जेल की दीवारों के पीछे भी संवेदनाओं की दस्तक: मा. सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने महिला बंदियों का जाना दर्द, सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा का दिलाया भरोसा
- जिला कारागार का किया निरीक्षण, महिला बंदियों से सीधे संवाद कर जानी समस्याएं, शासकीय सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
- जिला कारागार में मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल बनीं डॉ. प्रियंका मौर्या

समाज के हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान दिलाने की सोच को साकार करते हुए मा. सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने जिला कारागार पहुंचकर महिला बंदियों से आत्मीय मुलाकात की। जेल की ऊंची दीवारों के भीतर पहुंचकर उन्होंने महिला बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनकी परिस्थितियों का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि जेल में निरुद्ध प्रत्येक महिला को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और शासन की सभी निर्धारित सुविधाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता और सम्मान के साथ मिलना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान डॉ. प्रियंका मौर्या ने महिला बैरकों का अवलोकन करते हुए वहां की साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, स्वच्छ शौचालय, बच्चों के साथ रह रही महिला बंदियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने महिला बंदियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं को सुना और अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अपराध की सजा न्यायालय देता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति की मानवीय गरिमा और मूल अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। जेल केवल दंड का स्थान नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है, जहां प्रत्येक बंदी को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।
डॉ. प्रियंका मौर्या ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला बंदियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक दवाइयां, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, स्वच्छता संबंधी सामग्री तथा शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी और महिला बंदियों की शिकायतों का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान कई महिला बंदियों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया। डॉ. मौर्या ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि प्रत्येक समस्या का समाधान नियमानुसार कराया जाएगा तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि जेल परिसर में सुधारात्मक गतिविधियों, कौशल विकास प्रशिक्षण, शिक्षा, योग, मानसिक परामर्श एवं आत्मनिर्भरता से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि महिला बंदियां समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित हो सकें। डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की पहचान इसी बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और उपेक्षित वर्गों के अधिकारों की कितनी ईमानदारी से रक्षा करता है। जेल में रह रही महिलाएं भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जिला कारागार में मा. सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या का यह निरीक्षण केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशील प्रशासन और महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश बनकर सामने आया। महिला बंदियों से आत्मीय संवाद, उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा और शासकीय सुविधाओं को शत-प्रतिशत सुनिश्चित कराने के निर्देश इस बात का संकेत हैं कि शासन अब जेलों को केवल बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधार, सम्मान और पुनर्वास के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है। ऐसी पहल निश्चित रूप से समाज में संवेदनशील शासन व्यवस्था की सकारात्मक छवि को और मजबूत करेगी।







