सरयू की लहरों में डूबता देवरांचल, कटान के बीच पहुंचे विधायक नफीस अहमद; सरकार पर साधा निशाना, ग्रामीणों को अब भी राहत का इंतजार
- खेतों और आबादी पर मंडरा रहा खतरा, कटान प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे गोपालपुर विधायक ने शासन-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार; सवाल—दौरे से आगे कब बढ़ेगी समाधान की कवायद?
आर.वी.9 न्यूज़ | ब्यूरो प्रमुख- राजनारायण मिश्र, उ.प्र.
महराजगंज/आजमगढ़।
सरयू नदी की उफनती धाराएं देवरांचल में लगातार जमीन को अपने आगोश में ले रही हैं। कहीं खेत नदी की धारा में समा रहे हैं तो कहीं आबादी के करीब पहुंचता कटान ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ नदी का बदलता रुख ग्रामीणों के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है। ऐसे समय में लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टिकी हुई हैं कि आखिर उन्हें इस संकट से कब और कैसे राहत मिलेगी।
इसी बीच गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नफीस अहमद ने शनिवार शाम सरयू कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और मौके की स्थिति का जायजा लिया। विधायक ने कटान की स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठाए तथा कटान सहित क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के लिए शासन-प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, विधायक के दौरे को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना और सरकार पर सवाल खड़े करना पर्याप्त है, या फिर संकट से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रभावी पहल जरूरी है?
सरयू का कटान बढ़ा रहा ग्रामीणों की चिंता
देवरांचल क्षेत्र में सरयू नदी का कटान कोई नई समस्या नहीं है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर और धारा का दबाव बढ़ने के साथ कटान का खतरा भी गहरा जाता है। नदी की धार कई स्थानों पर खेतों के किनारों को लगातार काट रही है। इससे किसानों के सामने अपनी जमीन बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो खेतों के बाद आबादी भी इसकी चपेट में आ सकती है। नदी के किनारे रहने वाले परिवारों के लिए हर दिन आशंका और अनिश्चितता के बीच गुजर रहा है। किसानों के लिए खेत केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का आधार हैं। ऐसे में नदी के कटान में जमीन का लगातार समाना उनके आर्थिक भविष्य पर भी सीधा असर डाल रहा है।
दौरे के दौरान सरकार पर विधायक ने साधा निशाना
कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक नफीस अहमद ने सरकार और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कटान समेत क्षेत्र की अन्य समस्याओं का उल्लेख करते हुए इसके लिए शासन-प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान विधायक ने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए और ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति संवेदना व्यक्त की। विधायक के बयान के बाद एक ओर जहां सरकार की कार्यशैली को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की निगाहें अब इस बात पर हैं कि इन आरोपों और सवालों के बाद धरातल पर क्या कार्रवाई होती है।
सिर्फ बयान नहीं, समाधान की तलाश में ग्रामीण
कटान प्रभावित ग्रामीणों के लिए यह समस्या केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है। उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी और भविष्य की सुरक्षा का सवाल खड़ा है। ग्रामीणों को तत्काल जरूरत है कि संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया जाए, कटान रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए और प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही भविष्य में हर वर्ष उत्पन्न होने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना तैयार किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
हर साल वही सवाल, कब मिलेगा स्थायी समाधान?
सरयू नदी का कटान हर वर्ष बरसात के मौसम में चर्चा का विषय बनता है। नदी का रुख बदलता है, जमीन कटती है, ग्रामीणों की चिंता बढ़ती है और इसके बाद राहत एवं बचाव की कवायद शुरू होती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या हर साल इसी तरह समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई होगी, या फिर ऐसा स्थायी समाधान खोजा जाएगा जिससे भविष्य में ग्रामीणों को बार-बार इसी संकट का सामना न करना पड़े?
स्थानीय लोगों का मानना है कि समस्या का समाधान केवल तत्काल राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। कटान प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, संवेदनशील तटों की पहचान, मजबूत तट सुरक्षा उपाय और दीर्घकालिक कार्ययोजना समय की मांग है।
जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी उठे सवाल
विधायक के दौरे के बाद राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह नहीं है कि विधायक ने कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा क्यों किया, बल्कि सवाल यह है कि दौरे के बाद अगला कदम क्या होगा?
क्या प्रभावित क्षेत्र की समस्याओं को शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखा जाएगा? क्या संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तत्काल राहत और सुरक्षा के लिए पहल की जाएगी? क्या कटान रोकने की स्थायी परियोजना के लिए शासन स्तर पर पैरवी होगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। जनप्रतिनिधि जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनके प्रतिनिधि इस संकट को केवल राजनीतिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि जनजीवन और आजीविका से जुड़े गंभीर सवाल के रूप में उठाएंगे।
सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि—अब जिम्मेदारी तय करने का समय
सरयू की तेज धार जहां लगातार जमीन काट रही है, वहीं दूसरी ओर कटान को लेकर सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है। सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती है कि प्रभावित क्षेत्र में तत्काल राहत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वहीं जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे समस्या को शासन के उच्च स्तर तक ले जाकर प्रभावी और स्थायी समाधान के लिए लगातार पैरवी करें। क्योंकि ग्रामीणों के लिए यह किसी राजनीतिक बयान से अधिक गंभीर संकट है।
सरयू की धार थामने के साथ भरोसा भी बचाना होगा
देवरांचल में सरयू की लहरें केवल मिट्टी और जमीन नहीं काट रहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों और भविष्य को भी चुनौती दे रही हैं, जिनकी जिंदगी खेत और गांव से जुड़ी है। विधायक नफीस अहमद के दौरे के बाद सरकार पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक बहस को जरूर हवा दी है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों को अब बयान नहीं, राहत चाहिए; आरोप नहीं, कार्रवाई चाहिए और आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
अब देखना यह होगा कि विधायक के दौरे और सरकार पर लगाए गए सवालों के बाद शासन-प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। क्या सरयू के कटान को रोकने के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना धरातल पर उतरती है या फिर हर साल की तरह इस बार भी ग्रामीण कटती जमीन और बढ़ती चिंता के बीच अगले बरसात का इंतजार करने को मजबूर होंगे?
फिलहाल सरयू की धार लगातार आगे बढ़ रही है और ग्रामीणों की निगाहें उस ठोस पहल पर टिकी हैं, जो उनके खेत, घर और भविष्य—तीनों को सुरक्षित कर सके।







