भलस्वा डंपसाइट से कूड़े के पहाड़ का होगा अंत! 15 अक्टूबर तक पूरी सफाई का लक्ष्य, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किया निरीक्षण
- 99.07 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन में तेजी लाने के निर्देश
नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को कूड़े के विशाल पहाड़ों से मुक्ति दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने शनिवार को भलस्वा डंपसाइट का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा वर्षों से जमा पुराने कचरे के निस्तारण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि पुराने कचरे के निस्तारण की गति को और तेज किया जाए तथा डंपसाइट पर प्रतिदिन आने वाले नए कचरे का वैज्ञानिक एवं समयबद्ध प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में फिर से कूड़े का पहाड़ बनने की स्थिति उत्पन्न न हो।
99.07 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण
दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी कि 31 जुलाई 2026 तक भलस्वा डंपसाइट पर 99.07 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। यह राजधानी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान कार्ययोजना के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 तक डंपसाइट पर मौजूद शेष पुराने कचरे को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि मार्च 2026 तक एकत्रित समस्त कचरे के निस्तारण का कार्य 31 दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
नए कचरे की प्रोसेसिंग में तेजी लाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान श्री मनोहर लाल ने एमसीडी अधिकारियों को निर्देश दिया कि सैनिटरी लैंडफिल पर प्रतिदिन आने वाले ताजे कचरे की प्रोसेसिंग में तेजी लाई जाए, ताकि पुराने कचरे के निस्तारण की गति प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन (Scientific Waste Management) को प्राथमिकता दी जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़े।
सरकार की प्राथमिकता में स्वच्छ और हरित दिल्ली
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राजधानी को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और आधुनिक शहरी सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भलस्वा डंपसाइट का पुनर्विकास केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के पर्यावरणीय सुधार और नागरिकों के बेहतर जीवन स्तर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न किया जाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित निगरानी की जाए।
भलस्वा डंपसाइट: वर्षों पुरानी चुनौती
भलस्वा डंपसाइट लंबे समय से दिल्ली की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल रही है। यहां वर्षों से जमा लाखों टन कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध, वायु प्रदूषण, भूजल प्रदूषण तथा स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती रही हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत अब इस डंपसाइट को पूरी तरह समाप्त कर पर्यावरण अनुकूल उपयोग के लिए विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुराने कचरे के साथ-साथ प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले नए कचरे का भी वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाए, तो भविष्य में डंपसाइट जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार आधुनिक मशीनरी, प्रोसेसिंग तकनीक और अपशिष्ट पृथक्करण प्रणाली को बढ़ावा दे रही है।
स्वच्छ भारत मिशन को मिलेगी नई मजबूती
भलस्वा डंपसाइट पर चल रहा यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन और सतत शहरी विकास के लक्ष्यों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। निर्धारित समय के भीतर कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में यह परियोजना देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
यदि योजना तय समय के अनुसार पूरी होती है, तो 15 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ों में शामिल भलस्वा डंपसाइट इतिहास बनने की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी होगी।







