पासपोर्ट सत्यापन में कथित उत्कोच मांगने के आरोप पर उप निरीक्षक निलंबित, एसएसपी आजमगढ़ ने लिया सख्त एक्शन

पासपोर्ट सत्यापन में कथित उत्कोच मांगने के आरोप पर उप निरीक्षक निलंबित, एसएसपी आजमगढ़ ने लिया सख्त एक्शन
  • कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सामने आने पर कार्रवाई; विभागीय जांच के भी आदेश

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह

आजमगढ़। पुलिस विभाग में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने एक उप निरीक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। पासपोर्ट सत्यापन से संबंधित जांच में कथित तौर पर रिपोर्ट लगाने के एवज में अप्रत्यक्ष रूप से उत्कोच की मांग करने, आमजन के बीच पुलिस की छवि को प्रभावित करने तथा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद थाना निजामाबाद में तैनात उप निरीक्षक मयंक कृष्ण उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मामले को गंभीर अनुशासनहीनता और पुलिस विभाग की गरिमा एवं छवि को प्रभावित करने वाला कृत्य मानते हुए 16 अगस्त 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ ने निलंबन की कार्रवाई की। साथ ही संबंधित उप निरीक्षक के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्यवाही संस्थित किए जाने के आदेश भी दिए गए हैं।

पासपोर्ट सत्यापन से जुड़ा है पूरा मामला

पुलिस के मुताबिक, थाना निजामाबाद पर नियुक्त उप निरीक्षक ना.पु. मयंक कृष्ण उपाध्याय (पीएनओ-231044082) के विरुद्ध पासपोर्ट सत्यापन से संबंधित जांच के दौरान गंभीर शिकायतें और आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञान में आए। आरोप है कि पासपोर्ट सत्यापन की रिपोर्ट लगाने के एवज में उप निरीक्षक द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से उत्कोच की मांग की गई। पुलिस विभाग ने इसे न केवल कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना, बल्कि आमजनमानस के बीच पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला आचरण भी माना है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद होगी। फिलहाल पुलिस विभाग ने प्रथम दृष्टया सामने आए आरोपों को गंभीर मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।

अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप भी

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उप निरीक्षक पर केवल उत्कोच मांगने का आरोप ही नहीं है, बल्कि पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं अकर्मण्यता जैसे गंभीर आरोप भी प्रथम दृष्टया सामने आए हैं। पुलिस विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आम नागरिकों के साथ निष्पक्ष, पारदर्शी और जिम्मेदार व्यवहार करें। विशेष रूप से पासपोर्ट सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अनुचित मांग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया।

तत्काल प्रभाव से निलंबन, विभागीय जांच शुरू

एसएसपी आजमगढ़ के आदेश के बाद उप निरीक्षक मयंक कृष्ण उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय जांच के दौरान सामने आए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

पुलिसकर्मियों को साफ संदेश—लापरवाही बर्दाश्त नहीं

इस कार्रवाई के जरिए आजमगढ़ पुलिस ने अपने विभाग के कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता अथवा स्वेच्छाचारिता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से जनपद के समस्त पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ करें। पुलिस विभाग की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता अथवा स्वेच्छाचारिता के मामले सामने आते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जनता का विश्वास बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी

पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास किसी भी कानून-व्यवस्था व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। नागरिक जब किसी सरकारी प्रक्रिया के लिए पुलिस से संपर्क करता है, तो उससे निष्पक्षता, पारदर्शिता और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा करता है। ऐसे में पासपोर्ट सत्यापन जैसी प्रक्रिया में कथित रूप से अनुचित मांग का आरोप गंभीर माना जाता है। यही वजह है कि विभाग ने प्रथम दृष्टया आरोप सामने आने पर मामले को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

आजमगढ़ में उप निरीक्षक के निलंबन की यह कार्रवाई पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है। विभागीय जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और आरोपों की पुष्टि स्पष्ट होगी। फिलहाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने कार्रवाई करते हुए यह संदेश दिया है कि पुलिस विभाग की छवि, जनता का विश्वास और कर्तव्य के प्रति ईमानदारी से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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