चार दशक पुराना गंभीरा ब्रिज बना मौत का रास्ता, नदी में समाईं गाड़ियाँ – परिजनों की आँखें टिकी हैं एक चमत्कार पर

वडोदरा पुल हादसे में मातम: मृतकों की संख्या पहुंची 19, दो अब भी लापता – रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
वडोदरा, गुजरात | 12 जुलाई 2025
गुजरात के वडोदरा जिले में महिसागर नदी पर स्थित गंभीरा पुल हादसे में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार 9 जुलाई को हुए भीषण ब्रिज हादसे में अब तक 19 लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दो लोग अब भी लापता हैं। इस त्रासदी ने न सिर्फ स्थानीय निवासियों को, बल्कि पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डुबो दिया है।
जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त ब्रिज पर से गुजर रहीं कई गाड़ियाँ एक साथ पुल के ढहते हिस्से के साथ नदी में जा समाईं, जिससे भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया गया। अब तक नदी से 19 शवों को बाहर निकाला गया है, जबकि लापता दो लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।
वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया ने जानकारी देते हुए बताया कि—
“परसों यानी बुधवार को घटना के तुरंत बाद 12 शव बरामद किए गए थे, गुरुवार को 6 और शव मिले। शुक्रवार को एक और शव मिला है। कुछ शव स्लैब के नीचे दबे हुए हैं, जिन्हें निकालने का प्रयास लगातार जारी है। अब भी दो लोग लापता हैं। घायलों में चार लोगों का इलाज वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।”
राज्य सरकार की सक्रियता: मंत्री ऋषिकेश पटेल ने किया दौरा
गुजरात के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने दुर्घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और बचाव कार्य में लगे अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और सवाल
इस हादसे ने प्रशासनिक तैयारियों और पुलों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गंभीरा पुल करीब 40 साल पुराना था, जिसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी थी। इसके बावजूद उस पर भारी वाहनों का आवागमन जारी था। अब हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी चूक किसकी जिम्मेदारी है? गंभीरा ब्रिज हादसा न सिर्फ एक दर्दनाक दुर्घटना है, बल्कि हमारी बुनियादी ढांचे की अनदेखी का परिणाम भी है। अब ज़रूरत है कि हम ऐसी त्रासदियों से सबक लें और समय रहते जर्जर हो चुके पुलों और संरचनाओं का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करें।
मृतकों को श्रद्धांजलि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना।