बॉस की DP लगाकर बनाया फर्जी WhatsApp अकाउंट, अकाउंटेंट से ऐंठे 30 लाख रुपये

बॉस की DP लगाकर बनाया फर्जी WhatsApp अकाउंट, अकाउंटेंट से ऐंठे 30 लाख रुपये
  • अहमदाबाद के पालड़ी में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला; आरोपी ने कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर सीनियर अकाउंट मैनेजर को भेजा मैसेज, मीटिंग में होने का बहाना बनाकर पेमेंट ट्रांसफर कराया

आर.वी.9 न्यूज़ | अहमदाबाद डिजिटल दौर में साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के नए-नए तरीके खोज लिए हैं। अहमदाबाद के पालड़ी इलाके से ऐसा ही हैरान करने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां एक निजी कंपनी के सीनियर अकाउंट मैनेजर को उसके बॉस की पहचान का इस्तेमाल कर कथित तौर पर 30 लाख रुपये की चपत लगा दी गई।

आरोपी ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की फोटो और नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाया। इसके बाद उसने अकाउंट मैनेजर को संदेश भेजकर खुद को बॉस बताया और कहा कि वह एक महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त है। इसी बहाने तत्काल भुगतान करने के लिए कहा गया। अधिकारी की पहचान से मिलते-जुलते WhatsApp प्रोफाइल को देखकर कर्मचारी को संदेश वास्तविक लगा और उसने बताए गए खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।

14 अगस्त को आया WhatsApp मैसेज

बताया जा रहा है कि घटना 14 अगस्त की है। आरोपी ने बॉस की फोटो और नाम वाली WhatsApp प्रोफाइल से सीनियर अकाउंट मैनेजर से संपर्क किया। मैसेज में कथित तौर पर खुद को मीटिंग में होने की बात बताते हुए कंपनी के एक भुगतान के लिए तुरंत 30 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया। अचानक आए इस संदेश और वरिष्ठ अधिकारी की फोटो देखकर कर्मचारी को शुरुआत में किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। साइबर ठग ने कथित तौर पर जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया, जिससे कर्मचारी ने मामले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए बिना रकम ट्रांसफर कर दी।

फोटो और नाम ने बनाया भरोसे का जाल

साइबर अपराधियों ने इस घटना में भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश की। आमतौर पर कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से लेते हैं। आरोपी ने इसी मनोवैज्ञानिक भरोसे का फायदा उठाते हुए बॉस की DP और नाम का इस्तेमाल किया। साइबर ठगी का यह तरीका बताता है कि अपराधी अब केवल OTP या बैंकिंग जानकारी चुराने तक सीमित नहीं हैं। वे सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की पहचान और भरोसे का इस्तेमाल करके बड़ी रकम ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहे हैं।

30 लाख रुपये ट्रांसफर होने के बाद खुला राज

रकम ट्रांसफर होने के बाद जब वास्तविक बॉस से संपर्क किया गया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद कर्मचारी को पता चला कि उसने जिस WhatsApp अकाउंट को अपने बॉस का समझकर भुगतान किया था, वह वास्तव में फर्जी था। घटना की जानकारी सामने आने के बाद कंपनी में हड़कंप मच गया। मामले को लेकर पुलिस एवं साइबर अपराध से संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क

यह घटना कर्मचारियों और कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से WhatsApp पर अचानक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का निर्देश मिलने पर केवल प्रोफाइल फोटो और नाम देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी रकम के भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी को फोन करके या कंपनी के आधिकारिक माध्यम से निर्देश की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। खासकर जब कोई व्यक्ति तत्काल भुगतान, गोपनीयता या बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

कंपनियों के लिए भी बड़ा सबक

30 लाख रुपये की इस कथित साइबर ठगी ने कंपनियों की आंतरिक भुगतान व्यवस्था और साइबर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। कंपनियों को बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए मल्टी-लेवल अप्रूवल, वेरिफिकेशन और दोहरी पुष्टि जैसी सुरक्षा व्यवस्था अपनानी चाहिए। कर्मचारियों को भी समय-समय पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है, ताकि वे फर्जी WhatsApp अकाउंट, पहचान की नकल, फर्जी ईमेल और अन्य डिजिटल धोखाधड़ी के तरीकों को पहचान सकें।

एक फोटो पर भरोसा पड़ा भारी

अहमदाबाद के पालड़ी में सामने आया यह मामला साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। बॉस की फोटो और नाम से बनाया गया फर्जी WhatsApp अकाउंट, मीटिंग में होने का बहाना और तत्काल भुगतान का दबाव—इन सबके जरिए कथित तौर पर 30 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। यह घटना साफ संदेश देती है कि डिजिटल दुनिया में पहचान की पुष्टि किए बिना कोई बड़ा वित्तीय लेनदेन करना भारी पड़ सकता है।

सावधानी ही साइबर ठगी से बचाव की पहली सुरक्षा है—“DP देखकर नहीं, पुष्टि करके ही पेमेंट करें।”