जयपुर में 14 जिंदगियां कुचलने वाले डंपर चालक ने तीन जगह पी थी शराब, अब FSL रिपोर्ट खोलेगी नए राज

जयपुर में 14 जिंदगियां कुचलने वाले डंपर चालक ने तीन जगह पी थी शराब, अब FSL रिपोर्ट खोलेगी नए राज
  • हरमाड़ा हादसे की जांच में बड़ा खुलासा — नशे में धुत कल्याण मीणा ने सड़क पर बरपाया था मौत का तांडव, कंपनी प्रबंधन की भूमिका भी जांच के घेरे में

जयपुर, राजस्थान।
राजधानी जयपुर के हरमाड़ा थाना क्षेत्र में हुई भयावह डंपर दुर्घटना, जिसने 14 लोगों की जान ले ली और दर्जनों को घायल कर दिया — उसकी परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। पुलिस की सख्त पूछताछ में आरोपी डंपर चालक कल्याण मीणा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शुरुआत में आरोपी ने चालाकी दिखाते हुए केवल शाहपुरा में शराब पीने की बात कबूली थी, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उसने सच उगल दिया। कल्याण मीणा ने स्वीकार किया कि उसने तीन जगह — शाहपुरा, चंदवाजी और बढ़ारना में शराब पी थी। यानी रास्ते-रास्ते बोतलें खाली होती रहीं और नशे में धुत वह मौत बनकर सड़कों पर दौड़ता रहा। पुलिस को अब शक है कि चालक ने सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि कोई और नशीला पदार्थ भी लिया था। इसी की पुष्टि के लिए उसका ब्लड सैंपल एफएसएल (FSL) भेजा गया है। अब यही रिपोर्ट खोलेगी इस सनसनीखेज कांड के नए राज — उस दोपहर उसकी रगों में क्या बह रहा था, जिसने सड़क पर तांडव मचा दिया।

चौमू एसीपी उषा यादव के अनुसार,

“आरोपी कल्याण मीणा को एसएमएस अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद गिरफ्तार किया गया है। उसने खुद स्वीकार किया कि वह शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था। ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिससे यह पता चलेगा कि उसने शराब के अलावा कोई और नशा किया था या नहीं।”

पुलिस ने कल्याण मीणा को गैर इरादतन हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच की दिशा डंपर मालिक और कंपनी प्रबंधन की ओर मुड़ गई है। सवाल यह है कि नशे में धुत व्यक्ति को वाहन की चाबी आखिर क्यों दी गई? सूत्रों के मुताबिक, कल्याण मीणा एक रोड मिक्सर कंपनी में कार्यरत था। कुछ दिन की छुट्टी के बाद लौटने पर नियमित चालक अनुपस्थित था, और कंपनी के एक कर्मचारी ने बिना जांचे-परखे डंपर की चाबी उसे थमा दी। कुछ ही घंटों बाद वही चाबी मौत की चाबी बन गई, जिसने हरमाड़ा की सड़कों पर तबाही मचा दी। इस दर्दनाक हादसे में 17 वाहनों को डंपर ने टक्कर मारी, जिनमें से कई पूरी तरह चकनाचूर हो गए। मौके पर 14 लोगों की जान चली गई जबकि 40 से अधिक घायल अब भी अस्पताल में इलाजरत हैं। स्थानीय लोगों में गुस्सा है कि प्रशासन और ट्रैफिक विभाग की लापरवाही के चलते ऐसे "शराबी चालकों" को खुलेआम वाहन चलाने की छूट मिली हुई है।

“ये सिर्फ एक हादसा नहीं, एक अपराध है। अगर डंपर मालिक और कंपनी के जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी मौतें फिर होंगी।”
—स्थानीय नागरिक, हरमाड़ा

अब पुलिस इस पूरी घटना में कंपनी की लापरवाही की भी जांच कर रही है। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद नशे की सही प्रकृति सामने आएगी और उसके बाद मामले में नई धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं। हरमाड़ा की यह घटना अब सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रही — यह सवाल बन गई है "नशे और लापरवाही से होती मौतों" पर सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी का।