नल-जल योजना की खुदाई बनी मौत का गड्ढा: JCB से मिट्टी भरते समय दबा मजदूर, चार दिन बाद बरामद हुआ रामदेव का शव
- कांकेर में लापरवाही का दर्दनाक अंत, पाइपलाइन बिछाने के दौरान हादसा; परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
कांकेर (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के काम के दौरान एक मजदूर मिट्टी के ढेर में दब गया और चार दिन बाद उसका शव बरामद किया गया। हादसे के बाद से मजदूर के परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं इस घटना ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हृदयविदारक घटना भानुप्रतापपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हिंगनझर की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, गांव में नल-जल योजना के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान करीब 30 वर्षीय मजदूर रामदेव आंचला मिट्टी भराई के काम में लगा हुआ था।
JCB से मिट्टी भरते समय हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे के पास JCB मशीन से मिट्टी भरने का काम किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक मिट्टी खिसक गई और मजदूर रामदेव आंचला उसकी चपेट में आ गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने मजदूर को तलाशने का प्रयास किया, लेकिन मिट्टी अधिक होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका।
चार दिन तक चलता रहा तलाश अभियान
हादसे के बाद रामदेव का कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार और ग्रामीणों की चिंता बढ़ती गई। कई दिनों तक तलाश जारी रही। आखिरकार चार दिन बाद खुदाई के दौरान मजदूर का शव मिट्टी के नीचे दबा मिला।
शव मिलने के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि जिस व्यक्ति से घर की उम्मीदें जुड़ी थीं, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
इस हादसे ने सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गड्ढों में काम करते समय सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है, ताकि मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं को रोका जा सके। अब यह जांच का विषय है कि काम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा सकती है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना है।
एक परिवार की उम्मीदों का अंत
रामदेव आंचला की मौत ने एक परिवार को गहरा आघात दिया है। रोजी-रोटी के लिए मेहनत करने निकला मजदूर कभी नहीं लौटा। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि विकास कार्यों के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नल-जल योजना से गांवों तक पानी पहुंचाने का सपना पूरा करने में जुटे एक मजदूर की जिंदगी मिट्टी के उसी गड्ढे में समा गई, जहां वह अपना काम कर रहा था।







