गांवों से उठेगी विकसित भारत की नई उड़ान: जमीनी नवप्रवर्तकों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, 26 इनोवेटर्स हुए सम्मानित

गांवों से उठेगी विकसित भारत की नई उड़ान: जमीनी नवप्रवर्तकों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, 26 इनोवेटर्स हुए सम्मानित
  • डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा संदेश—'भारत की अगली विकास क्रांति प्रयोगशालाओं में नहीं, गांवों और छोटे कस्बों से जन्म लेगी'

नई दिल्ली। भारत के विकास की अगली बड़ी कहानी अब केवल महानगरों, बड़ी प्रयोगशालाओं या प्रतिष्ठित संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसकी मजबूत नींव गांवों, छोटे कस्बों और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान खोजने वाले नवप्रवर्तकों के हाथों लिखी जाएगी। यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 'जमीनी स्तर के नवप्रवर्तक सम्मान समारोह-2026' में कही। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब गांवों और समुदायों में जन्म लेने वाले स्थानीय नवाचारों को वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय उद्यमों में बदला जाएगा।

राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में 26 नवप्रवर्तकों का सम्मान

समारोह भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के 26 जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया गया। इन नवप्रवर्तकों ने कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, दिव्यांग सहायता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका जैसे क्षेत्रों में ऐसे व्यावहारिक एवं किफायती समाधान विकसित किए हैं, जो आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता रखते हैं। कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद, नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर, वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, इनक्यूबेटर भागीदार तथा विभिन्न राज्यों से आए नवप्रवर्तक भी उपस्थित रहे।

'स्थानीय समाधान ही बनेंगे राष्ट्रीय संपदा'

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी नवाचार की यात्रा केवल पुरस्कार प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे वैज्ञानिक सत्यापन, प्रोटोटाइप विकास, इनक्यूबेशन, बौद्धिक संपदा संरक्षण, उत्पाद परीक्षण और बाजार तक पहुंच की पूरी प्रक्रिया से गुजरना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकसित विचार राष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी उत्पाद बन सकें। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जहां गांवों में जन्म लेने वाले विचार सीधे राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली से जुड़ सकें।

स्टार्टअप इंडिया ने बदली तस्वीर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नवाचार को जन-आंदोलन बनाया गया है। आज भारत में 24 लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि असली सफलता केवल स्टार्टअप की संख्या नहीं, बल्कि उन तकनीकों से मापी जाएगी जो किसानों, महिलाओं, कारीगरों और आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करें।

गांवों से निकले इनोवेशन बदल रहे हैं तस्वीर

सम्मानित नवाचारों में कई ऐसे समाधान शामिल रहे जो ग्रामीण भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं—

  • खेत स्तर पर धान प्रसंस्करण करने वाली कॉम्पैक्ट मिनी राइस मिल

  • बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने वाली ट्रैक्टर संचालित मशीन

  • कृषि अपशिष्ट से जैव-अवक्रमणीय उत्पाद

  • एआई आधारित मृदा परीक्षण तकनीक

  • दिव्यांगजनों के लिए कम लागत वाली सहायक तकनीक

  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधान

  • जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि से जुड़े नवाचार

महिलाओं की मजबूत भागीदारी

इस वर्ष सम्मानित 26 नवप्रवर्तक 16 राज्यों और 23 जिलों से चुने गए। उनकी आयु 24 से 66 वर्ष के बीच रही तथा इनमें 11 महिला नवप्रवर्तक भी शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि नवाचार की शक्ति अब समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है।

अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र निभा रहे अहम भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि देशभर में 25 अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र (ACIC) पहले से कार्यरत हैं तथा 25 नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों ने अब तक 2,500 से अधिक जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, वित्तीय सलाह, बाजार संपर्क और उद्यमिता विकास में सहायता प्रदान की है।

राष्ट्रीय नवाचार मार्ग बनाने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने अटल नवाचार मिशन (AIM) और एनआईडीएचआई (NIDHI) कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे नवप्रवर्तकों को—

  • तकनीकी इनक्यूबेशन

  • वैज्ञानिक परीक्षण

  • पेटेंट सहायता

  • उत्पाद प्रमाणन

  • उद्योग सहयोग

  • वित्तीय सहायता

  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार

तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

'मिट्टीकूल' का उदाहरण देकर बढ़ाया उत्साह

उन्होंने प्रसिद्ध 'मिट्टीकूल रेफ्रिजरेटर' का उल्लेख करते हुए कहा कि एक साधारण ग्रामीण नवाचार आज भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों तक पहुंच चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर गांवों के विचार राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत का भविष्य केवल तकनीकी संस्थानों में नहीं, बल्कि गांवों की प्रतिभा, स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधानों और जमीनी नवप्रवर्तकों की सोच में छिपा है। यदि इन नवाचारों को वैज्ञानिक सहयोग, उद्योग, वित्त और बाजार से जोड़ा जाए, तो यही स्थानीय विचार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 की मजबूत नींव बनेंगे। सरकार का लक्ष्य अब केवल नवाचारों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय विकास और रोजगार सृजन का आधार बनाना है।