आजमगढ़ में महिला किसान दिवस: 154 महिला कृषकों और उद्यमियों ने लिया हिस्सा, उत्कृष्ट कार्य करने वाली 8 महिलाएं सम्मानित
- खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट एवं मत्स्य पालन अपनाकर आय बढ़ाने पर जोर; कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की तैयारी और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

आजमगढ़, 15 अक्टूबर 2026। महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ने और उनकी आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से आजमगढ़ में महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, कोटवा के सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आईं कुल 154 महिला कृषकों एवं कृषि उद्यमियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान महिलाओं को रबी फसलों की तैयारी, कृषि विविधीकरण, पशुपालन और सरकारी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सशक्तीकरण की जानकारी दी गई।
कृषि निदेशालय, उत्तर प्रदेश के प्रसार अनुभाग के निर्देशों के अनुपालन में कृषि विभाग, आजमगढ़ द्वारा आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व आजमगढ़ मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक सुरेंद्र चंद्र चौधरी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती सरोज ने की। आयोजन में कृषि वैज्ञानिकों और विभिन्न कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों ने महिलाओं को तकनीकी जानकारी देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।
खेती के साथ अन्य गतिविधियां अपनाकर बढ़ाएं आमदनी
कार्यक्रम में प्रभारी उप कृषि निदेशक सदानंद चौधरी ने महिला किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां अपनाकर परिवार की आय में वृद्धि की जा सकती है। कृषि के विविध क्षेत्रों से जुड़ने पर किसानों को आमदनी के अतिरिक्त अवसर मिलते हैं और केवल एक फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने महिलाओं को सहफसली खेती अपनाने, खेतों की मेड़ों पर उपयोगी वृक्ष लगाने और उनकी सुरक्षा करने का सुझाव दिया। साथ ही कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जुड़ने तथा कृषि एवं अन्य विभागों की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।
रबी फसलों की तैयारी पर कृषि वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, कोटवा के वैज्ञानिकों ने मौजूदा कृषि परिस्थितियों और आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। महिला कृषकों को फसलों की समयानुकूल तैयारी, आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत विकासखंड स्तरीय गोष्ठी भी आयोजित की गई। इसका उद्देश्य महिला किसानों को मक्का उत्पादन से संबंधित तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना और खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था। वैज्ञानिकों ने महिलाओं को कृषि से जुड़ी नई जानकारियों को अपनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का संदेश दिया।
सरकारी योजनाओं और अनुदान की जानकारी
प्रभारी उप कृषि निदेशक सदानंद चौधरी ने कृषि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं और उनमें अनुमन्य अनुदान की जानकारी साझा की। उन्होंने महिला किसानों से योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम में कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। उन्होंने अपने-अपने विभागों की योजनाओं की जानकारी देते हुए महिला कृषकों को कृषि के साथ संबंधित गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री अन्न की खेती अपनाने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि संयुक्त कृषि निदेशक सुरेंद्र चंद्र चौधरी ने महिला किसानों से श्री अन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने इसके गुणों और कृषि क्षेत्र में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को खेती में विविधता लाने, नई कृषि पद्धतियों को अपनाने और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली आठ महिला कृषक सम्मानित
महिला किसान दिवस के दौरान कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली आठ महिला कृषकों को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान कृषि क्षेत्र में महिलाओं की मेहनत, योगदान और उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा। कार्यक्रम में कुल 154 महिला कृषकों एवं उद्यमियों की भागीदारी रही। आयोजन के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और खेती के साथ अतिरिक्त आय के साधनों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में पहल
आजमगढ़ में आयोजित महिला किसान दिवस ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का संदेश दिया। खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और सहफसली खेती जैसे विकल्प अपनाकर महिलाएं अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकती हैं। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि तकनीकी ज्ञान, सरकारी योजनाओं की जानकारी और कृषि के विविध क्षेत्रों से जुड़ाव के माध्यम से महिला किसान खेती को अधिक लाभकारी बना सकती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।







