जन्माष्टमी पर ऊभाव थाने में दृष्टिबाधित कलाकारों का दिव्य जलवा, गूंजे भक्ति रस के सुर

जन्माष्टमी पर ऊभाव थाने में दृष्टिबाधित कलाकारों का दिव्य जलवा, गूंजे भक्ति रस के सुर

जन्माष्टमी पर ऊभाव थाने में दृष्टिबाधित कलाकारों का भक्ति जलवा 

"बलिया। ऊभाव थाना परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर गोरखपुर से आए दृष्टिबाधित कलाकारों ने भजन-कीर्तन और मानस चौपाइयों की प्रस्तुतियों से भक्ति रस बिखेर दिया। थाना प्रभारी आर.पी. सिंह के प्रयास से बुलाए गए मधुमानस कीर्तन एवं जागरण परिवार की टीम ने अपनी सुमधुर गायकी से माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। संतबली चौधरी, जनार्दन यादव, संतोष यादव, ज्ञान प्रकाश उर्फ सोनू और मुन्ना कुमार सहित कलाकारों ने अंधे होकर भी भक्ति के स्वर से ऐसा दिव्य वातावरण रचा कि दर्शक भावविभोर हो उठे और कार्यक्रम की सराहना करते नहीं थके।"

  • आर.वी.9 न्यूज़ | नरसिंह यादव क्राइम रिपोर्टर के साथ कैमरामैन कौस्तुभ तिवारी

बलिया, ऊभाव थाना।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जब पूरा देश कान्हा के जन्मोत्सव में झूम रहा था, तभी बलिया जिले के ऊभाव थाने में एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। यहां आयोजित भजन-कीर्तन व मधुमानस जागरण कार्यक्रम में दृष्टिबाधित कलाकारों ने अपने सुमधुर स्वर और भावपूर्ण प्रस्तुति से ऐसा वातावरण रचा कि हर कोई भावविभोर हो उठा।

यह दिव्य कार्यक्रम थाना प्रभारी आर.पी. सिंह के कला-प्रेम और संवेदनशील पहल का परिणाम रहा। उन्होंने गोरखपुर से विशेष रूप से दृष्टिबाधित कलाकारों की टीम—मधुमानस कीर्तन एवं जागरण परिवार—को बुलवाकर जन्माष्टमी महोत्सव को अद्वितीय बना दिया।


भक्ति रस में डूबा ऊभाव थाना

ढोल- मंजीरे, हारमोनियम और मृदंग की संगत के बीच जब इन दृष्टिबाधित कलाकारों ने श्रीकृष्ण भजन और मानस चौपाइयों का वाचन आरंभ किया तो दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट और भावनाओं की गूंज से भर उठी।
लोग हैरान थे कि जिन आंखों ने कभी दुनिया का रंग नहीं देखा, वही कलाकार आत्मा की गहराइयों से भक्ति का रंग बिखेर रहे थे।

इन कलाकारों ने न केवल श्रीकृष्ण जन्म की लीला को स्वर दिया, बल्कि अपने सुरों से यह संदेश भी दे गए कि सच्ची प्रतिभा आंखों से नहीं, आत्मा से देखी जाती है।


दर्शकों की भावनाओं को किया स्पर्श

ग्रामीणों और दर्शकों ने इन कलाकारों का न सिर्फ स्वागत किया बल्कि उन्हें अपने अपार प्रेम और दुलार से सराबोर कर दिया।
लोगों ने भावविभोर होकर कहा—“ये दृष्टिबाधित कलाकार दिव्य दृष्टि के धनी हैं, जिन्होंने अंधेरे में भी हमारे दिलों में भक्ति का दीप जला दिया।”


 प्रतिभाशाली कलाकारों की टोली

गोरखपुर से आए इन कलाकारों ने थाने क्षेत्र के हर शख्स का दिल जीत लिया। इनमें शामिल रहे—

  1. संतबली चौधरी

  2. जनार्दन यादव

  3. संतोष यादव

  4. ज्ञान प्रकाश उर्फ सोनू

  5. मुन्ना कुमार इत्यादि।

इनकी संगत में भजन-कीर्तन का ऐसा रस बरसा कि जन्माष्टमी का पर्व भक्ति और उल्लास की अनोखी छटा बिखेरता नजर आया।


 एक अनुकरणीय पहल

थाना प्रभारी आर.पी. सिंह की यह पहल केवल जन्माष्टमी के आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समाज को यह भी संदेश देती है कि दृष्टिबाधित लोग किसी से कम नहीं हैं। वे अपनी प्रतिभा से दुनिया को रोशन करने की क्षमता रखते हैं।


  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और कला के सम्मान का भी अनुपम उदाहरण बन गया। ऊभाव थाना की यह भक्ति-गाथा आने वाले समय में लोगों की स्मृतियों में हमेशा जीवंत रहेगी।