दीपिका शर्मा को न्याय दिलाने की गूंज: बड़हलगंज में उमड़ा जनसैलाब, हजारों मोमबत्तियों की रोशनी में उठी एक ही पुकार—"बेटी को न्याय दो, दोषियों को कठोर दंड दो"

दीपिका शर्मा को न्याय दिलाने की गूंज: बड़हलगंज में उमड़ा जनसैलाब, हजारों मोमबत्तियों की रोशनी में उठी एक ही पुकार—"बेटी को न्याय दो, दोषियों को कठोर दंड दो"

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, शुभम शर्मा, गोरखपुर, .प्र.

बड़हलगंज (गोरखपुर)।
गोरखपुर की बेटी दीपिका शर्मा के साथ हुई हृदयविदारक और जघन्य घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना के विरोध में रविवार को बड़हलगंज की सड़कों पर इंसाफ की आवाज बुलंद हुई। न्याय की मांग को लेकर आयोजित भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा एवं विशाल कैंडल मार्च में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में जलती मोमबत्तियां, आंखों में पीड़ा और होठों पर न्याय की मांग ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। लेटाघाट से शुरू होकर बाईपास रोड स्थित अंबेडकर चौराहा तक निकला यह शांतिपूर्ण कैंडल मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि समाज की सामूहिक संवेदना, बेटियों की सुरक्षा की चिंता और न्याय व्यवस्था में विश्वास की एक सशक्त अभिव्यक्ति बन गया। पूरे मार्ग पर लोगों ने मौन रहकर दीपिका शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।


मोमबत्तियों की रोशनी में गूंजा इंसाफ का संदेश

जैसे-जैसे कैंडल मार्च आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे लोगों का हुजूम भी इसमें शामिल होता गया। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि किसी भी बेटी के साथ इस प्रकार की अमानवीय घटना सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। लोगों का कहना था कि यदि ऐसे अपराधों पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण और गहरा होगा। श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित नागरिकों ने दीपिका शर्मा के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों को कानून के तहत कठोर से कठोर सजा दिलाने की मांग की।


बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता, समाज ने उठाई मजबूत आवाज

कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज आवश्यकता केवल अपराधियों को सजा देने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की भी है। महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि बेटियां सुरक्षित रहेंगी तभी समाज और देश सुरक्षित एवं प्रगतिशील बन सकेगा। उपस्थित लोगों ने कहा कि कानून का भय अपराधियों के मन में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के जघन्य अपराध करने का साहस न कर सके।


सैकड़ों लोगों की उपस्थिति ने दिया सामाजिक एकता का संदेश

इस श्रद्धांजलि एवं कैंडल मार्च में नाई समाज के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम में पूर्व प्रधान खैरवा खदेरू शर्मा, पवन शर्मा, अनिकेत शर्मा, पीयूष शर्मा, हर्ष शर्मा, आशीष शर्मा, बिट्टू शर्मा, राकेश कुमार शर्मा, सर्वेश शर्मा, पिंटू शर्मा, रविंद्र शर्मा, ध्रुव शर्मा, मनीष शर्मा, अंशु शर्मा तथा सभासद दीपक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं एवं क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए यह संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध समाज हमेशा एकजुट रहेगा।


शांतिपूर्ण ढंग से निकला मार्च, अनुशासन बना मिसाल

पूरे कैंडल मार्च के दौरान अनुशासन और शांति का वातावरण बना रहा। किसी प्रकार का उपद्रव या अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। प्रतिभागियों ने शांतिपूर्वक अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए समाज में न्याय, संवेदनशीलता और महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। लोगों ने कहा कि बेटियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर जनजागरण अभियान निरंतर चलाया जाएगा तथा किसी भी पीड़ित परिवार की न्याय की लड़ाई में समाज हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।


समाज का संकल्प: अन्याय के खिलाफ संघर्ष रहेगा जारी

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और संकल्प लिया कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए सामाजिक जागरूकता का अभियान निरंतर चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के साथ अन्याय पूरे समाज के आत्मसम्मान पर चोट है और ऐसे मामलों में न्याय मिलने तक आवाज बुलंद होती रहेगी। बड़हलगंज में निकला यह कैंडल मार्च केवल दीपिका शर्मा को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज की सामूहिक चेतना, संवेदनशीलता और न्याय की मांग का ऐसा प्रतीक बन गया जिसने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, तब न्याय की उम्मीद और भी मजबूत हो जाती है।