सका—और यही उनकी सबसे बड़ी अधूरी हसरत बनकर रह गई।
श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब
उनके अंतिम संस्कार में क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए, जिनमें पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, रणविजय सिंह, राजेश प्रताप राव ‘बंटी भैया’, डॉ. सूर्यभान कुशवाहा, डॉ. रामदरश कुशवाहा, बलिराम राव, प्रधान पवन यादव, भगवन्त यादव, पूर्व प्रधान राजेंद्र प्रसाद, रमन शाही और शम्भू सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन किया।
एक प्रेरणा जो हमेशा जीवित रहेगी
आबिद हुसैन खां का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन और समर्पण से साधारण परिस्थितियों में भी असाधारण सपने देखे और पूरे किए जा सकते हैं। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके संस्कार और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।






