पितरों की तृप्ति हेतु चिल्लूपार में ऐतिहासिक रुद्र महायज्ञ का ऐलान
श्मशान भूमि पर विश्व का अनूठा आयोजन, सरयू की जलधारा पर सजेगा तैरता कथा मंच – राजेश त्रिपाठी
चिल्लूपार।
आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना के संगम की धरती चिल्लूपार अब एक अद्वितीय धार्मिक अध्याय लिखने जा रही है। आगामी शारदीय नवरात्र में प्रतिपदा 11 अक्टूबर 2026 से कालरात्रि सप्तमी 17 अक्टूबर 2026 तक पितरों की तृप्ति के लिए भव्य सप्त दिवसीय रुद्र महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं चिल्लूपार विधायक, पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी ने पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन विश्व में अपनी तरह का पहला महायज्ञ होगा, जो श्मशान भूमि पर आयोजित किया जाएगा।
14 मार्च को यज्ञ मंडप का होगा शुभारंभ
विधायक त्रिपाठी ने बताया कि 14 मार्च 2026 को मुक्तिपथ पर जनसहयोग से निर्मित स्मृति भवन को यज्ञ मंडप का स्वरूप दिया जाएगा। इसी दिन शास्त्रोक्त विधि से ध्वजदंड स्थापना और ध्वजारोहण के साथ रुद्र महायज्ञ जन-जागरण रथयात्रा का शुभारंभ भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभियान बनेगा।
सरयू की जलधारा पर सजेगा तैरता कथा मंच
महायज्ञ के दौरान सरयू नदी की पावन जलधारा पर तैरता हुआ भव्य शिव कथा मंच तैयार किया जाएगा। यहां देशभर से पधारने वाले शंकराचार्य, जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, संत-महात्मा एवं कथावाचक आचार्य अपने अमृत वचनों से श्रद्धालुओं को कृतार्थ करेंगे। साथ ही सप्त दिवसीय सरयू अमृत महोत्सव और शिव-लीला का आयोजन होगा, जिसमें विलुप्त हो रही लोककलाओं की प्रस्तुति, खेल-कूद प्रतियोगिताएं, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, वृक्षारोपण और ‘सरयू रत्न सम्मान’ जैसे कार्यक्रम भी शामिल होंगे।
हर घर से जुड़ेगा महायज्ञ
आयोजन समिति की विशेष योजना के तहत क्षेत्र के प्रत्येक परिवार को उनकी चौखट पर हल्दी भेंट कर आमंत्रित किया जाएगा। हर परिवार अपने घर के प्रत्येक सदस्य के सिर से एक मुट्ठी चावल और न्यूनतम एक रुपये स्पर्श कराकर यज्ञ में आहुति हेतु भेजेगा। इस प्रकार यह महायज्ञ पूरे क्षेत्र की सामूहिक आस्था का प्रतीक बनेगा।
देशभर के संत-महात्माओं को निमंत्रण
विधायक राजेश त्रिपाठी ने बताया कि आयोजन के संरक्षक अयोध्या धाम के पूज्य संतों के संरक्षण में तथा यज्ञाचार्यों के निर्देशन में लगभग 8–9 महीने तक चलने वाली तैयारियां होंगी। देशभर के शंकराचार्य, जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, संत, साधु, योगी एवं जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। लगभग 25 संस्थाओं के कार्यकर्ता लगातार आठ महीने तक घर-घर जाकर लोगों को इस महायज्ञ में शामिल होने का निमंत्रण देंगे।
धार्मिक-सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी
पत्रकार वार्ता में क्षेत्र की अनेक धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, व्यापारिक एवं राजनीतिक संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इसे चिल्लूपार के सांस्कृतिक इतिहास में मील का पत्थर बताया। यह आयोजन न केवल पितृ-तृप्ति का माध्यम बनेगा, बल्कि समाज में एकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का नया संचार भी करेगा।






