महिलाओं को डरने की नहीं, आगे बढ़ने की जरूरत — डॉ. प्रियंका मौर्या ने सगड़ी में महिलाओं को दिया आत्मनिर्भरता का संदेश, 26 मामलों की हुई सुनवाई

आजमगढ़|
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने बुधवार को तहसील सगड़ी के सभागार में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं और बालिकाओं के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शासन और प्रशासन मिलकर मातृशक्ति के सशक्तिकरण तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
घरेलू हिंसा, दहेज और छेड़खानी सहित 26 मामलों की सुनवाई
जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान कुल 26 प्रकरण सामने आए, जिनमें—
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घरेलू हिंसा,
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दहेज उत्पीड़न,
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छेड़खानी,
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जमीनी विवाद,
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पारिवारिक उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले शामिल थे। डॉ. प्रियंका मौर्या ने इनमें से 10 मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण कराया, जबकि शेष 16 मामलों को संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं की शिकायतों को संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
“महिला आयोग आपके साथ है” — डॉ. प्रियंका मौर्या
कार्यक्रम में उपस्थित पीड़ित महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा— “आपको डरने की जरूरत नहीं है। हर महिला को सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनना होगा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ा है।” उनके इस संदेश से उपस्थित महिलाओं में आत्मविश्वास और उत्साह देखने को मिला।

बासुपार बनकट पंचायत भवन में लगी जागरूकता चौपाल
जनसुनवाई के बाद विकास खंड अजमतगढ़ के बासुपार बनकट पंचायत भवन में डॉ. प्रियंका मौर्या की अध्यक्षता में एक विशाल जागरूकता चौपाल का आयोजन किया गया। इस चौपाल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना था। कार्यक्रम में—
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महिला कल्याण विभाग,
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स्वास्थ्य विभाग,
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समाज कल्याण विभाग,
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग सहित कई विभागों ने भाग लिया और अपनी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
दहेज प्रथा के खिलाफ चलाया गया जागरूकता अभियान
चौपाल में उपस्थित महिलाओं और ग्रामीणों को दहेज निषेध अधिनियम 1961 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि—
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दहेज लेना,
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दहेज देना,
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या दहेज की मांग करना
कानूनन अपराध है। इसके तहत दोषियों को न्यूनतम 5 वर्ष की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। महिला आयोग की सदस्य ने समाज से दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि बेटियों का सम्मान ही समाज की असली पहचान है।
महिलाओं और बालिकाओं के लिए योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह ने महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
इनमें प्रमुख रूप से—
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मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना,
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना,
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निराश्रित महिला पेंशन योजना,
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मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना,
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वन स्टॉप सेंटर योजना,
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चाइल्ड हेल्पलाइन
जैसी योजनाएं शामिल रहीं। अधिकारियों ने ग्रामीण महिलाओं को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
जनसुनवाई और जागरूकता चौपाल कार्यक्रम में प्रशासन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान—
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क्षेत्राधिकारी सगड़ी,
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उप जिलाधिकारी सगड़ी,
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मुख्य चिकित्साधिकारी,
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जिला विद्यालय निरीक्षक,
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जिला कार्यक्रम अधिकारी,
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जिला समाज कल्याण अधिकारी,
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महिला थानाध्यक्ष,
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जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
नारी सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की जनसुनवाई और जागरूकता चौपाल ग्रामीण महिलाओं को न्याय, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं। महिलाओं को कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करना समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







