9 दिन में 5,121 फर्जी ऑर्डर! एक डिवाइस और एक IP से रचा 42 लाख की ऑनलाइन ठगी का खेल—सूरत में साइबर क्राइम का बड़ा खुलासा

9 दिन में 5,121 फर्जी ऑर्डर! एक डिवाइस और एक IP से रचा 42 लाख की ऑनलाइन ठगी का खेल—सूरत में साइबर क्राइम का बड़ा खुलासा
  • हजारों ग्राहक नहीं, पीछे था एक ही नेटवर्क! ‘सुखविलास क्रिएशन’ सेलर ID से COD ऑर्डरों का जाल, Seller Protection Fund Policy का कथित दुरुपयोग

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह

सूरत। एक ई-कॉमर्स कंपनी के सिस्टम पर अगर महज नौ दिनों में 5,121 ऑर्डर आने लगें तो पहली नजर में यही लगेगा कि कंपनी की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और हजारों ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। अलग-अलग नाम, अलग-अलग ऑर्डर और Cash on Delivery यानी COD का विकल्प—सबकुछ देखने में सामान्य नजर आ रहा था। लेकिन डिजिटल दुनिया के पर्दे के पीछे जो खेल चल रहा था, उसने जांचकर्ताओं को भी हैरान कर दिया। सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे कथित फर्जी COD ऑर्डर रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें आरोप है कि एक ही नेटवर्क ने ई-कॉमर्स कंपनी की Seller Protection Fund Policy का कथित तौर पर गलत फायदा उठाकर करीब 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस की जांच में सामने आया कि हजारों ऑर्डरों के पीछे अलग-अलग ग्राहक नहीं, बल्कि डिजिटल स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए संकेत मौजूद थे।

हजारों ऑर्डर, लेकिन डिजिटल निशान एक जैसे

मामला तब संदिग्ध हुआ जब ई-कॉमर्स कंपनी के सिस्टम में एक ही सेलर ID से बहुत कम समय में असामान्य संख्या में ऑर्डर जनरेट होने लगे। जांच के दौरान जब इन ऑर्डरों की डिजिटल गतिविधियों को खंगाला गया तो कई ऐसे कनेक्शन सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग ग्राहकों के नाम पर किए गए इन ऑर्डरों के पीछे एक ही डिवाइस, एक ही IP एड्रेस, एक ही मोबाइल नंबर और एक ही कस्टमर ID से जुड़े संकेत मिले। यानी स्क्रीन पर भले ही हजारों अलग-अलग ग्राहक नजर आ रहे थे, लेकिन डिजिटल जांच में उनके पीछे एक ही नेटवर्क की गतिविधियां दिखाई दे रही थीं।

सिर्फ 9 दिनों में 5,121 ऑर्डर

साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर ‘सुखविलास क्रिएशन’ नाम की सेलर ID के जरिए यह पूरा खेल चलाया गया। इस ID से महज नौ दिनों में करीब 5,121 ऑर्डर जनरेट किए गए। इनमें बड़ी संख्या में ऑर्डर Cash on Delivery यानी COD मोड पर किए गए थे। सवाल यही था कि आखिर इतनी कम अवधि में हजारों ऑर्डर क्यों किए गए? क्या वास्तव में इतने ग्राहक खरीदारी कर रहे थे या फिर ऑर्डर सिस्टम का इस्तेमाल किसी दूसरे मकसद से किया जा रहा था? जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित तौर पर ऐसे डिजिटल पैटर्न मिले, जिनसे फर्जी ऑर्डरों की आशंका मजबूत हुई।

COD ऑर्डरों के जरिए कंपनी की पॉलिसी को निशाना बनाने का आरोप

पुलिस की जांच के मुताबिक, आरोपियों ने ई-कॉमर्स कंपनी की Seller Protection Fund Policy का कथित तौर पर गलत फायदा उठाने की कोशिश की। ऐसी पॉलिसी का उद्देश्य आम तौर पर विक्रेताओं को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान करना होता है। आरोप है कि इसी व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में ऐसे COD ऑर्डर तैयार किए गए, जिनका उद्देश्य वास्तविक बिक्री के बजाय कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाना था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रत्येक ऑर्डर के पीछे वास्तविक प्रक्रिया क्या थी, माल कहां भेजा गया, डिलीवरी के दौरान क्या हुआ और किस तरीके से कथित तौर पर कंपनी को नुकसान पहुंचाया गया।

एक ही डिवाइस ने खोल दिया हजारों ‘ग्राहकों’ का राज

साइबर अपराध की जांच में डिजिटल फुटप्रिंट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में से एक होता है। इस मामले में भी यही डिजिटल निशान जांच की सबसे अहम कड़ी बनते दिखाई दिए। अलग-अलग नामों से बने ऑर्डरों को जब तकनीकी स्तर पर जोड़ा गया तो पुलिस को कथित तौर पर एक ही डिवाइस और एक ही IP एड्रेस से जुड़ी गतिविधियां मिलीं। इसके अलावा मोबाइल नंबर और कस्टमर ID के स्तर पर भी कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है। यही वह बिंदु था जिसने कथित फर्जी ग्राहकों के पूरे नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए। बाहर से हजारों ऑर्डर अलग-अलग लोगों की खरीदारी जैसे दिखाई दे रहे थे, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड एक अलग कहानी बता रहे थे।

42 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे कथित फर्जी ऑर्डर खेल से ई-कॉमर्स कंपनी को करीब 42 लाख रुपये का नुकसान हुआ। यह रकम बताती है कि साइबर ठग अब केवल बैंक खातों या OTP के जरिए ही धोखाधड़ी नहीं कर रहे, बल्कि ऑनलाइन कारोबार के पूरे सिस्टम और उसकी नीतियों में मौजूद प्रक्रियाओं को भी निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में धोखाधड़ी का तरीका सीधे पैसे चुराने के बजाय किसी कंपनी के रिफंड, सुरक्षा या क्षतिपूर्ति तंत्र का कथित दुरुपयोग करना हो सकता है।

साइबर क्राइम के बदलते तौर-तरीकों पर बड़ा सवाल

सूरत का यह मामला डिजिटल कारोबार के सामने एक नई चुनौती की ओर भी इशारा करता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहक और विक्रेता की पहचान केवल नाम या मोबाइल नंबर से नहीं होती। हर ऑर्डर के पीछे डिवाइस, IP, लॉगिन पैटर्न, भुगतान का तरीका और अन्य तकनीकी डेटा मौजूद रहता है। यही डिजिटल डेटा अब साइबर अपराध की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस मामले में भी पुलिस ने कथित तौर पर हजारों ऑर्डरों को अलग-अलग घटनाओं की तरह देखने के बजाय उनके बीच मौजूद तकनीकी समानताओं को तलाशा। इसी प्रक्रिया ने एक बड़े नेटवर्क की आशंका को सामने लाया।

अब पुलिस खंगाल रही है पूरे नेटवर्क की कड़ियां

साइबर क्राइम पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रैकेट में कितने लोग शामिल थे, ऑर्डर किस उद्देश्य से किए गए, कथित तौर पर पॉलिसी का लाभ किस तरीके से लिया गया और 42 लाख रुपये के नुकसान तक पूरा खेल कैसे पहुंचा। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या इसी तरीके से अन्य सेलर ID या अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निशाना बनाया गया था। डिजिटल साक्ष्यों, ऑर्डर रिकॉर्ड, IP लॉग, डिवाइस डेटा, मोबाइल नंबर और संबंधित खातों की जानकारी को आपस में मिलाकर पुलिस पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी चेतावनी

सूरत में सामने आया यह मामला ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी प्लेटफॉर्म पर अचानक असामान्य संख्या में ऑर्डर आना हमेशा कारोबार की सफलता का संकेत नहीं होता। कई बार यही असामान्य गतिविधियां किसी बड़े फर्जीवाड़े का संकेत भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामलों में एक ही डिवाइस से कई अकाउंट, असामान्य COD ऑर्डर, एक जैसे IP पैटर्न, तेजी से बढ़ते ऑर्डर और संदिग्ध ग्राहक गतिविधियों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।


निष्कर्ष: हजारों ग्राहकों का भ्रम, पीछे एक डिजिटल खेल!

सूरत साइबर क्राइम पुलिस की जांच ने जिस कथित फर्जी COD ऑर्डर रैकेट का खुलासा किया है, उसकी सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि महज नौ दिनों में 5,121 ऑर्डर किए गए और हजारों ग्राहकों के पीछे एक ही डिजिटल कनेक्शन के संकेत मिले। एक सेलर ID, हजारों ऑर्डर, एक डिवाइस, एक IP और करीब 42 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी—यह पूरा मामला बताता है कि साइबर अपराध का चेहरा लगातार बदल रहा है। अब पुलिस की जांच का अगला सवाल है—इस डिजिटल खेल के पीछे कितने चेहरे हैं और कंपनी की व्यवस्था का कथित तौर पर किस स्तर तक दुरुपयोग किया गया?

जांच पूरी होने और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही पूरे नेटवर्क की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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