पुतिन के भारत दौरे से पहले कूटनीतिक हलचल तेज—जयशंकर-लावरोव की मॉस्को में मुलाकात, डोभाल-पत्रुशेव की दिल्ली में रणनीतिक चर्चा
स्पेशल रिपोर्ट | भारत-रूस शिखर सम्मेलन 2025 से पहले दोनों देशों में बढ़ी गतिविधि
दिसंबर में प्रस्तावित भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कूटनीतिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी आ गई है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी लगातार संवाद में हैं, जिससे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही हैं।
मॉस्को में जयशंकर–लावरोव की अहम वार्ता
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा साझेदारी, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार—
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शिखर सम्मेलन के एजेंडा को अंतिम रूप देने,
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रणनीतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने,
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और वैश्विक परिदृश्य में बदलते समीकरणों पर साझा दृष्टिकोण की पुष्टि करना
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रहा।
जयशंकर और लावरोव की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश मल्टी-पोलर विश्व व्यवस्था को मजबूती देने पर जोर दे रहे हैं।
नई दिल्ली में डोभाल-पत्रुशेव की हाई-लेवल सुरक्षा बातचीत
उधर, दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और रूसी सुरक्षा परिषद के शक्तिशाली सचिव निकोलाई पत्रुशेव की मुलाकात ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग को नई दिशा दी।
इस चर्चा के प्रमुख बिंदु रहे—
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आतंकवाद और उग्रवाद पर साझा रणनीति
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उच्च-स्तरीय रक्षा समझौते
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संवेदनशील तकनीकों और खुफिया सहयोग में प्रगति
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इंडो-पैसिफिक और यूरेशिया क्षेत्र की सामरिक स्थिति
इन वार्ताओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पुतिन के दौरे से पहले दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक तंत्रों के बीच तालमेल मजबूत किया जा रहा है।
शिखर सम्मेलन क्यों अहम?
दिसंबर में होने वाला भारत–रूस शिखर सम्मेलन कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है—
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द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी के नए अध्याय
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ऊर्जा, परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग में बड़े फैसले
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व्यापार और भुगतान प्रणाली पर प्रगति
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वैश्विक राजनीति में भारत-रूस धुरी का संदेश
दोनों देशों की हालिया हलचल से यही संकेत मिलता है कि इस बार का शिखर सम्मेलन कई ऐतिहासिक निर्णयों का मंच बन सकता है।
भारत और रूस के बीच बढ़ती कूटनीतिक गर्माहट से स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा न केवल औपचारिक दौरा होगी, बल्कि वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों का संदेश भी देगी।






