खजनी का ‘करोड़पति टेक्निकल असिस्टेंट’: 25 करोड़ का होटल, 5 करोड़ का बंगला और विकास कार्यों में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा!

खजनी का ‘करोड़पति टेक्निकल असिस्टेंट’: 25 करोड़ का होटल, 5 करोड़ का बंगला और विकास कार्यों में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा!
  • ब्यूरो चीफ़- हरेन्द्र कुमार यादव  , गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

स्पेशल रिपोर्ट – खजनी ब्लॉक का ‘धनकुबेर’ और आरोपों का पहाड़

गोरखपुर के विकास खंड खजनी में तैनात एक तकनीकी सहायक इन दिनों चर्चाओं में है—वजह है उसकी संदिग्ध दौलत, दबंगई और वर्षों से जारी कथित कमीशनखोरी का लंबा सिलसिला।सरकारी नौकरी की आड़ में अरबों की रियल एस्टेट और कारोबार की दुनिया खड़ी करने वाले इस कर्मचारी के खिलाफ ग्रामीणों, ग्राम प्रधानों, कर्मचारियों और एक पत्रकार तक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कहानी सिर्फ बेहताशा संपत्ति तक सीमित नहीं है। इसमें सत्ता के संरक्षण का दावा, फर्जी मापी में लाखों की बंदरबांट, शिकायतकर्ताओं को धमकी और सरकारी सिस्टम को अपने इशारों पर चलाने की कोशिश जैसे कई परतें शामिल हैं।


25 करोड़ का होटल और 5 करोड़ का आलीशान मकान – सेवा अवधि में बना ‘साम्राज्य’

सूत्रों का दावा है कि पिछले 10–15 वर्षों से खजनी ब्लॉक में जमे यह तकनीकी सहायक करोड़ों की अवैध कमाई का मालिक बन बैठा है।
बताया जा रहा है कि—

  • उसके नाम पर 25 करोड़ रुपये का एक भव्य होटल

  • और करीब 5 करोड़ रुपये का शानदार मकान मौजूद है।

सूत्रों के मुताबिक, वह दवाइयों के कारोबार में भी अपनी पकड़ बनाए हुए है और यह अतिरिक्त आय भी उसकी संपत्ति बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है।


कर्मचारी और प्रधानों का आरोप: “रवैया दबंग, भाषा अभद्र, हर काम में कमीशन की मांग”

ब्लॉक के कई कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों ने साफ कहा है कि तकनीकी सहायक का बर्ताव बेहद अभद्र और डराने-धमकाने वाला होता है।

  • प्रधानों ने आरोप लगाया कि वह हर विकास कार्य में कमीशन की मांग करता है

  • कमीशन न मिलने पर वह फाइलें रोकने की धमकी देता है

  • कर्मचारियों का कहना है कि वह खंड विकास अधिकारी तक से बदसलूकी कर चुका है


सत्ता संरक्षण का दावा—’ट्रांसफर रुकवाना तो जैसे उसका हक’

ग्राम प्रधानों का कहना है कि जब भी उसके खिलाफ शिकायतें होती हैं, वह अपने कथित राजनीतिक संपर्कों के जरिए ट्रांसफर रुकवा लेता है। शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाना भी कोई नई बात नहीं है।


कमीशन विवाद से शुरू हुआ ‘बवाल’, पत्रकार की मां ने की थी लिखित शिकायत

करीब एक माह पहले एक प्रतिष्ठित चैनल के पत्रकार की मां ने नोटरी के माध्यम से जिले के बड़े अधिकारियों को शिकायत भेजी थी।
उनका आरोप था कि—

  • कमीशन न देने पर उन्हें परेशान किया गया,

  • अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया।

इसके बाद पत्रकार ने आरटीआई के माध्यम से तकनीकी सहायक की योग्यता और प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी।


पत्रकार को धमकाने की कोशिश! गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए ‘प्रभावशाली लोगों’ का सहारा?

ताजा जानकारी के मुताबिक, अपनी कथित गड़बड़ियों को छिपाने के लिए तकनीकी सहायक ने कुछ प्रभावशाली लोगों के जरिए पत्रकार को फोन कराकर धमकाने की कोशिश की। सूत्र बताते हैं कि उसके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें हुई हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में वह वर्षों से उसी ब्लॉक में पदस्थ बना हुआ है।


विकास कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा—कागजों पर 14 से 16 लाख की मापी!

ग्रामीणों के अनुसार—

  • कई परियोजनाओं में फर्जी मापी दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

  • एक ही योजना में 14 से 16 लाख रुपये तक की मापी सिर्फ कागजों पर पूरी बताई गई

पूर्व सीडीओ ने भी उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।


जांच की मांग हुई तेज – ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक हलचल

तकनीकी सहायक की संदिग्ध संपत्ति, धमकियों और कार्यशैली को लेकर अब ग्रामीण, प्रधान, कर्मचारी और स्थानीय पत्रकार खुलकर सामने आ गए हैं। जिले में इस समय इस मामले को लेकर माहौल गर्म है, और आय से अधिक संपत्ति, फर्जीवाड़े तथा दबंगई के आरोपों ने जांच की मांग को और तेज कर दिया है।