जब खेत में उतरीं राज्य महिला आयोग की सदस्य: डॉ. प्रियंका मौर्या ने ग्रामीण महिलाओं संग की धान की रोपाई, दिया सम्मान और सहभागिता का संदेश
- ग्राम बड़ौरा बुजुर्ग में महिलाओं के बीच पहुंचीं डॉ. प्रियंका मौर्या, खेत में रोपाई कर बढ़ाया उनका उत्साह • जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी, महिला सशक्तिकरण पर दिया विशेष जोर

आजमगढ़, 22 जुलाई। आमतौर पर सरकारी कार्यक्रम सभागारों और बैठकों तक सीमित रहते हैं, लेकिन बुधवार को आजमगढ़ के ग्राम बड़ौरा बुजुर्ग में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहां उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने खेत में उतरकर ग्रामीण महिलाओं के साथ धान की रोपाई की और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर श्रम करते हुए यह संदेश दिया कि देश की खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली ताकत गांव की मेहनतकश महिलाएं हैं।

कीचड़ से भरे खेत में ग्रामीण महिलाओं के साथ धान रोपते हुए डॉ. प्रियंका मौर्या ने न केवल श्रम का सम्मान किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जनप्रतिनिधि यदि आमजन के बीच पहुंचकर उनकी परिस्थितियों को समझें, तो समस्याओं के समाधान का रास्ता और अधिक प्रभावी बन सकता है।
खेत बना संवाद का मंच, महिलाओं से जाना उनका सुख-दुख
धान की रोपाई के दौरान डॉ. प्रियंका मौर्या ने ग्रामीण महिलाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने महिलाओं का हालचाल जाना और उनके परिवार, आजीविका, कृषि कार्य तथा दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन्हें सरकार द्वारा संचालित महिला कल्याण, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं। महिलाओं ने भी खुलकर अपनी बातें साझा कीं और गांव की विभिन्न आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया।

"हर पात्र महिला तक पहुंचे योजनाओं का लाभ"
डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़ी प्रत्येक पात्र महिला तक पहुंचे, यह शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि कोई भी महिला अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे।
ग्रामीण महिलाएं हैं कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव
डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि खेतों में महिलाओं की मेहनत केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और देश की खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं कृषि, पशुपालन और परिवार की जिम्मेदारियों को एक साथ निभाकर समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए सीधे गांवों तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है।
सहज व्यवहार से जीता ग्रामीण महिलाओं का दिल
राज्य महिला आयोग की सदस्य को अपने बीच पाकर ग्रामीण महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने उनके सहज, सरल और आत्मीय व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि खेतों तक पहुंचकर आम लोगों के साथ श्रम करते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं, तो शासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होता है। ग्रामीण महिलाओं ने इसे अपने सम्मान और मनोबल को बढ़ाने वाला कदम बताया।
अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील
डॉ. प्रियंका मौर्या ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को उत्पीड़न, भेदभाव या किसी अन्य प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है तो वह बिना संकोच संबंधित अधिकारियों अथवा राज्य महिला आयोग से संपर्क करे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य महिला आयोग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
ग्राम बड़ौरा बुजुर्ग में डॉ. प्रियंका मौर्या का यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के श्रम, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सलाम करने वाली संवेदनशील पहल बनकर सामने आया। खेत में धान की रोपाई कर उन्होंने यह संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों और भाषणों से नहीं, बल्कि समाज के बीच जाकर उनके सुख-दुख में सहभागी बनने से साकार होता है। यह पहल शासन और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी।







