आजमगढ़ में खुरपका-मुँहपका टीकाकरण अभियान का शुभारंभ, डीएम-सीडीओ ने दिखाई जागरूकता रैली को हरी झंडी

आजमगढ़ में खुरपका-मुँहपका टीकाकरण अभियान का शुभारंभ, डीएम-सीडीओ ने दिखाई जागरूकता रैली को हरी झंडी
  • 45 दिनों तक गांव-गांव पहुंचेगी टीम, पशुपालकों से टीकाकरण कराने की अपील; सहायता के लिए कंट्रोल रूम नंबर जारी

आजमगढ़, 22 जुलाई। जनपद में पशुओं को खुरपका-मुँहपका (एफएमडी) जैसी संक्रामक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए 8वें चरण के विशेष टीकाकरण अभियान का मंगलवार को शुभारंभ किया गया। 22 जुलाई से 8 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान की शुरुआत कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर की। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि अभियान के तहत पशुपालन विभाग की टीमें विशेष वाहनों के माध्यम से जिले के सभी गांवों में पहुंचकर पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण करेंगी। जनपद के सभी 22 विकास खंडों के लिए अलग-अलग वाहन लगाए गए हैं, ताकि प्रत्येक गांव तक समयबद्ध तरीके से पहुंचा जा सके।

मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने कहा कि खुरपका-मुँहपका रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। इसके लिए पशुपालकों को जागरूक करते हुए शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

अपर निदेशक (ग्रेड-2) पशुपालन डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य मवेशियों को खुरपका-मुँहपका रोग से सुरक्षित करना और इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। जागरूकता वाहन निर्धारित रोस्टर के अनुसार सभी विकास खंडों, गौ-आश्रय स्थलों, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और निजी पशुपालकों तक पहुंचकर टीकाकरण के साथ-साथ रोग की रोकथाम एवं बचाव की जानकारी भी देंगे।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि 45 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में पशुपालकों को अपने पशुओं को अस्पताल लाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभागीय टीमें गांवों में पहुंचकर घर-घर पशुओं का टीकाकरण करेंगी। साथ ही जरूरतमंद पशुओं का उपचार और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रशासन ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराकर अभियान को सफल बनाएं, ताकि जनपद को खुरपका-मुँहपका रोग से मुक्त बनाया जा सके। टीकाकरण से संबंधित किसी भी समस्या या जानकारी के लिए कंट्रोल रूम नंबर 9454417172 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्रीय पशु चिकित्सालय से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।