न्याय की आस में गुजरी 10 साल, तहसील से हाई कोर्ट तक सिर्फ चक्कर!

न्याय की आस में गुजरी 10 साल, तहसील से हाई कोर्ट तक सिर्फ चक्कर!

आर.वी.9 न्यूज़ | नरसिंह यादव क्राइम रिपोर्टर के साथ कैमरामैन कौस्तुभ तिवारी, गोरखपुर (उ.प्र.) 


गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: हाटा बाजार में एक परिवार पिछले 10 सालों से न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन जमीन का विवाद अब भी जस का तस बना हुआ है। साल 2015 से चला आ रहा यह मामला तहसील, जिला और यहां तक कि हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक अपनी जमीन का कब्जा नहीं मिल सका है। इस कानूनी लड़ाई में थक हारकर मूल वादी ललिता देवी की भी 2020 में मृत्यु हो गई।

क्या है पूरा मामला?

हाटा बाजार की गाटा संख्या 857 की एक कीमती जमीन ललिता देवी ने 2015 में खरीदी थी। लेकिन, जमीन खरीदने के बाद से ही उस पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया। ललिता देवी ने अपनी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए थाने और तहसील के कई चक्कर लगाए।

2019 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी और गगहा पुलिस की मौजूदगी में बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई। भारी विरोध के बावजूद प्रशासन ने कार्यवाही जारी रखी, लेकिन अंत में 9 एयर जमीन विवादित रह गई, जिस पर आज भी अवैध कब्जा बरकरार है।

अधिकारियों के आदेश भी हुए बेअसर

इस मामले में 11 दिसंबर 2019 को उपजिलाधिकारी बांसगांव ने बेदखली का आदेश दिया था और अवैध कब्जा करने वालों पर ₹2,000 का आर्थिक दंड भी लगाया था। इसके बाद, जनवरी 2024 में कमिश्नर ने भी विपक्षी की अपील को खारिज करते हुए बेदखली का आदेश बरकरार रखा। इन सभी आदेशों के बावजूद, जमीन खाली नहीं कराई जा सकी और उस पर निर्माण कार्य जारी रहा।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे पुलिस और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण जमीनी विवाद वर्षों तक उलझे रहते हैं, और न्याय की उम्मीद में लोग अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर देते हैं। अब ललिता देवी के बेटे एक बार फिर हाई कोर्ट की शरण में गए हैं, और उन्हें उम्मीद है कि इस बार उन्हें न्याय मिलेगा।