जब जिंदगी और मौत के बीच था फासला... तब देवदूत बनकर पहुंचे शशांक श्रीवास्तव

जब जिंदगी और मौत के बीच था फासला... तब देवदूत बनकर पहुंचे शशांक श्रीवास्तव
  • रक्तदान कर बचाई गंभीर रूप से बीमार महिला की जान, मानवता और सेवा की मिसाल बने सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष
  • बलिया से गोरखपुर तक का सफर सिर्फ एक उद्देश्य के लिए—'किसी की जिंदगी बचानी है'

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, चंद्रप्रकाश मौर्य

गोरखपुर।
दुनिया में इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान तब होती है, जब कोई अनजान व्यक्ति भी किसी जरूरतमंद की जान बचाने के लिए बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ जाए। ऐसा ही प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाला दृश्य गोरखपुर में देखने को मिला, जहां सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट, सहजनवां के अध्यक्ष एवं युवा समाजसेवी शशांक श्रीवास्तव ने समय पर रक्तदान कर एक गंभीर रूप से बीमार महिला को नई जिंदगी की उम्मीद दी। यह केवल रक्तदान की घटना नहीं थी, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण था, जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल जीत लिया।

हीमोग्लोबिन केवल 4 ग्राम... हर पल बढ़ रहा था खतरा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खानीपुर निवासी मालती देवी गंभीर हालत में पार्क हॉस्पिटल, गोरखपुर में भर्ती थीं। चिकित्सकीय जांच में उनका हीमोग्लोबिन मात्र 4 ग्राम पाया गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि तत्काल रक्त की व्यवस्था नहीं हुई, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उधर, परिवार पहले से ही गहरे सदमे में था। बीते एक महीने के भीतर परिवार के दो सदस्यों का निधन हो चुका था। आर्थिक तंगी, मानसिक पीड़ा और रक्त की तत्काल आवश्यकता—इन तीनों ने परिवार को पूरी तरह निराश कर दिया था।

जब कोई नहीं आया आगे... तब बलिया से गोरखपुर पहुंचे शशांक

इसी बीच जब इस गंभीर स्थिति की जानकारी सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष शशांक श्रीवास्तव को मिली, तो उन्होंने एक पल भी देर नहीं की। वे बलिया से सीधे गोरखपुर पहुंचे और गोरखपुर चैरिटेबल ब्लड बैंक में स्वेच्छा से रक्तदान किया। उनके इस रक्तदान से न केवल मालती देवी के उपचार का रास्ता आसान हुआ, बल्कि उनके परिवार को भी एक नई उम्मीद मिली। अस्पताल में मौजूद लोगों ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोग ही समाज में मानवता की असली पहचान हैं।

"रक्तदान केवल खून देना नहीं, बल्कि किसी को नई जिंदगी देना है"

रक्तदान के बाद शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि किसी जरूरतमंद की सहायता करना हर सक्षम व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि हमारे कुछ मिनट और एक यूनिट रक्त किसी परिवार की खुशियां बचा सकते हैं, तो इससे बड़ा कोई धर्म और सेवा नहीं हो सकती। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और ऑपरेशन के दौरान रक्त की आवश्यकता कभी भी किसी के सामने आ सकती है। ऐसे में समाज के प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदाता बनने का संकल्प लेना चाहिए।

सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट ने दिया समाज को संदेश

सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट ने शशांक श्रीवास्तव के इस मानवीय कार्य पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ऐसे कर्मों से आता है। ट्रस्ट ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करें, क्योंकि "रक्तदान महादान है और आपका एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है।"

समाज के लिए प्रेरणा बना यह कदम

आज जब समाज में संवेदनाएं अक्सर कम होती दिखाई देती हैं, ऐसे समय में शशांक श्रीवास्तव का यह निस्वार्थ कदम उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। उनका यह कार्य केवल एक महिला की जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है और जरूरत पड़ने पर समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो किसी अनजान व्यक्ति के लिए भी अपना रक्त देकर जीवन बचाने को अपना कर्तव्य समझते हैं। रक्तदान का यह प्रेरणादायक उदाहरण बताता है कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदनशीलता और सेवा की भावना होती है। शशांक श्रीवास्तव ने अपने इस मानवीय कार्य से यह साबित कर दिया कि "सच्चा समाजसेवी वही है, जो संकट की घड़ी में सबसे पहले मदद के लिए आगे खड़ा हो।" उनका यह कदम न केवल एक परिवार के लिए जीवनदायी साबित हुआ, बल्कि समाज के हजारों युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया।

संपर्क:
सी स्काई फाउंडेशन ट्रस्ट, सहजनवां (गोरखपुर)
मो.: 7800565888