गगहा हत्याकांड: लाठी-डंडों से पीटकर मुस्ताक की हत्या, पाँच आरोपी गिरफ्तार – पीड़ित परिवार ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार

गगहा हत्याकांड: लाठी-डंडों से पीटकर मुस्ताक की हत्या, पाँच आरोपी गिरफ्तार – पीड़ित परिवार ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार
  • आर.वी.न्यूज़ | ब्यूरो प्रमुख- एन. अंसारी
  • नरसिंह यादव क्राइम रिपोर्टर 

गोरखपुर।
जनपद गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र का ठठौली गाँव इन दिनों चर्चाओं में है। तीन दिन पहले यहाँ बरईपार निवासी मुस्ताक अली (उम्र लगभग 50 वर्ष) का शव बरामद हुआ था। इस सनसनीखेज हत्या कांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने इस मामले में न केवल न्याय की माँग की है बल्कि थाना स्तर पर हुई अनियमितताओं और संदिग्ध रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।


वीडियो वायरल और गिरफ्तारी

रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कई लोग मुस्ताक को बेरहमी से लाठी-डंडों से पीटते हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आते ही गगहा पुलिस ने कार्रवाई तेज की और दबिश देकर पाँच आरोपियों – शिवचंद, आशुतोष, रोहित तथा दो बाल अपचारी राहुल और कविचंद – को मंगल बाजार से गिरफ्तार कर लिया।


हालाँकि, मृतक की पुत्री सहनाज की तहरीर पर शुरू में केवल गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया। पुलिस के अनुसार, इस हत्या में दो और लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में अलग-अलग टीमें सक्रिय रूप से लगी हुई हैं।


ग्रामीणों का आक्रोश

सोमवार को मृतक मुस्ताक के गाँव बरईपार के दर्जनों ग्रामीण गगहा थाने पहुँच गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हत्यारों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाते हुए आश्वासन दिया कि "एक भी आरोपी बच नहीं पाएगा और सभी को जेल भेजा जाएगा।"


बेटी सहना का दर्द और आरोप

सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब मृतक की पुत्री सहना वानो ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को पत्र लिखकर कई गंभीर आरोप लगाए। सहना के अनुसार –

  • उनके पिता मुस्ताक अली एक दहेज हत्या के मुकदमे में बंद अपने भांजे को छुड़ाने के प्रयास में कई दिनों से गगहा थाना का चक्कर काट रहे थे।

  • सहना ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उन्होंने थाने के कोतवाल को लगभग 50 हजार रुपये दिए थे, जिसे वापस लेने के लिए वे बार-बार थाने जा रहे थे।

  • सहना ने पत्र में यह भी लिखा कि उनके पिता 15 अगस्त की सुबह घर से "थाने जा रहा हूँ" कहकर निकले थे और फिर कभी वापस नहीं लौटे।

  • इसके बाद ठठौली गाँव से उन्हें लगातार धमकी भरे फोन आने लगे।

  • सहना का दावा है कि उन्होंने स्वयं थाने में अपने पिता की मोटरसाइकिल खड़ी देखी और जब इस बारे में कोतवाल से सवाल किया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

  • सहना ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पिता के शव का जल्दबाजी में पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, यहाँ तक कि परिवार को मृतक का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया।

  • इतना ही नहीं, सहना ने बताया कि थाने में उनसे जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए और बाद में जब वे मुकदमा दर्ज कराने पहुँचीं तो कोतवाल ने कहा कि "अभी नहीं हो पाएगा, मैं छुट्टी पर जा रहा हूँ।"


संदेह के घेरे में पुलिस की भूमिका

सहना के पत्र में गगहा थाने के कोतवाल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोतवाल ने न केवल शिकायत को दबाने की कोशिश की बल्कि मृतक का मोबाइल फोन भी अपने पास रख लिया। सहना ने कहा कि पुलिस की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध प्रतीत होती है और उन्हें न्याय दिलाने की जगह मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।


बढ़ती तफ्तीश और जनता की निगाहें

इस पूरे प्रकरण ने गोरखपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मृतक परिवार पुलिस पर पक्षपात और लापरवाही का आरोप लगा रहा है।

गाँव के लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मुस्ताक को बेरहमी से पीटा गया, फिर भी पुलिस पहले मुकदमे को हल्के में दर्ज कर रही थी।


न्याय की पुकार

अब पीड़ित परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से है। सहना ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि –
"हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारे पिता की हत्या में शामिल सभी आरोपियों को सख्त से सख्त सज़ा मिले और पुलिस की मिलीभगत की निष्पक्ष जाँच हो।"


गगहा हत्याकांड केवल एक हत्या की वारदात नहीं, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय पाने के लिए बार-बार गुहार लगानी होगी? क्या थानों में बैठी वर्दीदार व्यवस्था आमजन के विश्वास पर खरी उतर रही है?

यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर रहा है। गगहा की मिट्टी में उठी यह चीख अब गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश से यही सवाल पूछ रही है –
"क्या कानून के राज में न्याय इतनी देर से और इतनी मुश्किल से मिलेगा?"


यह खबर अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों और आमजन की निगाहें इस केस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।