15.50 लाख की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार: फर्जी कॉल, कॉन्ट्रैक्ट और मनी क्रेडिट मैसेज के नाम पर देशभर में बिछाया था ठगी का जाल
- आजमगढ़ साइबर पुलिस की बड़ी सफलता, 13 राज्यों की शिकायतों से जुड़ा शातिर अपराधी दबोचा; मोबाइल और नकदी बरामद

आजमगढ़। डिजिटल युग में साइबर अपराध जिस तेजी से आम लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं, उसी के बीच आजमगढ़ साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है, जिसने फर्जी कॉल, झूठे कॉन्ट्रैक्ट, नकली मनी क्रेडिट मैसेज और सॉफ्टवेयर बेचने के नाम पर देशभर के लोगों को अपना शिकार बनाया। जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों से 13 एनसीआरपी (NCRP) शिकायतें दर्ज थीं, जिनमें करीब 15.50 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन, अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात) पंकज श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल के मार्गदर्शन में थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम द्वारा की गई।
प्रतिबिंब पोर्टल से मिला सुराग, तकनीकी जांच ने खोले कई राज
साइबर पुलिस को प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से मोबाइल नंबर 7607258498 संदिग्ध मिला। जब इस नंबर की तकनीकी जांच की गई तो उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और समन्वय पोर्टल के विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। संबंधित मोबाइल नंबर और उससे जुड़े आईएमईआई नंबर पर विभिन्न राज्यों से दर्ज कुल 13 एनसीआरपी शिकायतें मिलीं, जो लगभग 15 लाख 50 हजार रुपये की साइबर ठगी से संबंधित थीं। जांच के दौरान मोबाइल नंबर के धारक की पहचान पंकज सिंह, निवासी ग्राम सरायवृन्दावन, थाना तरवां, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई।
मुखबिर की सूचना पर दबिश, गांव के ट्यूबवेल के पास से गिरफ्तारी
30 जुलाई 2026 को थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर आरोपी को उसके गांव स्थित ट्यूबवेल के पास से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और 1,350 रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आरोपी के विरुद्ध मु0अ0सं0 36/2026 के तहत धारा 317(2), 318(4), 319(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
ऐसे बुनता था साइबर ठगी का जाल
पूछताछ में आरोपी ने साइबर अपराध के कई ऐसे तरीके उजागर किए, जिनसे वह वर्षों से लोगों को ठगता चला आ रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले चार से पांच वर्षों से साइबर धोखाधड़ी में सक्रिय था। वह ऑनलाइन Just Dial जैसी वेबसाइटों पर निर्माण कार्य से जुड़े उपकरण उपलब्ध कराने वाले व्यापारियों का डेटा जुटाता था। इसके बाद स्वयं को L&T, नवी मुंबई का कर्मचारी बताकर उनसे संपर्क करता और जेसीबी, बुलडोजर तथा अन्य भारी मशीनों को बड़े सरकारी या निजी प्रोजेक्ट में लगाने का झांसा देता। फर्जी कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के नाम पर उनसे अलग-अलग मदों में रकम वसूल लेता।
इतना ही नहीं, आरोपी लोगों के मोबाइल पर फर्जी मनी क्रेडिट मैसेज भेजता और यह विश्वास दिलाता कि गलती से उनके खाते में पैसा चला गया है। इसके बाद वह लोगों से वही रकम अपने बताए खाते में वापस ट्रांसफर करा लेता। इसके अलावा सॉफ्टवेयर बेचने के नाम पर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था।
जनसेवा केंद्रों के माध्यम से निकालता था ठगी का पैसा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को आरोपी सीधे अपने खाते में नहीं रखता था। वह विभिन्न जिलों के जनसेवा केंद्र संचालकों को कमीशन और चार्ज देकर क्यूआर कोड के माध्यम से रकम मंगवाता और बाद में उसे नकद प्राप्त कर लेता था। इस तरीके से वह जांच एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश करता था।
पहले भी दर्ज हैं कई मुकदमे
गिरफ्तार आरोपी पंकज सिंह के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें साइबर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, आईटी एक्ट के मामले तथा अन्य आपराधिक प्रकरण शामिल हैं। उसके विरुद्ध मऊ और आजमगढ़ के साइबर क्राइम थानों के अलावा थाना तरवां में भी मुकदमे दर्ज हैं।
बरामदगी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से—
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एक मोबाइल फोन
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1,350 रुपये नकद
बरामद किए हैं।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस सफल कार्रवाई में थाना साइबर क्राइम के प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक रजत सिंह, कांस्टेबल एजाज खान, विकास कुमार, संजय कुमार, महिपाल यादव तथा सर्विलांस सेल के कांस्टेबल आलोक सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
साइबर अपराधियों पर लगातार कसा जा रहा शिकंजा
आजमगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि तकनीक का दुरुपयोग कर आम नागरिकों की मेहनत की कमाई लूटने वाले साइबर अपराधी अब कानून की पकड़ से बच नहीं पाएंगे। पुलिस लगातार तकनीकी संसाधनों, प्रतिबिंब पोर्टल और समन्वय पोर्टल की सहायता से ऐसे अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, फर्जी कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी, निवेश, मनी क्रेडिट मैसेज या ऑनलाइन भुगतान संबंधी दावे पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
आजमगढ़ साइबर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान को और अधिक मजबूती देने वाला कदम भी साबित हुई है।







