एक ही पैकेट, अलग-अलग सच्चाई! — सूरत में बिस्कुट के वजन और संख्या में गड़बड़ी से उठा बड़ा सवाल
- ₹10 के पैकेट में वजन का खेल? — एक ही कार्टून में निकले अलग-अलग वजन वाले बिस्कुट, सूरत से उठा बड़ा सवाल
रिपोर्ट: विशेष संवाददाता | आर.वी.9 न्यूज़
भरोसे के पैकेट में शक की दरार
चाय की चुस्कियों के साथ हर घर में पसंद किया जाने वाला मैरी गोल्ड बिस्कुट एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार स्वाद या गुणवत्ता के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे मामले को लेकर जिसने उपभोक्ताओं के भरोसे को झकझोर दिया है। Britannia Industries द्वारा बनाए जाने वाले ये बिस्कुट हल्के, कुरकुरे और “कम वसा व शून्य ट्रांस-फैट” जैसे दावों के साथ बाजार में अपनी पहचान रखते हैं। लेकिन गुजरात के सूरत से सामने आई एक घटना ने इन दावों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक कार्टून, दो सच्चाइयाँ
सूरत के बाडोली क्षेत्र में स्थित चारभूजा जनरल स्टोर पर उस समय हलचल मच गई, जब ग्राहक सुरेन्द्र नेगी ने बिस्कुट के पैकेट में असमानता का खुलासा किया। दरअसल, सुरेन्द्र नेगी ने कुत्तों को खिलाने के लिए ब्रिटानिया मैरी गोल्ड बिस्कुट (73.8 ग्राम) के दो बड़े कार्टून खरीदे। प्रत्येक कार्टून में 24-24 पैकेट थे, और हर पैकेट पर ₹10 कीमत और 73.8 ग्राम वजन स्पष्ट रूप से अंकित था। लेकिन जैसे ही एक कार्टून को दुकानदार के सामने खोला गया, सबके होश उड़ गए।
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एक ही कार्टून के अंदर से निकले दो पैकेटों में बिस्कुटों की संख्या अलग-अलग थी
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दोनों पैकेट पर वजन और कीमत समान लिखी थी
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देखने में दोनों पैकेट बिल्कुल एक जैसे थे
यह दृश्य किसी पहेली से कम नहीं था—जहां पैकेजिंग एक जैसी, लेकिन अंदर का सच अलग-अलग।
वजन की जांच ने बढ़ाई चिंता
संदेह को दूर करने के लिए दुकानदार ने तुरंत इलेक्ट्रॉनिक तराजू पर दोनों पैकेटों का वजन किया। परिणाम और भी चौंकाने वाले थे—दोनों पैकेटों के वजन में स्पष्ट अंतर पाया गया यानी न सिर्फ बिस्कुटों की संख्या में फर्क था, बल्कि वास्तविक वजन भी पैकेट पर लिखे दावे से मेल नहीं खा रहा था। यह मामला केवल एक छोटी सी गड़बड़ी नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और पैकेजिंग मानकों पर सीधा सवाल है।
कंपनी तक नहीं पहुंची आवाज?
मामले की गंभीरता को समझते हुए सुरेन्द्र नेगी ने कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की।
लेकिन आरोप है कि—
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बार-बार कॉल करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला
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कॉल लगातार डाइवर्ट होती रही
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शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया
इससे उपभोक्ता की नाराजगी और भी बढ़ गई, और सवाल उठने लगे कि क्या बड़े ब्रांड्स आम ग्राहकों की शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं?
दुकानदार की प्रतिक्रिया और असली मुद्दा
दुकानदार ने तत्काल पैकेट वापस लेने की बात कही, लेकिन असली सवाल यहीं खड़ा होता है—
- क्या सिर्फ सामान वापस करना ही समाधान है?
- क्या इस तरह की गड़बड़ियों की गहराई से जांच नहीं होनी चाहिए?
- क्या अन्य पैकेटों में भी ऐसी ही समस्या हो सकती है?
यह मामला एक व्यक्ति या एक दुकान तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत को उजागर करता है।
जागरूकता ही सुरक्षा का रास्ता
सूरत की यह घटना एक चेतावनी है— हर पैकेट पर लिखा हर दावा सही हो, यह जरूरी नहीं। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे खरीदारी करते समय सतर्क रहें, और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर आवाज उठाएं। वहीं, संबंधित कंपनी और खाद्य सुरक्षा विभाग को इस मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे।
आर.वी.9 न्यूज़ का उद्देश्य किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि सच्चाई को सामने लाना है—ताकि हर नागरिक जागरूक बने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे।






